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अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस पर विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा जिले के विभिन्न स्थानों पर विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम स्टेट प्लान ऑफ एक्शन कैलेंडर 2025 के तहत आयोजित किए गए। अध्यक्ष एवं प्रधान जिला न्यायाधीश सरोज नंद दास, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव अनिता कोशिमा रावटे के मार्गदर्शन में मानव अधिकारों की अवधारणा, उनका महत्व और संरक्षण के कानूनी उपायों की जानकारी दी गई।
जिला जेल में आयोजित मुख्य शिविर में सचिव ने बंदियों को मानव अधिकारों के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मानव अधिकार वे मूलभूत अधिकार हैं जो प्रत्येक व्यक्ति को जन्मजात प्राप्त होते हैं, जैसे जीवन, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वतंत्रता, समानता और गरिमा का अधिकार। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि जाति, धर्म, लिंग या भाषा के आधार पर किसी भी प्रकार के भेदभाव से बचाने में मानव अधिकार महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस वर्ष की थीम पर चर्चा करते हुए सचिव ने कहा कि मानव अधिकार विशेष सुविधा नहीं, बल्कि दैनिक जीवन की मूलभूत आवश्यकता हैं।
जिले में विभिन्न स्थानों पर शिविर आयोजित किए गए। जिनमें प्रमुख रूप से एसबीआई आरसेटी प्रशिक्षण संस्थान, शासकीय उचित मूल्य की दुकान चोरभट्टी, धान मंडी बसनी, इंदिरा गांधी कृषि महाविद्यालय बोलिया, शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला ठेलका (साजा) शामिल थे। इन शिविरों में अधिकार मित्रों ने मानव अधिकारों की परिभाषा, उपयोगिता और संरक्षण के लिए कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी।
इंदिरा गांधी कृषि महाविद्यालय बोलिया में एलएडीसी काउंसिल के दिनेश तिवारी ने कहा कि मानव अधिकार सुरक्षा, न्याय, सम्मान और समानता के साथ जीने का अधिकार प्रदान करते हैं। इसी तरह, शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला ठेलका में विद्यार्थियों को अधिकार मित्रों द्वारा उनके महत्व और संरक्षण की जानकारी दी गई।
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