छत्तीसगढ़ 10th मेरिट लिस्ट में 81% टॉपर्स सरकारी स्कूलों से हैं।
छत्तीसगढ़ बोर्ड 10वीं की टॉप-10 मेरिट लिस्ट में इस बार 42 विद्यार्थियों ने जगह बनाई है। इनमें 34 टॉपर सरकारी स्कूलों से हैं। यानी 81% से ज्यादा स्टूडेंट गवर्नमेंट स्कूलों से आते हैं। टॉप करने वालों में 27 लड़कियां शामिल हैं।
.
यानी टॉप करने वाले हर 10 में से 6 से 7 लड़कियां हैं। 13 जिलों के स्टूडेंट्स ने टॉप 10 में जगह बनाई। इनमें 5 जिले ऐसे हैं, जहां से किसी भी लड़के ने टॉप नहीं किया। रायपुर 10 टॉपर्स के साथ सबसे आगे रहा, जबकि महासमुंद ने 8 टॉपर्स दिए।
टॉप 2 में महासमुंद के 4 स्टूडेंट हैं। टॉप-10 की पूरी सूची महज डेढ़ प्रतिशत के दायरे में सिमट गई है। इसका मतलब टॉप 1 से टॉप 10 तक सिर्फ 1.5% का फर्क रहा, यानी 1-2 नंबर से ही रैंक बदल गई।
13 जिलों के स्टूडेंट्स ने मेरिट लिस्ट में बनाई जगह
मेरिट सूची में कुल 13 जिलों के स्टूडेंट्स ने जगह बनाई। सबसे ज्यादा टॉपर रायपुर (10) से रहे। इसके बाद महासमुंद (8), बिलासपुर (5) और दुर्ग (4) का नंबर रहा। मुंगेली से 3, रायगढ़, जशपुर और कोरिया से 2-2 छात्र मेरिट में पहुंचे। यह बताता है कि छोटे जिलों के विद्यार्थियों ने भी शानदार प्रदर्शन किया।

टॉप रैंक में महासमुंद के स्टूडेंट्स
जिलवार टॉपर्स का एनालिसिस करें तो महासमुंद के 8 टॉपर्स हैं, सभी टॉपर्स लड़कियां हैं। टॉप 2 पोजिशन महासमुंद के 4 स्टूडेंट्स हैं।

रायपुर के स्टूडेंट्स लगभग हर रैंक में मौजूद
रायपुर से सबसे ज्यादा 10 टॉपर्स हैं, इनमें छह लड़के और 4 लड़कियां हैं। रायपुर के स्टूडेंट्स हर रैंक में मौजूद हैं। लेकिन 9th-10th पोजिशन में सबसे ज्यादा 5 स्टूडेंट्स शामिल हैं।

मिड-लोअर रैंक में बिलासपुर मजबूत
बिलासपुर से 5 स्टूडेंट्स ने टॉप 10 में जगह बनाई है, सभी लड़कियां हैं। मिड-लोअर रैंक्स यानी 7वें से 10वें पोजिशन में बिलासपुर मजबूत स्थिति में हैं।

दुर्ग के चार टॉपर्स, कोई टॉप थ्री में नहीं
दुर्ग से कुल चार स्टूडेंट्स ने टॉप 10 में जगह बनाई हैं। इनमें दो लड़के और दो लड़कियां शामिल हैं। मिश्रित रैंक है, लेकिन कोई टॉप-3 में नहीं हैं।

मुंगेली का टॉप 2 में अच्छा प्रदर्शन
मुंगेली से 3 टॉपर्स निकले हैं, इनमें दो लड़कियां हैं। टॉप 2 पोजिशन में दो स्टूडेंट हैं। यानी कुल टॉपर्स कम हैं, लेकिन टॉप पोजिशन पर अच्छा रिजल्ट रहा रहा।


कबीरधाम, गरियाबंद, कांकेर और सारंगढ़ से एक-एक टॉपर
कबीरधाम, गरियाबंद, कांकेर और सारंगढ़ इन चार जिलों से कुल चार टॉपर निकले हैं। इनमें दो लड़के और दो लड़कियां हैं। कबीरधाम टॉप 2 में मौजूद हैं। अन्य ने 8th से 10th पोजिशन में जगह बनाई है।

प्राइवेट स्कूल पिछड़े, प्रयास से सबसे ज्यादा 13 टाॅपर्स
कुल टॉपर्स की संख्या 42 है। इनमें सरकारी स्कूल के 34 यानी 81% बच्चे हैं। जबकि प्राइवेट स्कूल के सिर्फ 8 (19%) बच्चे ही इस लिस्ट में शामिल हैं। सरकारी संस्थाओं में प्रयास से सबसे अधिक 13 स्टूडेंट्स ने टॉप किया है।





टॉप-10 में महज 1.5% का अंतर, 0.17% के मामूली अंतर बदली रैंकिंग
दसवीं में टॉप-1 से लेकर टॉप-10 तक के स्टूडेंट्स के बीच कुल अंतर सिर्फ 1.50 प्रतिशत का रहा। टॉप रैंक हासिल करने वाले विद्यार्थियों ने 99.00 प्रतिशत अंक प्राप्त किए, जबकि दसवें स्थान पर रहने वाले विद्यार्थियों का प्रतिशत 97.50 रहा।
हर रैंक के बीच का अंतर बेहद कम, लगभग 0.16 से 0.17 प्रतिशत के बीच रहा। यानी सिर्फ एक-दो अंकों के फर्क से छात्रों की रैंकिंग ऊपर-नीचे हो रही है। उदाहरण के तौर पर, 99.00 प्रतिशत से 98.83 प्रतिशत पर आते ही रैंक सीधे पहले से दूसरे स्थान पर पहुंच गई।

हर रैंक के बीच लगभग बराबर अंतर
टेबल देखेंगे तो पाएंगे कि हर स्टेप पर गैप सिर्फ 0.16%-0.17% है। यानी मेरिट लिस्ट बहुत टाइट है। सिर्फ 0.17% यानी 1-2 नंबर से रैंक बदली है। एक-दो सवाल से ही रैंक 1 से 5 तक गिरा है। यह स्थिति ‘हाई प्रिसीजन कम्पटीशन’ को दर्शाती है।
जहां छात्रों के प्रदर्शन में अंतर बहुत कम है, लेकिन रैंक पर इसका प्रभाव बड़ा पड़ रहा है। ऐसे में हर एक अंक की अहमियत काफी बढ़ी है। मेरिट लिस्ट के इस पैटर्न से यह भी स्पष्ट है कि छात्रों के बीच तैयारी का स्तर काफी बैलेंस रहा है।
यही वजह है कि टॉप-10 की पूरी सूची महज डेढ़ प्रतिशत के दायरे में सिमट गई है।
<
