नाबालिग बेटी से दुष्कर्म, पिता को उम्रकैद:दुर्ग पॉक्सो कोर्ट का फैसला, कहा- ऐसे अपराधों पर नरमी न्याय के साथ अन्याय

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दुर्ग जिले के पाटन स्थित विशेष पॉक्सो न्यायालय ने नाबालिग बेटी से दुष्कर्म के मामले में उसके पिता को दोषी ठहराते हुए शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। पॉक्सो कोर्ट के पीठासीन अधिकारी दुलार सिंह निर्मलकर ने बुधवार को यह फैसला सुनाया। अदालत ने आरोपी पर 5,000 रुपए का अर्थदंड भी लगाया है, जिसकी राशि जमा होने पर पीड़िता को क्षतिपूर्ति के रूप में दी जाएगी। उल्लेखनीय है कि यह फैसला अपराध दर्ज होने के करीब 170 दिनों के भीतर आया।
दिसंबर 2025 से फरवरी 2026 तक करता रहा दुष्कर्म लोक अभियोजक शेखर वर्मा के अनुसार, आरोपी ने 1 दिसंबर 2025 से 4 फरवरी 2026 के बीच अपनी 16 वर्ष से कम उम्र की बेटी के साथ कई बार जबरन दुष्कर्म किया। घटना के समय वह पीड़िता का पिता और संरक्षक था। न्यायालय ने माना कि आरोपी ने संरक्षण और विश्वास के रिश्ते का गंभीर दुरुपयोग किया। दादी को बताई आपबीती, फिर दर्ज हुई एफआईआर पीड़िता ने अपनी दादी को बताया कि आरोपी उसे लगातार धमकाकर गलत काम करता था। 4 फरवरी 2026 को भी घर में कोई नहीं होने का फायदा उठाकर उसने दुष्कर्म का प्रयास किया। पीड़िता के शोर मचाने पर उसकी दादी मौके पर पहुंच गईं, जिसके बाद आरोपी वहां से हट गया। इसके बाद 8 फरवरी 2026 को अमलेश्वर थाना में मामला दर्ज कराया गया। मेडिकल और वैज्ञानिक साक्ष्यों से साबित हुआ अपराध विवेचना के दौरान पुलिस ने पीड़िता का चिकित्सकीय परीक्षण कराया। न्यायालय के समक्ष जन्म प्रमाणपत्र, मेडिकल रिपोर्ट, एफएसएल रिपोर्ट, जब्त कपड़े, गवाहों के बयान और अन्य दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। अदालत ने इन सभी साक्ष्यों के आधार पर माना कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोप संदेह से परे साबित करने में सफल रहा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी किया उल्लेख सजा सुनाते समय न्यायालय ने 4 अगस्त 2025 के एक महत्वपूर्ण सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि बच्चों के साथ होने वाले जघन्य अपराधों में किसी भी प्रकार की नरमी न्याय के उद्देश्य को कमजोर करती है। महिलाओं और बच्चों की गरिमा एवं सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और ऐसे मामलों में कठोर दंड ही समाज के लिए प्रभावी संदेश देता है। ‘यह पूरे समाज के खिलाफ अपराध’ अपने फैसले में अदालत ने कहा कि पिता और संरक्षक द्वारा किया गया ऐसा कृत्य केवल एक बच्ची के विरुद्ध नहीं, बल्कि पूरे समाज के खिलाफ अपराध है। ऐसे अपराध बच्चे के वर्तमान के साथ-साथ उसके भविष्य को भी गहरा आघात पहुंचाते हैं। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में सहानुभूति की कोई गुंजाइश नहीं है। उम्रकैद, जुर्माना और रिमांड अवधि का समायोजन विशेष पॉक्सो न्यायालय ने आरोपी को पॉक्सो एक्ट की धारा-6 के तहत शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही ₹5,000 का अर्थदंड लगाया गया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर आरोपी को दो माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा। न्यायालय ने 9 फरवरी से 29 जुलाई 2026 तक न्यायिक रिमांड में बिताए गए 170 दिनों को सजा की अवधि में समायोजित करने का भी आदेश दिया।
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