नई शराब नीति को लेकर आबकारी विभाग ने क्लब संचालकों के साथ बैठक की। इस पर कांग्रेस ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि जो सरकार शराबबंदी का वादा करके सत्ता में आई थी, अब वही शराब की बिक्री बढ़ाने के लिए सलाह ले रही है।
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कांग्रेस ने कहा कि अगर सुझाव लेना है तो छत्तीसगढ़ की महिलाओं से लेना चाहिए, क्योंकि वे ही प्रदेशभर में शराब बंद कराने के लिए आंदोलन कर रही हैं।
इस पर बीजेपी ने जवाब दिया कि सरकार सिर्फ इतना चाहती है कि क्लबों में समय और नियमों का पालन हो, ताकि कोई अव्यवस्था न फैले जैसा कि कांग्रेस के शासन में होता था।
नई शराब नीति को लेकर सरकार ने शुरू की तैयारी
छत्तीसगढ़ सरकार ने आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई शराब नीति को ज्यादा पारदर्शी और व्यवहारिक बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए आबकारी सचिव और आयुक्त आर. शंगीता के नेतृत्व में तीन दिनों तक बैठकें की गईं।
इन बैठकों में लाइसेंसधारकों और शराब उद्योग से जुड़े लोगों के साथ चर्चा की गई। ये बैठकें 13 से 15 अक्टूबर 2025 के बीच रायपुर में आयोजित हुईं।
इन बैठकों का उद्देश्य यह था कि नई शराब नीति बनाने से पहले उन लोगों से सुझाव लिए जाए जो सीधे शराब के कारोबार से जुड़े हैं। इससे नीति जमीन से जुड़ी होगी और व्यापार के लिहाज से भी ज्यादा बेहतर और आसान बनाई जा सकेगी।
पहले दिन: बॉटलिंग और उत्पादन यूनिट्स से चर्चा
13 अक्टूबर को प्रदेश में काम कर रही शराब बनाने और बॉटलिंग करने वाली कंपनियों के संचालकों से बातचीत की गई। इस बैठक में आयात-निर्यात पर लगने वाला शुल्क, बॉटलिंग और लाइसेंस फीस, काउंटरवेलिंग ड्यूटी, ऑनलाइन पेमेंट की सुविधा, नई बोतलों के इस्तेमाल की अनुमति और गोदामों की छुट्टी के दिनों में काम करने की अनुमति जैसे जैसे मुद्दों पर सुझाव लिए गए।
दूसरे दिन: विदेशी शराब कंपनियों से बातचीत
14 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ के बाहर की विदेशी शराब कंपनियों और उनके सप्लायर्स के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की गई। इस दौरान काउंटरवेलिंग ड्यूटी, हैंडलिंग चार्ज, आयात-निर्यात शुल्क, बॉटलिंग फीस, लाइसेंस फीस और विदेशी शराब के गोदामों से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा की गई।
तीसरे दिन: बार और क्लब संचालकों से चर्चा
15 अक्टूबर को तीसरी बैठक में बार और क्लब संचालकों और उनके संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस बैठक में उन्होंने अपनी समस्याएं और सुझाव रखे। बातचीत में न्यूनतम बिक्री लक्ष्य (MG), लाइसेंस फीस, बार के खुलने और बंद होने का समय, अलग-अलग ब्रांड की बिक्री और अवैध गतिविधियों को रोकने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
सुझावों के आधार पर बनेगी नई शराब नीति
आबकारी सचिव ने बताया कि तीनों दिनों की बैठकों में जो सुझाव मिले हैं, उनका गहराई से विश्लेषण किया जाएगा। इन सुझावों के आधार पर साल 2026-27 के लिए बार नीति, अहाता नीति और शराब दुकानों के संचालन से जुड़े नियम बनाए जाएंगे।

कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय ठाकुर
कांग्रेस बोली- शराब माफिया से सलाह, जनता से नहीं
कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय ठाकुर ने कहा कि भाजपा सरकार नई आबकारी नीति बनाने के लिए शराब बेचने वालों से सुझाव ले रही है और उनके मुताबिक नियम बना रही है, ताकि ज्यादा से ज्यादा शराब बिके और मुनाफाखोरी की जा सके। उन्होंने सवाल उठाया कि जब नई आबकारी नीति बनाई जा रही है, तो आम जनता से सुझाव क्यों नहीं लिए जा रहे? खासकर महिलाओं से क्यों नहीं पूछा जा रहा, जिनके घर अवैध शराब की वजह से बर्बाद हो रहे हैं?
प्रदेशभर में महिलाएं शराबबंदी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रही हैं, लेकिन सरकार उनकी आवाज नहीं सुन रही है। धनंजय ठाकुर ने कहा कि भाजपा का असली मकसद ज्यादा शराब बेचना है, इसलिए जो लोग शराब का विरोध कर रहे हैं, उन्हें इस प्रक्रिया से दूर रखा गया है।

भाजपा प्रवक्ता देवलाल ठाकुर
समय पर काम हो, इसलिए बैठक ली गई: भाजपा
भाजपा प्रवक्ता देवलाल ठाकुर ने कहा कि अगर आबकारी विभाग क्लब संचालकों की मीटिंग ले रहा है तो कांग्रेस को इससे आपत्ति नहीं होनी चाहिए। विभाग चाहता है कि क्लबों में नियमों के अनुसार और तय समय के अंदर काम हो, तो इसमें गलत क्या है?
उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस की सरकार थी, तब क्लबों और बार में नशीली चीजें परोसी जाती थी। ऐसी स्थिति फिर से न बने, इसलिए यह बैठक जरूरी थी।
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