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Home » Chhattisgarh Raipur- Chief Judicial Magistrate issues notice to EOW-ACB in coal scam case | कोल घोटाला…रायपुर CJM ने EOW-ACB को जारी किया नोटिस: सूर्यकांत तिवारी का पहले टाइप्ड-बयान दर्ज कराने का आरोप;भूपेश बोले-जांच एजेंसियां सुपारी ले रही हैं क्या? – Chhattisgarh News
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Chhattisgarh Raipur- Chief Judicial Magistrate issues notice to EOW-ACB in coal scam case | कोल घोटाला…रायपुर CJM ने EOW-ACB को जारी किया नोटिस: सूर्यकांत तिवारी का पहले टाइप्ड-बयान दर्ज कराने का आरोप;भूपेश बोले-जांच एजेंसियां सुपारी ले रही हैं क्या? – Chhattisgarh News

By adminOctober 11, 2025No Comments4 Mins Read
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आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) पर आरोप है कि उन्होंने मजिस्ट्रेट के समक्ष अभियुक्त का मौखिक बयान दर्ज कराने के बजाय पहले से तैयार किया गया टाइप्ड बयान अदालत में पेश किया और उसे अभियुक्त सूर्यकांत तिवारी का बयान बत

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इस गंभीर आरोप पर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ((CJM)) रायपुर ने ईओडब्लू/एसीबी के निदेशक अमरेश मिश्रा, उप पुलिस अधीक्षक राहुल शर्मा और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक चंद्रेश ठाकुर को नोटिस जारी किया है। वहीं इस मामले में पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने सवाल उठाए हैं।

जांच एजेंसियां सुपारी ले रही हैं क्या?- पूर्व सीएम

भूपेश बघेल ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट ‘एक्स’ पर लिखा- अब जांच एजेंसियां झूठे बयानों और सबूतों का निर्माण भी खुद ही करने लगी हैं क्या? किसी को भी फंसाने के लिए अब जांच एजेंसियां सुपारी ले रही हैं क्या? जांच एजेंसी ईओडब्लू/एसीबी पर झूठे साक्ष्य बनाकर अदालत के साथ आपराधिक धोखाधड़ी की शिकायत बेहद गंभीर है।

वकीलों की शिकायत पर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने ईओडब्लू/एसीबी के निदेशक, उप पुलिस अधीक्षक और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी किया है। देश की न्यायिक व्यवस्था में ऐसा पहली बार हुआ है जब कोई जांच एजेंसी अभियुक्त का बयान दर्ज करवाने की जगह अपने कार्यालय से लाए हुए बयान को अभियुक्त का बयान बताकर उस पर हस्ताक्षर करवा ले। ऐसे में किसी भी नागरिक को न्याय मिलने की संभावना खत्म होती है। उम्मीद है कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट भी इसका संज्ञान लेंगे।

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जानिए क्या है पूरा मामला?

यह विवाद कथित कोल घोटाले (अपराध क्रमांक 02/2024 और 03/2024) से जुड़ा है। अभियुक्त सूर्यकांत तिवारी की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान ईओडब्लू/एसीबी ने अदालत में कुछ दस्तावेज पेश किए थे। इनमें सह-अभियुक्त निखिल चंद्राकर का दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 164 के तहत दर्ज बयान की प्रति भी शामिल थी।

लेकिन, जब अदालत ने यह प्रति सूर्यकांत तिवारी के वकीलों को सौंपी, तब कई अनियमितताएं सामने आईं। बयान की भाषा और फॉन्ट अदालत में उपयोग होने वाले मानक फॉर्मेट से पूरी तरह अलग पाए गए। इससे शक गहराया कि यह बयान अदालत में दर्ज न होकर कहीं और टाइप किया गया है।

दर्ज नहीं कराया गया मौखिक बयान- शिकायककर्ता

शिकायककर्ता गिरीश देवांगन का आरोप है कि जांच एजेंसी ने अभियुक्त को मजिस्ट्रेट के सामने पेश तो किया, लेकिन मौखिक बयान दर्ज नहीं कराया। इसके बजाय एक पेन ड्राइव में पहले से टाइप किया हुआ बयान लेकर आई और उसे अभियुक्त का बयान बताकर अदालत में जमा कर दिया।

कानूनी तौर पर यह प्रक्रिया न्यायालयीन नियमों का घोर उल्लंघन मानी जाती है।इस खुलासे के बाद यह सवाल उठ गया कि अगर जांच एजेंसियां इस तरह बयान “तैयार” करेंगी, तो निष्पक्ष जांच और न्याय की उम्मीद कैसे की जा सकती है?

गिरीश देवांगन की शिकायत और फोरेंसिक जांच

इस मामले का खुलासा तब हुआ, जब सामाजिक कार्यकर्ता गिरीश देवांगन ने 12 सितंबर 2025 को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार (सतर्कता) के समक्ष आवेदन दिया। उन्होंने दस्तावेजों की जांच फोरेंसिक विशेषज्ञ इमरान खान से करवाई। रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि प्रस्तुत बयान अदालत के फॉर्मेट से मेल नहीं खाता।

इसके बाद गिरीश देवांगन ने आज मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी रायपुर के समक्ष शिकायत दर्ज कराते हुए कहा कि यह एक आपराधिक षड्यंत्र है, जिसमें झूठे साक्ष्य तैयार कर अदालत को गुमराह किया गया।

शिकायतकर्ता ने क्या कहा ?

गिरीश देवांगन ने अपनी शिकायत में कहा कि, “यह स्पष्ट रूप से एक संज्ञेय अपराध है। ईओडब्लू/एसीबी ने न केवल अदालत को धोखा दिया, बल्कि संविधान और न्यायिक प्रक्रिया की मर्यादा का उल्लंघन किया है।” उन्होंने अदालत से मांग की है कि इस मामले की सीसीटीवी फुटेज और अन्य सबूतों की जांच कराई जाए और संबंधित अधिकारियों को कड़ी सजा दी जाए।

क्यों है यह मामला बड़ा ?

सीनियर एडवोकेट फैजल रिजवी के मुताबिक, यह देश में पहली बार हुआ है जब किसी जांच एजेंसी ने अभियुक्त का बयान दर्ज कराने की जगह अपने कार्यालय से टाइप किया हुआ बयान अदालत में पेश किया। यह न केवल अदालत के साथ धोखाधड़ी है, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 21 (न्याय के अधिकार) का खुला उल्लंघन भी है।

इस घटना ने राज्य की जांच एजेंसियों की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला आने वाले समय में न्यायिक सुधारों के लिए मिसाल बन सकता है।

…………………….

यह खबर भी पढ़िए…

570 करोड़ की कोल लेवी, देवेंद्र-नवनीत करते थे वसूली: D देवेंद्र-RS रानू साहू के लिए कोडवर्ड, गिट्‌टी-रेती मतलब करोड़-लाख, जुगनू-टावर ग्रुप के वॉट्सएप चैट मिले

EOW-ED की चार्जशीट के अनुसार आरोपियों ने घोटाले का हिसाब-किताब करने के लिए पाल ग्रुप, दुर्ग ग्रुप, वीकली ग्रुप, टावर ग्रुप और जुगनू ग्रुप बनाए थे।

EOW-ED की चार्जशीट के अनुसार आरोपियों ने घोटाले का हिसाब-किताब करने के लिए पाल ग्रुप, दुर्ग ग्रुप, वीकली ग्रुप, टावर ग्रुप और जुगनू ग्रुप बनाए थे।

छत्तीसगढ़ कोयला घोटाले में मास्टरमाइंड सूर्यकांत तिवारी ने अफसरों और नेताओं की मिलीभगत से 570 करोड़ से ज्यादा की वसूली कराई। वसूली का काम देवेंद्र डडसेना और नवनीत तिवारी संभालते थे। लेन-देन के लिए वॉट्सऐप पर पाल, दुर्ग, वीकली, टावर और जुगनू नाम से ग्रुप बनाए गए थे। बातचीत में कोडवर्ड का इस्तेमाल होता था। पढ़ें पूरी खबर…



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