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अविभाजित राजनांदगांव उच्च शिक्षा का निम्न स्तर देखने मिल रहा है। आनन-फानन में यहां कुछ गांवों में कॉलेजों की स्वीकृति तो दी गई लेकिन वर्षों बाद भी कॉलेज को अपनी छत का इंतजार है। ऐसे नवीन महाविद्यालयों में अब तक उनकी खुद की बिल्डिंग तक नहीं बन पाई है। कुल मिलाकर बदहाली के बीच उच्च शिक्षा की पढ़ाई की रस्म अदायगी चल रही है। दैनिक भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट में कुछ ऐसे ही कॉलेजों का जायजा लिया गया। इसमें पता चला कि मिडिल स्कूलों के भवन में कॉलेज की कक्षाएं लग रही हैं। एक कॉलेज का प्रबंधन और पूरा स्टाफ पंचायत भवन में बैठ रहा है। अव्यवस्था ऐसी भी है कि कॉलेज के प्राचार्य के कक्ष में ही क्लर्क और लाइब्रेरियन को बैठकर अपना काम करना पड़ रहा है। इससे उन्हें भी दिक्कतें हो रही हैं। न ढंग की चेयर है और न ही टेबल। न उनके सामान रखने के लिए आलमारियों की किसी तरह की व्यवस्था। यह सवाल जिनके जवाब नहीं बरामदे में अलमारी रखकर क्लास जालबांधा: नवीन शासकीय महाविद्यालय को हाईस्कूल भवन में 6 कमरे मिले हैं, जिनमें से एक कमरे में प्राचार्य कक्ष, स्टाफ रूम से लेकर फीस काउंटर भी है। पांच कमरों में कक्षाएं चलती हैं। यहां बरामदे में आलमारी रखकर कक्षा बना दी है। प्राचार्य ही रेगुलर, बाकी गेस्ट हैं अर्जुनी: नवीन महाविद्यालय मिडिल और प्राइमरी स्कूल परिसर में है। प्राचार्य के कक्ष में लाइब्रेरियन और सहायक ग्रेड भी बैठते हैं। यहां 14 का स्टाफ है। प्राचार्य भी 30 अप्रैल को रिटायर हो जाएंगी। बाकी पूरा टीचिंग स्टाफ गेस्ट लेक्चरर है। पहले कॉलेज फिर स्कूल की क्लास ठेल्काडीह: नवीन महाविद्यालय का कार्यालय पंचायत भवन में है। कमरों की व्यवस्था स्कूल के टाइम पर डिपेंड है। सुबह साढ़े 7 से दोपहर साढ़े 12 बजे तक जिन कमरों में कॉलेज की कक्षाएं लगती हैं, वहीं उसके बाद स्कूललगता है। पिछले बजट में कॉलेजों के भवनों के लिए राशि स्वीकृत की गई है। शासन का प्रयास है जहां भवन नहीं हैं, वहां जल्द से जल्द काम शुरू हो जाएं। जहां स्वीकृति के बाद भी निर्माण में लेटलतीफी हो रही है, उनका रिव्यू किया जाएगा। – डॉ.एस.भारतीदासन, सचिव, उच्च शिक्षा नवीन महाविद्यालयों मेंसुविधाएं एकदम से नहीं मिलती हैं। धीरे-धीरे व्यवस्था सुनिश्चित कर दी जाएगी। प्रक्रिया में समय तो लगता है। हालांकि नैक का मूल्यांकन भी पांच साल पूर्ण होने के बाद होता है। – डॉ.आरएन सिंह, सेवानिवृत्त प्राचार्य
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