छत्तीसगढ़ में जमीन की गाइडलाइन दरों में 10% से 100% तक की बढ़ोतरी के विरोध में कांग्रेस पार्टी ने राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ दिया है। सक्ती जिले में भी 1 दिसंबर को कांग्रेस जिला कमेटी की नवनियुक्त अध्यक्ष रश्मि गबेल के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन किया गय
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कांग्रेस ने सरकार के इस फैसले को जनविरोधी बताया है। पार्टी का कहना है कि यह बढ़ोतरी आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ाएगी और आर्थिक मंदी को बढ़ावा देगी। वहीं, कांग्रेस ने विरोध में शहर में रैली भी निकाली और इस फैसले को वापस लेने की मांग की है।

भाजपा सरकार आने के बाद रेट बढ़ने का आरोप
1 दिसंबर को शासकीय विश्रामगृह में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए जिला कांग्रेस अध्यक्ष रश्मि गबेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने जमीन की गाइडलाइन दर अचानक 10% से 100% कर दिया है।
इससे आम जनता, किसानों और रियल एस्टेट सेक्टर पर भारी बोझ पड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार आने के बाद से अब तक भूमि की सरकारी दरें 40% से 500% तक बढ़ चुकी हैं, जो अनुचित है।
उन्होंने आगे कहा कि गाइडलाइन बढ़ने से मकान, दुकान और फैक्ट्री बनाने की लागत दोगुनी हो जाएगी। इससे भूमि की खरीदी-बिक्री ठप हो जाएगी, जिससे बेरोजगारी और आर्थिक मंदी बढ़ेगी।
उन्होंने तुलना करते हुए बताया कि मुंबई-दिल्ली जैसे बड़े शहरों में भी एक बार में केवल 10-15% की बढ़ोतरी की परंपरा है, जबकि छत्तीसगढ़ में 130% से 500% तक की वृद्धि अदूरदर्शी है।
रश्मि गबेल ने यह भी आरोप लगाया कि नई नीति के तहत कृषि भूमि की बिक्री पर स्टांप ड्यूटी का बोझ इतना बढ़ गया है कि 30 लाख रुपए की जमीन पर 22 लाख रुपए का रजिस्ट्रेशन शुल्क देना पड़ रहा है।
कुछ क्षेत्रों में तो जमीन की कीमत से अधिक रजिस्ट्री शुल्क देने की स्थिति बन गई है, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग सीधे प्रभावित हो रहा है।

रैली और पुतला दहन, कांग्रेस का सड़क पर प्रदर्शन
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शहर में विरोध रैली निकाली, जो अलग-अलग रास्तों से होते हुए कचहरी चौक पहुंची। यहां सरकार का पुतला जलाने की कोशिश की गई, जिसे पुलिस ने हल्की झूमाझटकी के बीच रोका, लेकिन कांग्रेस ने प्रदर्शन जारी रखा।
कार्यकर्ताओं ने सरकार को जनविरोधी सरकार बताते हुए गाइडलाइन दरों को तुरंत वापस लेने की मांग की। कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि बढ़ी हुई गाइडलाइन दरें तुरंत वापस ली जाएं, नक्शा और रजिस्ट्री से जुड़े नियमों को सरल किया जाए, रियल स्टेट सेक्टर को राहत दी जाए, गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर आर्थिक बोझ कम किया जाए।

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