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हाई कोर्ट ने बेलतरा और सुकुलकारी क्षेत्र में गायों की लगातार हो रही मौतों के मामले में दिए गए शपथ पत्र को ‘असंतोषजनक और अपर्याप्त’ बताते हुए सख्त नाराजगी जाहिर की है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने पशुधन विकास विभाग के स
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हाई कोर्ट ने बेलतरा और सुकुलकारी क्षेत्र में गायों की लगातार हो रही मौतों को लेकर खबरों पर संज्ञान लिया था। मामले में जनहित याचिका के तौर पर सुनवाई करते हुए पशुधन विकास विभाग के सचिव से शपथ पत्र मांगा गया था। सोमवार को सुनवाई के दौरान कहा कि मवेशियों की मौत की घटना 15 अक्टूबर 2025 को हुई थी, लेकिन संबंधित अधिकारियों ने 23 अक्टूबर को खबर प्रकाशित होने और हाई कोर्ट द्वारा संज्ञान लेने के बाद ही कोई प्रभावी कार्रवाई की। एक से अधिक स्थानों पर मवेशियों के सड़े-गले शव मिलना स्पष्ट रूप से बताता कि क्षेत्र में नियमित सुपरविजन की कमी है। इसके अलावा मृत गायों के गौठान या निजी मालिकों से संबंधित होने के बारे में विरोधाभासी बयान और ग्रामीणों का मृत पशुओं के शवों को गांव से बाहर छोड़ देने की बात अपर्याप्त प्रबंधन और प्रशासनिक नियंत्रण की कमी बताती है।
हाई कोर्ट ने पाया कि पशुधन विकास विभाग के सचिव द्वारा 26 अक्टूबर को दिया गया शपथ पत्र केवल खानापूर्ति है। इसमें गौशालाओं में रखे गए कुल मवेशियों की संख्या, चारे, पानी और चिकित्सा देखभाल की उपलब्धता आदि नहीं बताई गई। सड़कों पर इस तरह खुला छोड़ने से मवेशी हादसों के शिकार हो रहे हैं। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बताया कि मवेशियों के बेहतर देखभाल के लिए गोधाम योजना बनाई गई है, जिसे 6 अगस्त 2025 को सभी कलेक्टरों को भी भेजा गया है। हाई कोर्ट ने उम्मीद जताई कि संबंधित अधिकारी इस योजना को अक्षरश: लागू करेंगे।
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