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जिले में 15 नवंबर से शुरू हुई धान खरीदी व्यवस्था में विभागीय लापरवाही सामने आने से किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। धान बेचने के लिए पंजीकृत किसानों को न तो समय पर टोकन मिल पा रहा है और न ही उनके वास्तविक रकबे के अनुसार धान का पंजीयन किया जा रहा है। कई किसानों का रकबा कम दर्ज होने से वास्तविक उपज के अनुरूप धान विक्रय संभव नहीं हो पा रहा है।
आदिम जाति सेवा सहकारी समिति पटना से जुड़े किसानों ने बताया कि उन्होंने अपने खेतों में धान की खेती की है और विधिवत गिरदावरी भी कराई गई है, इसके बावजूद कई किसानों का सामान्य धान गलत तरीके से ब्रीडर सुगंधित धान के रूप में दर्ज कर दिया गया है। वहीं फसल विवरण में धान दर्ज होने के बावजूद सोसायटी द्वारा जारी टोकन में रकबा कम दर्शाया जा रहा है। टोकन कटाने समिति पहुंचने पर किसानों को यह कहकर लौटा दिया जाता है कि खरीदी की लिमिट कम है। इससे किसान रोजाना खरीदी केंद्र और पटवारी कार्यालय के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। समस्या से आक्रोशित दर्जनों किसानों ने 19 दिसंबर को कोरिया कलेक्टर को आवेदन सौंपकर निराकरण की मांग की। किसानों ने पंजीयन में त्रुटियों को तत्काल सुधारने और सभी पात्र किसानों को जल्द टोकन जारी कर धान खरीदी सुनिश्चित करने की मांग की है। आवेदन देने वालों में रामकुमार, धर्मपाल, नंदकुमार, बलि सिंह, मोहन सिंह सहित बड़ी संख्या में किसान शामिल रहे।
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