छत्तीसगढ़ कोयला घोटाला मामले में बुधवार को आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने कार्रवाई करते हुए आरोपी देवेंद्र डडसेना और नवनीत तिवारी के खिलाफ स्पेशल कोर्ट में 519 पेज का चालान पेश किया। दोनों आरोपी वर्तमान में रायपुर की सेंट्रल जेल में बंद हैं।
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जानकारी के अनुसार, जुलाई 2024 में EOW ने इस घोटाले में शामिल 15 अन्य आरोपियों के खिलाफ पहला चालान पेश किया था। इसमें सौम्या चौरसिया, रानू साहू, समीर बिश्नोई, शिव शंकर नाग, संदीप कुमार नायक, सूर्यकांत तिवारी, निखिल चंद्राकर, लक्ष्मीकांत तिवारी, हेमंत जायसवाल, चंद्र प्रकाश जायसवाल, शेख मोइनुद्दीन कुरैशी, पारेख कुर्रे, राहुल सिंह, रोशन कुमार सिंह और वीरेंद्र जायसवाल शामिल थे।

सिंडिकेट के लिए करते थे वसूली
प्रवर्तन निदेशालय के अधिवक्ता सौरभ कुमार पांडेय ने बताया कि नवनीत तिवारी और देवेंद्र डडसेना ने कोयला घोटाले में अहम भूमिका निभाई। नवनीत तिवारी, आरोपी सूर्यकांत तिवारी के निर्देश पर रायगढ़ में कोयला कारोबारी और ट्रांसपोर्टरों से अवैध वसूली करता था। वह वसूली राशि को रायपुर स्थित सिंडिकेट के सदस्यों तक पहुंचाने में सक्रिय था और घोटाले से अर्जित संपत्तियों का बेनामीदार भी रहा।

दूसरी ओर, देवेंद्र डडसेना कांग्रेस के कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल के निजी सहायक के रूप में कार्यरत था। वह अवैध धनराशि का वास्तविक रिसीवर और मध्यस्थ था। डडसेना ने न केवल कोयला घोटाले की राशि को भौतिक रूप से रिसीव किया बल्कि इसे सिंडिकेट के अन्य आरोपियों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी निभाई।
इससे पहले अक्टूबर 2024 में मनीष उपाध्याय और रजनीकांत तिवारी के खिलाफ पूरक चालान पेश किया गया था। डिजिटल दस्तावेज और मौखिक साक्ष्य इस बात की पुष्टि करते हैं कि नवनीत तिवारी और देवेंद्र डडसेना ने कोयला घोटाले की पूरी श्रृंखला में सक्रिय और महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

पूर्व सीएम भूपेश बघेल के साथ कारोबारी सूर्यकांत तिवारी। (फाइल फोटो)
अब पढ़े क्या है कोयला लेवी घोटाला
जांच एजेंसियों का दावा है कि छत्तीसगढ़ में कोयला घोटाला किया गया है। इस मामले में 36 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। ईडी का आरोप है कि कोयले के परिचालन, ऑनलाइन परमिट को ऑफलाइन करने समेत कई तरीकों से करीब 570 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध वसूली की गई है।
छत्तीसगढ़ में अवैध कोल लेवी वसूली का मामला ईडी की रेड में सामने आया था। दावा है कि, कोल परिवहन में कोल व्यापारियों से वसूली करने के लिए ऑनलाइन मिलने वाले परमिट को ऑफलाइन कर दिया गया था। खनिज विभाग के तत्कालीन संचालक आईएएस समीर विश्नोई ने 15 जुलाई 2020 को इसके लिए आदेश जारी किया था।

2 पूर्व मंत्रियों, विधायकों समेत 36 पर FIR
छत्तीसगढ़ में कोयला घोटाले मामले में ED की रिपोर्ट पर ACB /EOW ने दो पूर्व मंत्रियों, विधायकों सहित 36 लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज की है। जिस पर अब ACB-EOW की टीम जांच कर रही है। इस मामले में IAS रानू साहू के अलावा IAS समीर विश्नोई, सौम्या चौरसिया, जेडी माइनिंग एसएस नाग और कारोबारी सूर्यकांत तिवारी को गिरफ्तार किया गया था।
कोल मामले में इन आरोपियों पर FIR
| कवासी लखमा, विधायक और पूर्व आबकारी मंत्री | देवेंद्र यादव, विधायक | अमरजीत भगत, पूर्व खाद्य मंत्री |
| बृहस्पत सिंह, पूर्व विधायक | गुलाब कमरो, पूर्व विधायक | शिशुपाल सोरी, पूर्व विधायक |
| चंद्रदेव प्रसाद राय, पूर्व विधायक | यूडी मिंज, पूर्व विधायक | समीर विश्नोई, निलंबित IAS |
| रानू साहू, निलंबित IAS | सौम्या चौरसिया, पूर्व उप सचिव, सीएम कार्यालय | संदीप कुमार नायक, सहायक खनिज अधिकारी |
| शिवशंकर नाग, खनिज अधिकारी | सूर्यकांत तिवारी, कोल कारोबारी | मनीष उपाध्याय |
| रौशन कुमार सिंह | निखिल चंद्राकर | राहुल सिंह |
| पारिख कुर्रे | मोइनुद्दीन कुरैशी | वीरेंद्र जायसवाल |
| रजनीकांत तिवारी | हेमंत जायसवाल | जोगिंदर सिंह |
| नवनीत तिवारी | दीपेश टांक | देवेंद्र डडसेना |
| राहुल मिश्रा | रामगोपाल अग्रवाल, तत्कालीन कोषाध्यक्ष, कांग्रेस | राम प्रताप सिंह, तत्कालीन प्रवक्ता कांग्रेस |
| विनोद तिवारी, पीईपी | इदरीश गांधी, पीईपी | सुनील कुमार अग्रवाल |
| जय | चंद्रप्रकाश जायसवाल | लक्ष्मीकांत तिवारी |
सूर्यकांत तिवारी की क्या थी भूमिका
ईडी की जांच के मुताबिक सूर्यकांत तिवारी ने कोयला परिवहन और परमिट प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं के जरिए करोड़ों की अवैध वसूली का मास्टरमाइंड माना गया है। आरोप है कि प्रति टन 25 रुपए की दर से वसूली कर रकम उसके कर्मचारियों के जरिए जमा कराई जाती थी, और इसके बदले संबंधित व्यापारियों को खनिज विभाग से परमिट जारी किए जाते थे।


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