हाथों पर तख्ती लेकर ग्रामीणों ने कहा कि अपनी जमीन नहीं देंगे
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिला में एक निजी कपंनी के खिलाफ ग्रामीणों ने अपना जमकर विरोध जताया। पुसौर ब्लाॅक के ग्राम कोतमरा से काफी संख्या में ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। जिन्होंने कंपनी के खिलाफ नारेबाजी करते हुए 11 सूत्रीय मांगो को लेकर आवेदन सौंपा है।
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ग्रामीणों के द्वारा कलेक्टर के नाम डिप्टी कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में बताया कि औद्योगिक प्रयोजन के लिए निजी भूमि अर्जन किया जाना प्रस्तावित है। इसमें ग्राम कोतमरा का 116.344 हेक्टेयर खेती भूमि भी शामिल है।
इस भूमि को ग्राम कोतमरा के भूस्वामी किसी भी उद्योग या कम्पनी को देना नहीं चाहते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकांश जमीन पूर्वजों से मिली हुई पैतृक जमीन है और कृषि ही जीवन यापन का मुख्य साधन है।
भू- अर्जन से किसान भूमिहीन व बेरोजगार हो जाएंगे और उन्हें अपने परिवार के पालन पोषण के लिए आय का जरिया समाप्त हो जाएगा। ग्रामीणों ने कहा कि प्रस्तावित भूमि सिंचित और दो फसली है जो आय का मुख्य साधन है।
गांव का कोई भी किसान अपना जमीन कम्पनी को देना नहीं चाहता, इसलिये इस संबंध में ग्राम सभा आयोजित कर जमीन नहीं देने के लिए दो बार ग्रामसभा में प्रस्ताव भी पारित कर लिया गया है।

सरपंच के नेतृत्व में काफी संख्या में किसान कलेक्ट्रेट पहुंचे थे
प्रस्तावित भूमि के पास ग्राम पंचायत का भवन ग्रामीणों ने कहा कि प्रस्तावित भूमि में गांव का 2 शासकीय तालाबों में डोंगिया और बेहरा डभरी तालाब को गांव के 4 लोगों को मत्स्य पालन के लिए लीज पर दिया गया है।
इसमें 4 व्यक्तियों के परिवार का भरण-पोषण हो रहा है और गर्मी के दिनों में यहां निस्तारी होता है। प्रस्तावित भूमि में शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला सेलगा है। प्रस्तावित भूमि ग्राम पंचायत कोतमरा के पंचायत भवन, राशन दुकान से लगा हुआ है।

ग्रामीणों ने अपनी मांगो को लेकर जमकर नारे लगाए
कई गांव के लोग धान बेचने आते हैं बरसात के दिनों में जतरी बहरा का पानी इन्हीं खेतों के द्वारा आगे निकासी होता है। इन जमीन के बीच में ही सेवा सहकारी समिति मर्यादित बड़े भण्डार का मुख्य मार्ग है।
जिसमें कोतमरा के साथ कई गांव के लोग अपना धान बेचने के लिए जाते हैं। ग्राम कोतमरा का 50 एकड़ का सबसे बड़ा टार तालाब का पानी इन्हीं जमीनों को सिंचित करता है। ग्राम कोटवार का कोटवारी जमीन भी इसमें शामिल है।
मांग पूरी नहीं होने पर करेंगे आंदोलन इसके अलावा भी कई तरह की समस्याएं हैं। इसे देखते हुए गांव के कोई भी कृषक अपनी कृषि भूमि औद्योगिक प्रयोजन के लिए नहीं देना चाहते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में कलेक्टर और SDM समेत अन्य अधिकारियों को आवेदन सौंपा जा चुका है, लेकिन अब तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि 15 दिनों के भीतर उनकी समस्या का निराकरण नहीं होता है, तो आंदोलन किया जाएगा।
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