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दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की महत्वाकांक्षी खरसिया–नया रायपुर–परमलकसा रेलवे परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण को लेकर दुर्ग जिले में किसानों और प्रशासन के बीच विवाद गहराता जा रहा है।
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रविवार को ग्राम कोड़िया स्थित गायत्री मंदिर परिसर में आयोजित बैठक में प्रभावित किसानों ने सर्वसम्मति से फैसला किया कि वे अपनी कृषि भूमि किसी भी कीमत पर रेलवे परियोजना के लिए नहीं देंगे। बैठक में सैकड़ों किसान उपस्थित थे, जिन्होंने इसे अपनी आजीविका और अस्तित्व से जुड़ा मामला बताया। किसानों का कहना है कि यह भूमि उनके पूर्वजों की दी हुई पुश्तैनी संपत्ति है, जो उनके जीवन और पहचान का आधार है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने परियोजना का संरेखण, मुआवजा दर और पुनर्वास नीति की कोई स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। उन्होंने इसे अपने संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन बताया।
दुर्ग जिला प्रशासन ने 20 अगस्त को आदेश जारी कर करगाडीह, पाउवारा, भानपुरी, बोरिगारका, चांदखुरी, चंगोरी और घुघसीडीह सहित कई ग्रामों की निजी कृषि भूमि पर खाता विभाजन, अंतरण और खरीदी-बिक्री पर रोक लगा दी थी। किसानों ने इस कदम को मनमाना बताते हुए इसका कड़ा विरोध किया है। उनका कहना है कि यह निर्णय बिना आमसभा, खुली जनसुनवाई या प्रभावितों की सहमति के लिया गया। बैठक में तय किया गया कि किसानों की संयुक्त आपत्ति का पैकेज 28 अक्टूबर को दुर्ग कलेक्टर को सौंपा जाएगा। उपस्थित लोगों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे परियोजना के खिलाफ सशक्त आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। किसान नेता ढालेश साहू ने कहा कि दुर्ग कलेक्टर का आदेश किसानों के हितों के विपरीत है। पुश्तैनी भूमि उनके जीवन और पहचान का आधार है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि बिना किसानों की सहमति कोई कदम न उठाया जाए और प्रतिबंध आदेश तुरंत निरस्त कर प्रभावित ग्रामों में खुली जनसुनवाई आयोजित की जाए। बैठक में चिंतामणी साहू, दुर्गेश ठाकुर, बालाराम साहू, उमेश साहू, धनराज बंजारे, पंकज देशमुख, राजूलाल देशमुख, गुलाब सिंह साहू, नरेन्द्र सिंह राजपूत और अमित कुमार ने भी आदेश निरस्त करने की मांग की और यदि अनसुना किया गया तो आंदोलन तेज किया जाएगा।
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