छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने संगठन को अधिक सक्रिय और जवाबदेह बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। पार्टी अब जिलाध्यक्षों की नियुक्ति 6-6 महीने के परीक्षण कार्यकाल पर करेगी। छह महीने बाद उनके कामकाज का मूल्यांकन होगा—जिसमें संगठनात्मक प्रदर्शन, जनसंपर्क, सदस्यता
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आज चरणदास महंत और दीपक बैज के साथ होगी वन टू वन चर्चा
36 नए चेहरे और 5 पुराने चेहरों की हो सकती है वापसी
कांग्रेस संगठन में इस बार बड़े बदलाव की तैयारी है। पार्टी के 41 जिलाध्यक्षों में से 5 पदाधिकारी ऐसे हैं जिन्हें दोबारा मौका मिल सकता है। ये वही नेता हैं जिनकी नियुक्ति करीब 6 महीने पहले की गई थी। हालांकि, उस समय कुल 11 जिलाध्यक्ष नियुक्त हुए थे, लेकिन सूत्रों के अनुसार कुछ जिलों का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहा, इसलिए उन्हें बदला जा सकता है। वहीं बाकी 36 जिलों में नए अध्यक्षों की नियुक्ति होगी। कांग्रेस इस बार संगठन को मजबूत करने के लिए “परफॉर्मेंस बेस्ड सिस्टम” अपना रही है, जिसके तहत हर छह महीने में कार्य की समीक्षा की जाएगी।
दिल्ली में हुई अहम बैठक, लिया गया बड़ा फैसला
कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान को लेकर गुरुवार को दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें एआईसीसी महासचिव केसी वेणुगोपाल, छत्तीसगढ़ प्रभारी सचिन पायलट, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, टी.एस. सिंहदेव, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत और प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
पहले चरण की बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, और टी एस सिंहदेव के साथ वन टू वन चर्चा की, आज प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज और नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत के साथ भी बैठक होगी, बैठकों के दौर के बाद फाइनल बैठक राहुल गांधी के साथ होगी, जिसमें केसी वेणुगोपाल और सचिन पायलट भी मौजूद होंगे, और उसके बाद ही जिलाध्यक्षों की फाइनल लिस्ट तैयार की जाएगी, हालाकि इस बैठक की तारीख अभी तय नहीं हुई है, माना जा रहा है कि अगले 10 दिनों में बैठक हो सकती है।

कल दिल्ली में दिनभर चला बैठकों का दौर
बैठक में जिलेवार रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा की गई। एआईसीसी नेताओं ने छत्तीसगढ़ के नेताओं से वन-टू-वन बातचीत कर यह फीडबैक लिया कि किन जिलों में नए चेहरे लाए जाएं और किन जिलाध्यक्षों को फिर मौका दिया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार, इस बार संगठन में युवाओं और महिलाओं को भी प्राथमिकता दी जाएगी।
परफॉर्मेंस बेस्ड स्ट्रक्चर पर फोकस
कांग्रेस इस बार पुराने ढर्रे से हटकर संगठन को “परफॉर्मेंस बेस्ड स्ट्रक्चर” में बदलने की दिशा में काम कर रही है।
- हर छह महीने बाद जिला इकाइयों की समीक्षा होगी।
- जो पदाधिकारी बेहतर प्रदर्शन करेंगे, उन्हें प्रदेश पदों या चुनावी जिम्मेदारियों में प्राथमिकता दी जाएगी।
- वहीं निष्क्रिय नेताओं को हटाकर नए और सक्रिय चेहरों को मौका दिया जाएगा।
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