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छत्तीसगढ़ के घने वनों में 78.58 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। इसके कारण यहां की मिट्टी में जैविक कार्बन की मात्रा में 4.01 प्रतिशत की वृद्धि हुई है जिससे जमीन की जमीन की उर्वरता और उत्पादकता दोनों में सुधार हुआ है।
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फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की नई पर्यावरण रिपोर्ट के मुताबिक छत्तीसगढ़ न केवल अपने घने वनों को बचाने में सफल रहा, बल्कि उसमें वृद्धि भी हुई है। प्रदेश का 44.25 फीसदी हिस्सा वनों से ढंका हुआ है जो देश में सर्वाधिक अनुपातों में से एक है। रिपोर्ट में सबसे खास बात यह है कि बस्तर से सरगुजा तक जंगल को बचाने के साथ ही वहां घने वनों की वृद्धि हुई है। इसके कारण छत्तीसगढ़ हरित भारत का सबसे मजबूत केंद्र बनकर उभर रहा है।
कार्बन रिटेंशन सेवाओं में 33 फीसदी की बढ़ोतरी
बताया गया है कि रिपोर्ट के मुताबिक राज्य का कार्बन स्टॉक 504 मिलियन टन से अधिक है। इससे छत्तीसगढ़ देश के क्लाइमेट रेजिलिएंस मॉडल राज्यों में शामिल हो गया है। कार्बन रिटेंशन सेवाओं का मूल्य 32 हजार 398 करोड़ रूपए से बढ़कर 43 हजार करोड़ से अधिक हो गया, यानि इसमें लगभग 33 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वनों से मिलने वाली लकड़ी व गैर-लकड़ी उत्पादों जैसे तेंदूपत्ता, महुआ, लाख आदि का आर्थिक मूल्य लगातार बढ़ रहा है।
क्या है कार्बन रिटेंशन सेवा
कार्बन रिटेंशन सेवा का अर्थ है वनों द्वारा वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर उसे पेड़-पौधे और मिट्टी की संरचनाओं में लंबे समय तक सुरक्षित रखना, जिससे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम किया जा सकता है। इसके कारण जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने में सहायता मिलती है और पर्यावरणीय सततता सुनिश्चित होती है।
129 प्रकार के पेड़, 50 से अधिक प्रकार की जड़ी-बूटियां
रिपोर्ट के मुताबिक छत्तीसगढ़ में 129 प्रकार से अधिक पेड़ पाए जाते हैं जबकि 50 से अधिक प्रकार की जड़ी-बूटियां और 48 तरह की झाडि़यां पाई जाती है। राज्य के 71 फीसदी वन क्षेत्रों में प्राकृतिक रिजनरेशन हो रहा है यानी की नई पौधों में वृद्धि हो रही है।
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