आरंग में महानदी के पास टीले में पंसे युवक को बचाया गया।
बंगाल में बने सिस्टम के कारण आज पूरे छत्तीसगढ़ में यलो अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान कई जिलों में भारी बारिश हो सकती है। अगले दो दिनों तक ये सिलसिला जारी रह सकता है। खासकर दक्षिणी छत्तीसगढ़ में, इसके बाद बारिश की तीव्रता में कमी आएगी।
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पिछले 24 घंटे में पूरे प्रदेश में जोरदार बारिश हुई। रायपुर शहर में करीब 76 मिमी पानी बरसा है। वहीं आरंग में 132 और गोबरा-नवापारा में 143 मिमी पानी गिरा। रायपुर में औसतन 85 मिमी बारिश हुई है। इसके अलावा दुर्ग और बस्तर संभाग के भी कुछ जगहों पर अच्छी बारिश हुई है।
वहीं आरंग में महानदी के टीले पर फंसे युवक को बचाया गया। पत्नी से झगड़े के बाद युवक बियर पीकर महानदी के टीले पर सो गया ता। पानी का स्तर बढ़ने से वह फंस गया था। कुछ लोग महानदी किनारे घूमते हुए ब्रिज के नीचे पहुंचे,
जहां एक युवक टीले पर फंसा मदद मांग रहा था। पानी बढ़ने से वह बाहर नहीं निकल सका। लोगों ने पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद SDRF ने युवक को सुरक्षित रेस्क्यू किया।

जब युवक की नींद खुली तो उसके आसपास पानी का लेवल बढ़ चुका था।

रेस्क्यू टीम युवक को बचाने के लिए रस्सी के सहारे ब्रिज से नीचे उतरी।

यलो अलर्ट मौसम खराब होने की चेतावनी होती है।

बारिश से गरबा प्रभावित
वहीं पिछले दिनों हुई बारिश का असर गरबा आयोजनों पर भी देखने को मिला। कई शहरों में गरबा मैदानों में पानी भरने या गीली जमीन के कारण आयोजन रद्द या स्थगित करने पड़े। कुछ स्थानों पर कार्यक्रम हुए भी तो वहां लोगों की संख्या कम रही।
रायपुर के ओमाया गार्डन रिजॉर्ट में होने वाले गरबा कार्यक्रम की तारीख बदल दी गई है। पहले यह 25 से 28 सितंबर तक आयोजित होना था, लेकिन मौसम को देखते हुए इसे 27 से 29 सितंबर किया गया है।

रायपुर के देवेन्द्र नगर सेक्टर-3 दुर्गा मैदान में बारिश के बीच छाता लेकर गरबा करती रही महिलाएं।
तस्वीर देखिए…

सारंगढ़ में उफनते विक्रम नाला को पार कर रही कार बह गई थी।

नाले से आगे बहते हुए डूब गई कार, कार सवार तीन लोग तैरकर बच निकले।
बलराम में सबसे ज्यादा बारिश, बेमेतरा में सबसे कम
प्रदेश में अब तक 1127.6 मिमी बारिश हुई है। बेमेतरा जिले में अब तक 509.1 मिमी पानी बरसा है, जो सामान्य से 51% कम है। अन्य जिलों जैसे बस्तर, राजनांदगांव, रायगढ़ में वर्षा सामान्य के आसपास हुई है। जबकि बलरामपुर में 1498.6 मिमी पानी गिरा है, जो सामान्य से 53% ज्यादा है।


जानिए क्यों गिरती है बिजली
बादलों में मौजूद पानी की बूंदें और बर्फ के कण हवा से रगड़ खाते हैं, जिससे उनमें बिजली जैसा चार्ज पैदा होता है। कुछ बादलों में पॉजिटिव और कुछ में नेगेटिव चार्ज जमा हो जाता है। जब ये विपरीत चार्ज वाले बादल आपस में टकराते हैं तो बिजली बनती है।
आमतौर पर यह बिजली बादलों के भीतर ही रहती है, लेकिन कभी-कभी यह इतनी तेज होती है कि धरती तक पहुंच जाती है। बिजली को धरती तक पहुंचने के लिए कंडक्टर की जरूरत होती है। पेड़, पानी, बिजली के खंभे और धातु के सामान ऐसे कंडक्टर बनते हैं। अगर कोई व्यक्ति इनके पास या संपर्क में होता है तो वह बिजली की चपेट में आ सकता है।




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