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छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में सर्व आदिवासी समाज के पूर्व जिला अध्यक्ष जीवन ठाकुर की रायपुर सेंट्रल जेल में 4 दिसंबर को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। इस घटना के बाद आदिवासी समाज और उनके परिवारजनों में गहरा आक्रोश है।
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परिवार और समाजजनों ने जेल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही, जानकारी छिपाने और हत्या का आरोप लगाते हुए चारामा थाने में ज्ञापन सौंपा है।
जीवन ठाकुर को 12 अक्टूबर 2023 को एक मामले में गिरफ्तार कर कांकेर जिला जेल में रखा गया था। हालांकि, 2 दिसंबर को उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना के रायपुर सेंट्रल जेल स्थानांतरित कर दिया गया।
परिवार का आरोप है कि उन्हें न तो स्थानांतरण की जानकारी दी गई, न ही उनकी तबीयत बिगड़ने की और न ही अस्पताल में भर्ती कराए जाने की सूचना दी गई।
कांकेर सहायक जेल अधीक्षक रेणु ध्रुव मुताबिक, 4 दिसंबर की सुबह 4:20 बजे जीवन ठाकुर को डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल, रायपुर में भर्ती कराया गया था। सुबह 7:45 बजे उनकी मृत्यु हो गई। परिवार को उनकी मौत की सूचना शाम लगभग 5 बजे मिली, जिससे परिजनों में और अधिक रोष है। परिजनों का सवाल है कि जब उनकी तबीयत लगातार बिगड़ रही थी, तो समय पर इलाज क्यों नहीं हुआ और यदि उन्हें रेफर किया गया था, तो इसकी सूचना क्यों नहीं दी गई।
गोंडवाना समाज सामान्य समिति बस्तर संभाग के सुमेर सिंह नाग ने इस घटना को सामान्य मौत नहीं, बल्कि गंभीर लापरवाही और संभवतः हत्या का मामला बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि समाज और परिजन तीन दिनों से थाने और अस्पताल के चक्कर लगा रहे थे, लेकिन किसी ने उन्हें सही जानकारी नहीं दी। वहीं, विधायक सावित्री मंडावी ने भी बिना सूचना के रायपुर स्थानांतरित करने के आदेश की जांच की मांग की है।
परिजनों और समाज ने ज्ञापन में पूरी घटना की मजिस्ट्रियल जांच कराने, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने, मेडिकल रिकॉर्ड और पोस्टमार्टम रिपोर्ट उपलब्ध कराने, परिवार की उपस्थिति में पोस्टमार्टम कराने और परिवार को क्षतिपूर्ति देने की मांग की है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने शव को सुरक्षित रूप से उनके गृह ग्राम लाकर परिवार को सौंपने की भी मांग की है।
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