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Home » Chhattisgarh High Court said that the relationship was consensual and not rape. | हाईकोर्ट बोला- सहमति से बने फिजिकल रिलेशन, रेप नहीं: जज बोले- युवती खुद लड़के के घर गई, बार-बार रिलेशन बनाए, CAF जवान बरी – Chhattisgarh News
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Chhattisgarh High Court said that the relationship was consensual and not rape. | हाईकोर्ट बोला- सहमति से बने फिजिकल रिलेशन, रेप नहीं: जज बोले- युवती खुद लड़के के घर गई, बार-बार रिलेशन बनाए, CAF जवान बरी – Chhattisgarh News

By adminOctober 14, 2025No Comments4 Mins Read
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छत्तीसगढ़ के बस्तर में रेप के आरोप में 10 साल की सजा काट रहे CAF (छत्तीसगढ़ आर्म्ड फोर्स) के जवान को हाईकोर्ट ने बरी कर दिया गया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी की एकलपीठ ने कहा कि यह मामला प्रेम संबंध का था, न कि झूठे विवा

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अदालत ने माना कि पीड़िता बालिग थी और लंबे समय तक अपनी मर्जी से जवान के साथ रही। दोनों के बीच शारीरिक संबंध आपसी सहमति से बने थे। इसलिए इसे दुष्कर्म नहीं कहा जा सकता। हाईकोर्ट ने फास्ट ट्रैक कोर्ट बस्तर (जगदलपुर) के 21 फरवरी 2022 को दिए गए फैसले को रद्द कर दिया है।

युवती ने बस्तर के जवान रूपेश कुमार पुरी पर लगाया था रेप का आरोप। (प्रतीकात्मक इमेज)

युवती ने बस्तर के जवान रूपेश कुमार पुरी पर लगाया था रेप का आरोप। (प्रतीकात्मक इमेज)

जानिए क्या है पूरा मामला ?

बस्तर जिले के रहने वाले रूपेश कुमार पुरी (25) के खिलाफ साल 2020 में युवती ने थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार युवती की शादी 28 जून 2020 को किसी दूसरे युवक से तय हुई थी, लेकिन उससे एक दिन पहले 27 जून 2020 को रूपेश उसे अपने घर ले गया। शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाए।

आरोप था कि जवान ने उसे 2 महीने तक अपने घर में रखा और बाद में धमकाकर निकाल दिया। शादी से इनकार कर दिया। इस शिकायत पर पुलिस ने धारा 376(2)(एन) के तहत मामला दर्ज किया था। फास्ट ट्रैक कोर्ट जगदलपुर ने 2022 में रूपेश को 10 साल की सजा सुनाई। साथ में 10 हजार रुपए जुर्माना लगाया था।

अपील और बचाव पक्ष के तर्क

सजा के खिलाफ रूपेश पुरी ने हाईकोर्ट में अपील दायर की। उसके वकील ने तर्क दिया कि दोनों एक ही गांव के रहने वाले हैं। 2013 से उनके बीच प्रेम संबंध था। पहले भी पीड़िता ने उस पर छेड़छाड़ का मामला दर्ज कराया था। जिसमें रूपेश बरी हो चुका था। बाद में दोनों ने फिर से संबंध बनाए और पीड़िता अपनी मर्जी से उसके घर गई थी।

वकील ने कहा कि, यह मामला प्रेम संबंध का है, न कि दुष्कर्म का। यदि शादी नहीं हो पाई, तो इसे झूठे वादे के तहत सहमति नहीं कहा जा सकता। उन्होंने यह भी बताया कि आरोपी छत्तीसगढ़ आर्म्ड फोर्स (CAF) में पदस्थ था। ड्यूटी पर रहने के कारण कुछ समय घर से दूर रहा। इसी बीच पीड़िता और आरोपी के माता-पिता के बीच विवाद हुआ। जिसके बाद परिजनों के दबाव में FIR दर्ज कराई गई।

युवती की ओर से पैनल वकील ने कहा कि, आरोपी ने शादी का झांसा देकर 2 महीने तक पीड़िता का यौन शोषण किया और बाद में छोड़ दिया।

हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का फैसला रद्द करते हुए रेप के आरोपी को बरी कर दिया है।

हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का फैसला रद्द करते हुए रेप के आरोपी को बरी कर दिया है।

जवान को खुद फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी थी पीड़िता

हाईकोर्ट ने गवाही और साक्ष्यों का विस्तार से परीक्षण करते हुए पाया कि, पीड़िता और आरोपी के बीच 2013 से प्रेम संबंध था। पीड़िता ने खुद स्वीकार किया कि उसने फेसबुक पर जवान को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी थी। दोनों के बीच लगातार बातचीत होती रही।

पीड़िता ने यह भी कहा कि, अगर आरोपी के माता-पिता उसे परेशान न करते, तो वह FIR दर्ज नहीं कराती। पीड़िता के माता-पिता ने भी अदालत में कहा कि, आरोपी का परिवार बेटी के साथ ठीक व्यवहार करता, तो वे पुलिस में रिपोर्ट नहीं करते। अदालत ने यह भी पाया कि, मेडिकल रिपोर्ट और FSL रिपोर्ट में दुष्कर्म के कोई ठोस प्रमाण नहीं मिले।

हाईकोर्ट बोला- पीड़िता खुद उसके घर गई

हाईकोर्ट ने कहा कि, यह मामला जबरन यौन शोषण का नहीं, बल्कि आपसी प्रेम और सहमति का है। पीड़िता खुद आरोपी के घर गई, उसके साथ रही और बार-बार संबंध बनाए। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि आरोपी ने झूठे वादे से उसे धोखा दिया।

न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि, केवल शादी के वादे पर बने संबंध को दुष्कर्म नहीं कहा जा सकता। जब तक यह साबित न हो कि आरोपी ने शुरू से ही शादी करने का इरादा नहीं रखा था। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का फैसला रद्द करते हुए आरोपी रूपेश कुमार पुरी को सभी आरोपों से बरी कर दिया।



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