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प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी दशहरा पर्व पर गांवों में माता रानी की विसर्जन शोभायात्रा निकाली गई। जसगीतों और मांदर की थाप के बीच भक्तों ने नम आंखों से मां दुर्गा को विदाई दी। दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।
नवरात्रि के दसवें दिन शुक्रवार को पेंड्रीकला मंदिर से माता दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन विधि-विधान के साथ किया गया। भक्तों ने 94 ज्योति कलश स्थापित किए और प्रतिदिन मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ जंवारा की टोकरियों में देवी को विसर्जन स्थल तक पहुंचाया। सुबह 8 बजे प्रतिमा की पूजा-आरती की गई। मांदर और जसगीत की धुनों के साथ ग्राम के कुल देवी मंदिरों में पूजा अर्चना हुई। महिलाएं आंगन सजाकर शोभायात्रा का स्वागत करती रहीं। रास्ते भर भक्तों ने माता रानी की जयकारे लगाईं और विदाई की धुन से माहौल भक्तिमय बना रहा। पेंड्रीकला समेत आसपास के ग्राम कुंडा, दामापुर, कोदवा डोंगरिया, धनेली, रापा, महली, महका, कोड़ापुरी, जैतपुरी, धौराबंद, सैहामालगी, सोमनापुर, निंगापुर, खैरा, पंवरजली और कोलेगांव सहित अन्य गांवों में भी विसर्जन उत्सव बड़े श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया।
सांग-बाना धारण कर भक्ति का अद्भुत प्रदर्शन शोभायात्रा के दौरान 12 से अधिक भक्तों ने सांग-बाना धारण कर उत्साह और भक्ति का अद्भुत प्रदर्शन किया। बजरंग चौक से चंद्राकर पंचायत चौक, पटेल पारा स्कूल और चन्द्रवंशी पारा होते हुए शोभायात्रा विसर्जन स्थल तक गई। इस दौरान तालाब किनारे अंतिम दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी रही।
प्रतिमा विसर्जन के बाद भंडारे का आयोजन हुआ नौ दिनों तक पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के बाद सुबह से ही मंदिर और पंडालों में भक्तगण जुटने लगे। जगह-जगह फूलों से स्वागत किया गया और युवाओं ने उत्साह और ऊर्जा के साथ शोभायात्रा को संपन्न कराया। विसर्जन के बाद भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
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