देशभर में बढ़ते साइबर फ्रॉड के मामलों ने लोगों की नींद उड़ा दी है। ठगी करने वाले अपनी डिजिटल चालों से लोगों को चूना लगा ही रहे हैं, लेकिन सबसे अधिक परेशानी उन लोगों को हो रही है, जिनके बैंक खातों में ठगी की राशि ट्रांसफर हो रही है।
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हालात यह है कि ठगी से जुड़ी रकम किसी भी खाते में आते ही पुलिस उस बैंक खाते को सीधे सीज कर रही है। भले ही राशि जानबूझकर आई हो या ठगों की धोखाधड़ी से पहुंची हो। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के थानों और साइबर सेल में ऐसे 50 से अधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं।
पीड़ितों में व्यापारी, आम आदमी और नौकरी पेशा वाले शामिल है। पढ़ें किस तरह से राजधानी के पीड़ित लगा रहे बैंक, थाने और कोर्ट के चक्कर इस रिपोर्ट में…

केस- 1
साइबर सेल से मेल आने के बाद अकाउंट हुआ बंद
न्यू राजेंद्र नगर में रहने वाली कारोबारी (बिल्डिंग मटेरियल सप्लायर) दिव्या ने बताया कि उनका सिविल लाइन स्थित ICICI बैंक में अकाउंट है। उन्होंने कहा कि खाते से ट्रांजैक्शन एक साल पहले बंद हो गया था। जब मैंने बैंक जाकर जानकारी ली।
मैनेजर ने बताया कि साइबर सेल से मेल आने के बाद आपका अकाउंट बंद कर दिया गया है। किस जिले की साइबर सेल से मेल आया था, यह जानकारी भी बैंक मैनेजर नहीं दे सके। मैंने पुलिस से मदद मांगी, लेकिन वहां से भी कोई सहायता नहीं मिली।
इसके बाद मैंने न्यायालय में आवेदन लगाया है। अकाउंट पिछले एक साल से बंद है। जबकि इसी अकाउंट से मेरी किस्त कटती है। एक साल से मुझे पेनल्टी देकर किस्त भरनी पड़ रही है। अकाउंट में मौजूद पैसा ब्लॉक है और अभी तक किसी भी प्रकार का समाधान नहीं मिल पाया है।

पीड़ित कारोबारी दिव्या ने बताया कि साइबर सेल से मेल आने के बाद उनका अकाउंट बंद कर दिया गया।
केस- 2
सैलरी अकाउंट बंद कर दिया, अब पैसा भी नहीं निकल रहा
कोतवाली इलाके में रहने वाली मिक्की (परिवर्तित नाम) ने बताया कि वह प्राइवेट जॉब करती हैं। उन्होंने कहा कि मेरा सैलरी अकाउंट है। मेरे में मोबाइल में कल (2 दिसंबर) मैसेज आया कि अकाउंट ब्लाक हो गया है। मैंने बैंक से पता किया तो उन्होंने बताया कि 11 हजार रुपए का एमाउंट सस्पेक्टेड है।
बैंक ने बिना मेरी इजाजत इस एमाउंट को अकांउट से ब्लॉक कर दिया। एमाउंट कम होने पर ट्रांजैक्शन रुका है। सस्पेक्टेड एमाउंट कहां से आया? इसकी जानकारी बैंक ने दी है, लेकिन राहत कैसे मिलेगी? ये जानकारी नहीं दे पा रहे हैं। मेरे अकाउंट में मेरे परिजनों ने पैसे दिए थे, अब इस पैसे को मैं निकाल नहीं पा रही हूं।

केस- 3
21 हजार एमाउंट के लिए 20 लाख से ज्यादा फंसे
इसी तरह गंज इलाके में तुषार (परिवर्तित नाम) ने बताया कि उनका एक गारमेंट शॉप है। उन्होंने कहा कि रोजाना ग्राहक फोनपे और पेटीएम के माध्यम से भुगतान करते हैं, लेकिन पिछले पांच महीनों से मेरा बैंक अकाउंट ब्लॉक है। लगातार बैंक के चक्कर लगा रहा हूं, पर वे स्पष्ट जानकारी नहीं दे रहे हैं।
बैंक कर्मचारियों का कहना है कि 21 हजार का एमाउंट सस्पेक्टेड मेरे खाते में आया था, जिसके बाद पुलिस की ओर से मेल भेजे जाने पर खाता सीज कर दिया गया है। लेकिन किस पुलिस विभाग ने मेल भेजा है, यह जानकारी भी नहीं दी जा रही। 21 हजार के कारण मेरे 20 लाख रुपए से अधिक फंस गए हैं।

50 से अधिक खाते संदिग्ध राशि के नाम पर ब्लॉक
यह महज तीन मामला नहीं है। राजधानी रायपुर में ऐसे 50 से अधिक पीड़ित हैं, जिनके खातों में सिर्फ 2 हजार से 20 हजार रुपए तक संदिग्ध राशि आने पर बैंक ने बिना पूछे उनका अकाउंट बंद कर दिया। अकाउंट ब्लॉक होने से ये सभी लोग गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।
अपने खाते खुलवाने के लिए पीड़ितों ने बैंक, पुलिस और कोर्ट के चक्कर लगाए, लेकिन अभी तक किसी को समाधान नहीं मिला है। कई लोग परिचितों से उधारी, तो कई बाजार से ब्याज पर पैसा लेकर अपना कारोबार और घर चला रहे हैं।
अकाउंट बंद होने से उनकी किस्तें कट नहीं पा रही हैं, जिसके कारण पेनल्टी लग रही है और उनका सिविल स्कोर भी खराब हो रहा है।
साइबर ठगी का दायरा बढ़ा, लेकिन भुगत रहे निर्दोष
साइबर ठगों के बढ़ते जाल का असर अब सिर्फ पीड़ित तक सीमित नहीं है, बल्कि उन लोगों तक पहुंच गया है। जिनके खाते को ठग “पास-थ्रू” की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। कानूनी प्रक्रिया लंबी है और जमानत-सेटलमेंट ने इसे महंगा बना दिया है। लोग इंतजार कर रहे हैं कि सिस्टम ऐसा बने, जिससे निर्दोषों को कम से कम परेशानी हो।

एडवोकेट विपिन अग्रवाल ने कहा कि कोर्ट के बिना परमिशन अकाउंट सीज या फ्रीज नहीं किया जा सकता।
पढ़िए इस केस में एडवोकेट का क्या कहना है?
रायपुर के एडवोकेट विपिन अग्रवाल ने लीन एमाउंट और अकाउंट सीज होने के केसों में बताया कि ठगी का एमाउंट घूमकर लोगों के अकाउंट में आ रहा है। इस राशि के आने पर अकाउंट से राशि को लीन (जब्त) किया जा रहा है। इसके साथ ही कई केसों में उपभोक्ताओं के अकाउंट को सीज भी कर दिया जा रहा है।
यह प्रक्रिया नियमानुसार नहीं है। कई मामलों में न्यायालय की ओर से निर्देश दिए गए है कि राशि को लीन किया जाए। लेकिन संपूर्ण खाते को ब्लॉक नहीं कराया जा सकता है। अकाउंट सीज करने के लिए न्यायालय के परमिशन की आवश्यकता होती है। न्यायालय की अनुमति के बिना किसी भी बैंक अकाउंट को सीज या फ्रीज नहीं किया जा सकता है।
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