![]()
बलौदाबाजार के पलारी नगर में एक बेटी ने सदियों पुरानी परंपरा को तोड़ते हुए अपनी मां का अंतिम संस्कार किया। वार्ड 11 निवासी 60 वर्षीय चंद्रिका निर्मलकर का बुधवार दोपहर निधन हो गया था, जिसके बाद गुरुवार को उनका अंतिम संस्कार किया गया।
.
चंद्रिका निर्मलकर की दो बेटियां, पारुल और हिमानी हैं, लेकिन कोई पुत्र नहीं है। परंपरागत रूप से पुत्र के अभाव में किसी पुरुष रिश्तेदार द्वारा मुखाग्नि देने का रिवाज है। हालांकि, परिवार ने इस परंपरा से हटकर फैसला लिया।
चंद्रिका निर्मलकर की बड़ी बेटी पारुल ने अपने पिता अशोक निर्मलकर और अन्य परिजनों के सहयोग से मां को मुखाग्नि दी। उन्होंने अपनी मां के अंतिम दर्शन किए और उन्हें अग्नि देकर अंतिम विदाई दी।
इस अवसर पर मृतका के पति अशोक निर्मलकर, दोनों बेटियां पारुल व हिमानी, परिजन, जनप्रतिनिधि, सामाजिक बंधु और बड़ी संख्या में आम नागरिक उपस्थित थे। सभी ने इस साहसिक निर्णय की सराहना की। अंतिम संस्कार के बाद मुक्तिधाम परिसर में शोक सभा आयोजित कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
<
