शराब घोटाला मामले में EOW ने चैतन्य बघेल और दीपेन चावड़ा से बुधवार देर रात 2 घंटे पूछताछ की।
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला केस में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को बुधवार को रायपुर के स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने चैतन्य को 6 अक्टूबर तक आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की कस्टोडियल रिमांड पर भेजा है। साथ ही दीपेन चावड़ा की भी 29
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ED की जांच के अनुसार दीपेन चावड़ा सिंडिकेट का महत्वपूर्ण सदस्य था। बुधवार देर रात EOW ने चैतन्य और दीपेन से करीब 2 घंटे तक पूछताछ की। जानकारी के अनुसार अफसरों ने शराब घोटाला, Big-Boss वॉट्सऐप ग्रुप में होने वाली चर्चा और सिंडिकेट से जुड़े अन्य लोगों की महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल की है।
इसके अलावा शराब घोटाला केस में अरेस्ट कारोबारी नितेश पुरोहित-यश पुरोहित और रिटायर्ड IAS निरंजन दास को स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया। निरंजन दास और यश पुरोहित की कस्टोडियल रिमांड 4 दिन बढ़ गई है। वहीं नितेश पुरोहित को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।

गुरुवार को रिटायर्ड IAS निरंजन दास को स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया।

चैतन्य बघेल को कोर्ट ने 6 अक्टूबर तक EOW की कस्टोडियल रिमांड पर भेजा है।

बुधवार देर रात EOW ने चैतन्य और दीपेन से करीब 2 घंटे तक पूछताछ की।
संभावित जानकारियों का किया क्रॉस चेक
EOW ने पूछताछ के दौरान चैतन्य से शराब घोटाले में शामिल होने की संभावित जानकारियों का क्रॉस चेक किया। खास तौर पर दोनों से अफसरों के मोबाइल और सोशल मीडिया ग्रुप (“Big-Boss” वॉट्सऐप ग्रुप) में लिखी गई जानकारियों की पड़ताल की गई। इससे यह पता लगाने की कोशिश की गई कि आरोपियों ने कितनी और किस प्रकार की वित्तीय और प्रशासनिक गतिविधियों में भाग लिया।
पूछताछ के दौरान मिली महत्वपूर्ण जानकारी
बताया जा रहा है कि पूछताछ में चैतन्य और दीपेन से घोटाले की विस्तृत प्रक्रिया, लेन-देन और संबंधित दस्तावेजों के बारे में पूछताछ की गई है। EOW अफसरों ने इस दौरान किसी भी तरह की छेड़छाड़ या गुमराह करने वाले उत्तरों को रोकने के लिए सख्त निगरानी रखी।
पूछताछ पूरी होने के बाद दोनों को रिमांड पर रखा गया है। EOW ने बताया कि जांच जारी है और जल्द ही अन्य आरोपियों से भी पूछताछ की जाएगी। इसके अलावा डिजिटल डेटा, बैंक लेन-देन और दस्तावेजी सबूतों की पड़ताल के बाद जांच में नई दिशा तय की जाएगी।

ईडी के आरोप पत्र के अनुसार ‘बिग बॉस’ ग्रुप से चलता था पूरा सिंडिकेट।
मोबाइल चैट्स से खुलासा
ED ने जब अनवर ढेबर, अनिल टुटेजा और सौम्या चौरसिया के मोबाइल की जांच की तो चौंकाने वाले चैट्स मिले। अनवर के मोबाइल में चैतन्य का नंबर ‘बिट्टू’ नाम से सेव था। इसमें पैसों की डीलिंग और नकली होलोग्राम बनाने तक की चर्चा पाई गई।

ईडी के आरोप पत्र के अनुसार चैतन्य ने 1000 करोड़ हैंडल किए।
ED के पेश किए आरोप पत्र में ये सब था
चार्जशीट के मुताबिक, चैतन्य बघेल ही इस पूरे सिंडिकेट का मास्टरमाइंड था। इसमें से करीब 200 करोड़ रुपए की सीधी कमाई खुद की, जबकि 850 करोड़ रुपए कांग्रेस के तत्कालीन कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल तक पहुंचाए गए।
इस आरोप पत्र ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। ED का दावा है कि चैतन्य ने ब्लैक मनी को रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में निवेश कर उसे सफेद दिखाने का काम किया। पैसे की पूरी डील वॉट्सऐप ग्रुप में होती थी।
‘बिग बॉस’ ग्रुप से चलता था पूरा सिंडिकेट
आरोप पत्र में बताया गया है कि इस घोटाले के संचालन के लिए ‘बिग बॉस’ नाम का एक वॉट्सऐप ग्रुप बनाया गया था। इसमें चैतन्य बघेल, अनवर ढेबर, अनिल टुटेजा, सौम्या चौरसिया और पुष्पक जैसे अहम लोग जुड़े थे।
इस ग्रुप के जरिए करोड़ों रुपए की हेराफेरी और मनी लॉन्ड्रिंग की जानकारी और निर्देश साझा किए जाते थे। इसके साथ ही पैसे आने और उसको किसको देना है? इसकी चर्चा भी ग्रुप में होती थी। वॉट्सऐप ग्रुप में चैट के कुछ स्क्रीनशॉट भी दैनिक भास्कर डिजिटल के पास मौजूद है।

ईडी के आरोप पत्र के अनुसार अनवर ढेबर का करीबी दीपेन चावड़ा सिंडिकेट का अहम सदस्य था।
बंसल ने खोला राज
दुर्ग-भिलाई के शराब कारोबारी और भूपेश बघेल के करीबी माने जाने वाले लक्ष्मी नारायण उर्फ पप्पू बंसल ने पूछताछ में बड़ा खुलासा किया। उन्होंने माना कि वो खुद और चैतन्य ने मिलकर 1000 करोड़ रुपए से ज्यादा कैश को मैनेज किया।
बंसल ने बताया कि यह रकम अनवर ढेबर से दीपेन चावड़ा और फिर कांग्रेस नेताओं रामगोपाल अग्रवाल, केके श्रीवास्तव तक पहुंचाई जाती थी। बंसल ने यह भी स्वीकार किया कि तीन महीने की अवधि में ही उन्हें 136 करोड़ रुपए मिले।
जानिए क्या है छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ED जांच कर रही है। ED ने ACB में FIR दर्ज कराई है। दर्ज FIR में 3200 करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले की बात कही गई है। इस घोटाले में राजनेता, आबकारी विभाग के अधिकारी, कारोबारी सहित कई लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज है।
ED ने अपनी जांच में पाया कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी AP त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए घोटाले को अंजाम दिया गया था।

A, B और C कैटेगरी में बांटकर किया गया घोटाला
A: डिस्टलरी संचालकों से कमीशन
2019 में डिस्टलरी संचालकों से प्रति पेटी 75 रुपए और बाद के सालों में 100 रुपए कमीशन लिया जाता था। कमीशन को देने में डिस्टलरी संचालकों को नुकसान ना हो, इसलिए नए टेंडर में शराब की कीमतों को बढ़ाया गया। साथ ही फर्म में सामान खरीदी करने के लिए ओवर बिलिंग करने की राहत दी गई।

B: नकली होलोग्राम वाली शराब को सरकारी दुकानों से बिकवाना
- डिस्टलरी मालिक से ज्यादा शराब बनवाई। नकली होलोग्राम लगाकर सरकारी दुकानों से बिक्री करवाई गई। नकली होलोग्राम मिलने में आसानी हो, इसलिए एपी त्रिपाठी के माध्यम से होलोग्राम सप्लायर विधु गुप्ता को तैयार किया गया। होलोग्राम के साथ ही शराब की खाली बोतल की जरूरत थी। खाली बोतल डिस्टलरी पहुंचाने की जिम्मेदारी अरविंद सिंह और उसके भतीजे अमित सिंह को दी गई।
- खाली बोतल पहुंचाने के अलावा अरविंद सिंह और अमित सिंह को नकली होलोग्राम वाली शराब के परिवहन की जिम्मेदारी भी मिली। सिंडिकेट में दुकान में काम करने वाले और आबकारी अधिकारियों को शामिल करने की जिम्मेदारी एपी त्रिपाठी को सिंडिकेट के कोर ग्रुप के सदस्यों ने दी।
- शराब बेचने के लिए प्रदेश के 15 जिलों को चुना गया। शराब खपाने का रिकॉर्ड सरकारी कागजों में ना चढ़ाने की नसीहत दुकान संचालकों को दी गई। डुप्लीकेट होलोग्राम वाली शराब बिना शुल्क अदा किए दुकानों तक पहुंचाई गई। इसकी एमआरपी सिंडिकेट के सदस्यों ने शुरुआत में प्रति पेटी 2880 रुपए रखी थी। इनकी खपत शुरू हुई, तो सिंडिकेट के सदस्यों ने इसकी कीमत 3840 रुपए कर दी।
- डिस्टलरी मालिकों को शराब सप्लाई करने पर शुरुआत में प्रति पेटी 560 रुपए दिया जाता था, जो बाद में 600 रुपए कर दिया गया था। ACB को जांच के दौरान साक्ष्य मिला है कि सिंडिकेट के सदस्यों ने दुकान कर्मचारियों और आबकारी अधिकारियों की मिलीभगत से 40 लाख पेटी से अधिकारी शराब बेची है।
C: डिस्टलरीज के सप्लाई एरिया को कम/ज्यादा कर अवैध धन उगाही करना
- देशी शराब को CSMCL के दुकानों से बिक्री करने के लिए डिस्टलरीज के सप्लाई एरिया को सिंडिकेट ने 8 जोन में बांटा। इन 8 जोन में हर डिस्टलरी का जोन निर्धारित होता था। 2019 में सिंडिकेट की ओर से टेंडर में नए सप्लाई जोन का निर्धारण प्रतिवर्ष कमीशन के आधार पर किया जाने लगा।
- एपी त्रिपाठी ने सिंडिकेट को शराब बिक्री का जोन अनुसार विश्लेषण मुहैया कराया था, ताकि क्षेत्र को कम-ज्यादा करके पैसा वसूल किया जा सके। इस प्रक्रिया को करके सिंडिकेट डिस्टलरी से कमीशन लेने लगा।
- EOW के अधिकारियों को जांच के दौरान साक्ष्य मिले हैं कि तीन वित्तीय वर्ष में देशी शराब की सप्लाई के लिए डिस्टलरीज ने 52 करोड़ रुपए पार्ट C के तौर पर सिंडिकेट को दिया है।
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शराब घोटाला केस में शामिल 28 आबकारी अधिकारी रायपुर कोर्ट में पेश। एक कतार में बैठे दिखे।
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला केस में शामिल 28 आबकारी अधिकारी रायपुर की EOW कोर्ट में पेश हुए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सभी अधिकारी अग्रिम जमानत के कागजात लेकर कोर्ट पहुंचे थे। कोर्ट ने 1-1 लाख रुपए का जमानत पट्टा जमा करने पर जमानत दे दी है। पढ़ें पूरी खबर…
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