टॉप न्यूज़

उच्च शिक्षा का संकट:रोजगार की गारंटी वाले 32 कोर्स तीसरे साल फ्लॉप, दो कॉलेज बंद होने जा रहे




पहले विश्वविद्यालय छात्रों की मांग देखकर नए कोर्स शुरू करते थे, लेकिन अब कोर्स शुरू कर छात्रों का इंतजार कर रहे हैं। बिलासपुर के अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय (एयू) की मौजूदा प्रवेश प्रक्रिया ने उच्च शिक्षा की इस बड़ी विडंबना को उजागर कर दिया है। उद्योग और बाजार की जरूरतों का हवाला देकर तीन साल पहले शुरू किए गए विश्वविद्यालय के 32 डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स छात्रों को आकर्षित करने में नाकाम रहे हैं। अधिकांश पाठ्यक्रमों में महज दो से सात आवेदन ही आए हैं, जबकि कुछ में तो खाता तक नहीं खुला है। यह केवल एक विश्वविद्यालय का संकट नहीं है, बल्कि बदलती छात्र-मानसिकता और उच्च शिक्षा की योजनाओं के बीच बढ़ती दूरी का संकेत है। सरकार जहां एक ओर रोजगार आधारित शिक्षा पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी ओर छात्र उन्हीं पाठ्यक्रमों से दूरी बना रहे हैं जिन्हें ‘रोजगारपरक’ बताकर प्रचारित किया गया था। आधी सीटें भी नहीं भर सकीं, संस्थानों के अस्तित्व पर संकट एयू से संबद्ध 110 कॉलेजों में इस वर्ष कुल 35,255 सीटें उपलब्ध हैं। अब तक 16 हजार के आसपास ही आवेदन ही मिले हैं। यानी आधी सीटों के लिए भी छात्र नहीं जुट पाए हैं। इसके अलावा, यूजी और पीजी की कुल 55,180 सीटों पर पहली मेरिट सूची जारी होने के बाद अब तक सिर्फ 364 छात्रों (कुल सीटों का लगभग 1%) ने ही प्रवेश लिया है। छात्रों की इस घटती संख्या का सीधा असर अब शिक्षण संस्थानों के वजूद पर दिखने लगा है। ओरिएंटल कॉलेज और कोरबा कंप्यूटर कॉलेज ने विश्वविद्यालय से अपनी संबद्धता समाप्त करने (बंद होने) का आवेदन दे दिया है। सरकारी कॉलेजों और सीयू का भी यही हाल रोजगार आधारित पाठ्यक्रमों के प्रति यह उदासीनता केवल एयू तक सीमित नहीं है। पिछले सत्र में बिलासा गर्ल्स कॉलेज में बीएससी क्लीनिकल न्यूट्रीशन की 140 सीटें, बीएससी फूड साइंस की 135 सीटें और फैशन डिजाइनिंग की 25 सीटें खाली रह गईं। बेसिक एंड एडवांस स्पोर्ट्स फिटनेस की 40 सीटों के लिए केवल 17 आवेदन आए। इसी तरह, केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयू) में भी एमएससी रूरल टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक्स, माइक्रोबायोलॉजी, बीलिब, बीपीएड, एमसीए और फॉरेंसिक साइंस जैसे कोर्स अपनी पूरी क्षमता तक नहीं भर सके। इन प्रमुख कोर्सों से छात्रों ने बनाई दूरी विश्वविद्यालय ने तीन साल पहले साइबर सिक्योरिटी, होटल मैनेजमेंट, फूड प्रोसेसिंग, जीएसटी, ई-कॉमर्स, रिटेल मैनेजमेंट, टूरिज्म, बायोफ्यूल, फूड सेफ्टी और इंग्लिश कम्युनिकेशन जैसे 32 नए कोर्स इस उम्मीद के साथ शुरू किए थे कि हर साल प्रवेश बढ़ेंगे। लेकिन स्थिति साल-दर-साल खराब होती गई। भास्कर एक्सपर्ट – डॉ. सुधीर शर्मा, पूर्व कुलसचिव, एयू छात्रों ने विश्वविद्यालय से ज्यादा बाजार को पढ़ लिया छात्रों ने विश्वविद्यालय से ज्यादा बाजार को पढ़ लिया है। इस बार का सबसे बड़ा संदेश यह है कि छात्र विश्वविद्यालयों की योजना से नहीं, नौकरी के बाजार से अपना भविष्य तय कर रहे हैं। बीए में इसलिए भीड़ है क्योंकि प्रतियोगी परीक्षाओं में उपयोगी है। लॉ इसलिए पसंद है, क्योंकि करियर स्पष्ट दिखता है। कंप्यूटर साइंस और बीसीए इसलिए क्योंकि सूचना प्रौद्योगिकी सेक्टर अभी भी अवसर दे रहा है। लेकिन जिन कोर्सों में नौकरी का रास्ता साफ नहीं है। उस दिशा में छात्र जाना ही नहीं चाहते।



Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button