लद्दाख के प्रख्यात जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत गिरफ्तार किया गया है। वे जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद है। सोनम वांगचुक की रिहाई को लेकर लद्दाख में प्रदर्शन जारी है।
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सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी पर प्रदर्शन करते हुए नागरिक समाज प्रतिनिधिमंडल के सदस्य।
इसी बीच छत्तीसगढ़ में सोनम वांगचुक की रिहाई को लेकर नागरिक समाज प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल रमन डेका को ज्ञापन सौंपा है। राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने वांगचुक की रिहाई की मांग की है। राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने के साथ प्रतिनिधिमंडल ने गांधी मूर्ति स्थल, टाउन हॉल के पास रविवार को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताते हुए प्रदर्शन किया है।

केंद्र सरकार मांग को कर रही अनसुना
प्रदर्शन के दौरान नागरिक समाज के सदस्यों ने कहा कि लद्दाख के लोगों की न्यायोचित मांगों को केंद्र सरकार लगातार अनसुना कर रही है। उनके लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों को कुचला जा रहा है।

वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि यह सिर्फ लद्दाख की नहीं, बल्कि पूरे देश के लोकतंत्र की परीक्षा है। नागरिक समाज ने महामहिम राज्यपाल से इस मुद्दे में हस्तक्षेप करने की अपील की है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अगर सरकार ने जल्द कदम नहीं उठाए, तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा।

लेह हिंसा और एनएसए के तहत गिरफ्तारी
26 सितंबर 2025 को लेह में राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग को लेकर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुआ था। इस दौरान हुई झड़पों में चार लोगों की मौत हो गई और 90 से ज्यादा लोग घायल हुए। घटना के बाद प्रशासन ने पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में ले लिया और उन्हें राजस्थान की जोधपुर सेंट्रल जेल भेज दिया।

एनएसए के तहत किसी व्यक्ति को बिना मुकदमा चलाए 12 महीने तक हिरासत में रखा जा सकता है, यदि यह माना जाए कि उसकी गतिविधियां राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं। प्रशासन का कहना है कि कुछ स्थानीय नेताओं ने युवाओं को भड़काया, जिससे स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। वहीं, कई सामाजिक संगठनों और नागरिक समूहों ने वांगचुक की गिरफ्तारी को लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया है।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई कल
सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर उनकी गिरफ्तारी को चुनौती दी है और तत्काल रिहाई की मांग की है। इस याचिका पर सोमवार, 6 अक्टूबर 2025 को सुनवाई निर्धारित है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला न सिर्फ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून की सीमाओं और संभावित दुरुपयोग पर सवाल उठाता है, बल्कि यह संविधानिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे को लेकर भी एक अहम बहस को जन्म देगा।

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