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साइंस कॉलेज चौपाटी की शिफ्टिंग कोर्ट के आदेश पर एजेंसी और स्मार्ट सिटी के बीच हुए समझौते के तहत हुई है। इसलिए इस खर्चे की वसूली उनसे नहीं होगी। यह कहना है उपमुख्यमंत्री अरुण साव का। उन्होंने शीतकालीन सत्र में चौपाटी शिफ्टिंग विवाद पर विधायक राजेश मूण
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सरकार से जवाब आने के बाद पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने डिप्टी सीएम अरुण साव और विधायक राजेश मूणत से ही वसूली करने की मांग कर नया विवाद खड़े कर दिया है। गौरतलब है कि साइंस कॉलेज चौपाटी को 6.13 करोड़ से तैयार किया गया था, जहां 60 दुकानें संचालित हो रही थीं। इसी जगह पर नालंदा -2 बनाने की जिद में आमानाका ब्रिज के पास चौपाटी को 22 नवंबर को शिफ्ट किया गया है। इसी को लेकर भाजपा-कांग्रेस के बीच वैध-अवैध को लेकर जमकर आरोप-प्रत्यारोप लग रहे हैं।
मूणत-अफसरों को बचाने की कोशिश, साव-जांच प्रतिवेदन विभाग को भेजा
विधायक मूणत ने पूछा सवाल
क्या यह सत्य है कि शासन के आदेश 9 जुलाई 2024 के हवाले से पुराने रायपुर स्मार्ट सिटी के कार्यों की जांच के लिए गठित समिति के प्रतिवेदन के आधार पर लंबित कर दी गई है। दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों को बचाने की कोशिश की जा रही है। रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ कब कार्यवाही होगी? क्या जिन अधिकारियों ने पद का दुरुपयोग कर ग्रीन कॉरिडोर यूथ हब की जगह चौपाटी बनाया, उन पर कार्यवाही के साथ चौपाटी को डिसमेंटल करने में हुए व्यय की वसूली की जाएगी?
डिप्टी सीएम साव का जवाब
डिप्टी सीएम अरुण साव का लिखित में जवाब आया कि रायपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड से 312 कार्यों की विस्तृत सूची 29 मई 2025 को मिली। जांच प्रतिवेदन परीक्षणाधीन है व जांच समिति से प्राप्त प्रतिवेदन आवास व पर्यावरण विभाग को भेजा गया है। चौपाटी का अनुबंध रद्द के बाद कारोबारी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। हाई कोर्ट के आदेश के बाद ही स्मार्ट सिटी और एजेंसी के बीच समझौते के तहत वेडिंग जोन हटाया गया। इसलिए शिफ्टिंग में खर्च राशि की वसूली नहीं की गई।
मूणत-मेयर से वसूली हो: विकास
पूर्व विधायक विकास उपाध्याय का कहना है कि विधानसभा में प्रश्न के जवाब से स्पष्ट है कि फूड कोर्ट का निर्माण वैध था। ऐसे में करोड़ों की लागत से बने वेंडिंग जोन को उजाड़ने वाले विधायक राजेश मूणत, मेयर मीनल चौबे और नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव से ही इसकी वसूली होनी चाहिए। यह फैसला सिर्फ जिद के चलते किया गया था। सुंदर जगह को उजाड़ दिया गया। शिफ्टिंग के बाद भी आमानाका ब्रिज के नीचे फूड जोन को स्थापित नहीं किया जा सका और 60 परिवारों के सामने रोजगार का संकट अभी भी है।
जानिए …. अब तक क्या हुआ
- 21 नवंबर को स्मार्ट सिटी ने साइंस कॉलेज चौपाटी के दुकानदारों को 22 नवंबर को शिफ्टिंग के लिए मौखिक फरमान दिया।
- पूर्व विधायक विकास व दुकानदारों ने रातभर प्रदर्शन किया। कुछ विधायक मूणत के घर के सामने भी बैठ गए थे।
- 22 नवंबर को तड़के सुबह 6 बजे से शिफ्टिंग हुई और सभी 60 दुकानों को आमानाका ओवरब्रिज के नीचे रख दिया गया।
- मूणत, मेयर व भाजपाइयों ने चौपाटी निर्माण को अवैध बताया, तो कांग्रेसियों ने इसका भी जमकर विरोध किया।
- शिफ्टिंग के बाद दुकानदारों ने मेयर से व्यवसाय स्थापित करने के लिए मदद मांगी। अब तक कुछ नहीं हुआ।
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