मुख्यमंत्री खाद्यान योजना के तहत राशन दुकानों में मिलने वाला सरकारी चावल, उपभोक्ताओं (कॉर्डधारी) से सीधे राशन दुकान संचालक या दलाल खरीद ले रहे हैं। बीपीएल परिवारों को 1 रुपए और एपीएल को 10 रुपए किलो में मिलने वाले चावल के लिए संचालक/दलाल 20-22 रुपए त
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फिर वे चावल को थोक, फुटकर दुकानदारों या राइस मिलर्स को 25 से 30 रुपए किलो में बेच दे रहे हैं। इस पर भास्कर की टीम ने स्टिंग ऑपरेशन चलाया, जिससे सरकारी सिस्टम में सेंधमारी का पूरा नेटवर्क सामने आया।
दैनिक भास्कर 40 राशन दुकानों तक पहुंचा। दुकानों के बाहर घंटों इंतजार किया, लाइनों में लगे। लगातार 15 दिनों तक सरकारी चावल की बिक्री के पूरे सिस्टम को स्कैन किया। नियमानुसार जो चावल बिना राशन कार्ड के मिल ही नहीं सकता, वही चावल संचालकों ने 20 रुपए किलो में रिपोर्टर्स को बेच दिया।
100 किलो चावल की खरीदी को लेकर सौदेबाजी की। हालांकि कई संचालकों ने चावल देने से साफ-साफ मना कर दिया, क्योंकि वे हर महीने राशन लेने आने वाले उपभोक्ताओं को भली-भांति पहचानते हैं।
दुकान संचालक और कार्डधारी के बीच अब आपसी तालमेल हो गई है कि वे 20-22 रुपए के हिसाब से सीधे 35 किलो चावल का 700 रुपए देते हैं। उधर, सरकार ने पूरा सिस्टम बायोमेट्रिक बेस्ड कर दिया है, ताकि फर्जीवाड़ा रोका जा सके लेकिन संचालकों ने इसमें भी सेंधमारी कर दी है।
समझिए… चावल की खरीदी का पूरा गणित
बीपीएल कार्ड- 1 व्यक्ति का नाम होने पर 1 रुपए प्रति किलो की दर से 10 किलो, 2 सदस्य पर 20 किलो, 3-5 सदस्य पर 35 किलो व 5 से अधिक सदस्य होने पर 7 रुपए प्रति किलो चावल मिलता है। बेचने पर- 20 रुपए किलो के भाव से 35 किलो चावल 700 रुपए का हुआ।
एपीएल कार्ड- एपीएल को 35 किलो चावल 10 रुपए किलो से मिल रहा। बेचने पर- 20 रुपए किलो के भाव से 35 किलो चावल 700 रुपए का हुआ। संचालक 10 रुपए किलो सरकारी रेट से काटकर 350 रुपए पेमेंट करते हैं।
ऐसे चल रहा खेल… गली-मोहल्लों में खरीदी के प्वाइंट सरकारी राशन की दुकानों के चावल के धंधे का खुला खेल चल रहा है। सरकार की सख्ती भी बेदम नजर आ रही है। दरअसल, जो लोग इस धंधे में जुड़े हैं, उन्होंने खरीदी के लिए मोहल्लों में डंपिंग पॉइंट बना रखे हैं। वे चावल राइस मिलर्स को बेचते हैं।
वहीं दुकान संचालक उपभोक्ता को नगद देकर उसका चावल दुकान में ही अलग से डंप रखते हैं, वे भी इसे बाजार में खपाते हैं या फिर राइस मिलर्स को बेचते हैं। ये पूरा एक संगठित नेटवर्क है। इसमें वे उपभोक्ता भी शामिल हैं, जिन्हें चावल की जरूरत नहीं है लेकिन सरकार दे रही है तो लेकर बेच दे रहे हैं।
दुकान से चावल उठाए बिना वहीं मिल जाता है नकद, दलाल सीधे करते हैं खरीदी
शासकीय उचित मूल्य की दुकान, बैरनबाजार। दोपहर के 12:30 बजे। दुकान में काफी भीड़ थी। संचालक से बात हुई तो बोला- 3 बजे के बाद आना। रिपोर्टर 3 बजे पहुंचे तो ग्राहकों से घिरे संचालक ने इंतजार करने का इशारा किया। पेश हैं बातचीत के अंश…
रिपोर्टर- हमारा पापड़ का कारोबार है। चावल चाहिए। मिल जाएगा क्या? संचालक- (मुस्कुराते हुए) राशन कार्ड है? मिल जाएगा, इंतजार करो। (रिपोर्टर ने आधे घंटे इंतजार किया)
रिपोर्टर-बहुत देर हो रही है। संचालक- (दुकान के कर्मचारी को कहा-) इन्हें 5 किलो चावल दे दो। (कर्मचारी ने सरकारी पैकेट में चावल तोलकर दिया। रिपोर्टर ने 200 रुपए संचालक को दिए। उसने 100 रुपए वापस किए।)
रिपोर्टर- आगे और जरूरत पड़ेगी तो आपसे संपर्क करेंगे। संचालक- बिल्कुल, आप बात कर लेना।
सरकारी राशन दुकान, बढ़ई पारा। राशन दुकानदार संचालक मुकेश शर्मा से 15 दिन पहले मुलाकात हुई थी, उन्होंने तब कहा था कि आप नंबर रख लो, बात कर लेना। रिपोर्टर ने मुकेश से फोन पर बात की। इसके रिकॉर्डेड अंश… रिपोर्टर- आपसे पहले बात हुई थी। हमें चावल की ज्यादा जरूरत है। मैरिज सीजन चल रहा है। पापड़ का ऑर्डर है। मुकेश- अभी तो व्यवस्था नहीं हो पाएगी। आप रामसागर पारा में विनय ट्रेडर्स में संपर्क करो।
टीम विनय ट्रेडर्स पहुंची और संचालक राजेंद्र से कहा- दादा, कंट्रोल का ही चावल चाहिए। मिल जाएगा क्या? राजेंद्र- अभी स्टॉक नहीं है। 2-3 दिन में बाद आकर मिलना। मैं तो 22 रुपए में खरीदता हूं, 25-26 रुपए का रेट चल रहा है अभी। वैसे आपको तो किसी भी राशन दुकान में चले जाओ, जितना चाहिए उतना मिल जाएगा।
सरकारी राशन दुकान, बढ़ई पारा। राशन दुकानदार संचालक मुकेश शर्मा से 15 दिन पहले मुलाकात हुई थी, उन्होंने तब कहा था कि आप नंबर रख लो, बात कर लेना। रिपोर्टर ने मुकेश से फोन पर बात की। इसके रिकॉर्डेड अंश…
रिपोर्टर- आपसे पहले बात हुई थी। हमें चावल की ज्यादा जरूरत है। मैरिज सीजन चल रहा है। पापड़ का ऑर्डर है। मुकेश- अभी तो व्यवस्था नहीं हो पाएगी। आप रामसागर पारा में विनय ट्रेडर्स में संपर्क करो।
टीम विनय ट्रेडर्स पहुंची और संचालक राजेंद्र से कहा- दादा, कंट्रोल का ही चावल चाहिए। मिल जाएगा क्या? राजेंद्र- अभी स्टॉक नहीं है। 2-3 दिन में बाद आकर मिलना। मैं तो 22 रुपए में खरीदता हूं, 25-26 रुपए का रेट चल रहा है अभी। वैसे आपको तो किसी भी राशन दुकान में चले जाओ, जितना चाहिए उतना मिल जाएगा।
आंकड़ों में कार्डधारी

राशन की कालाबाजारी रोकने के लिए विभाग की ओर से जिलों में लगातार कार्रवाई की जा रही है। औचक जांच, निरीक्षण जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। जिन भी दुकानों में इस तरह अवैध रूप से राशन बेचा जा रहा है, उनके खिलाफ हम कठोर एक्शन लेंगे। उनके लाइसेंस रद्द करने जैसी सख्त कार्रवाई करेंगे। -रीना बाबासाहेब कंगाले, सचिव, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग
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