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छत्तीसगढ़ में धान पर रार: बोनस की चौथी किस्त के लिए किसान संघ ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, घेराव का किया ऐलान

छत्तीसगढ़ में धान खरीदी और किसानों को मिलने वाले बोनस के विषय पर एक बार फिर राजनीति गरमा गई है। भारतीय किसान संघ ने राज्य के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर किसानों की लंबित मांगों को तत्काल पूरा करने का आग्रह किया है। इस पत्र के माध्यम से संघ ने सरकार का ध्यान किसानों की आर्थिक समस्याओं की ओर आकर्षित किया है और अपनी मांगों को मजबूती से रखा है।

किसान संघ द्वारा उठाए गए मुद्दों में सबसे प्रमुख 1,700 करोड़ रुपये के बोनस का मामला है। संघ ने मांग की है कि धान पर मिलने वाले बोनस की चौथी किस्त का भुगतान जल्द से जल्द किया जाए। यह राशि लंबे समय से लंबित बताई जा रही है, जिससे किसानों में असंतोष की स्थिति बनी हुई है और वे अपनी बकाया राशि का इंतजार कर रहे हैं।

बोनस के भुगतान के अलावा, भारतीय किसान संघ ने धान के समर्थन मूल्य में भी बड़ी वृद्धि की मांग रखी है। संघ ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में स्पष्ट किया है कि धान खरीदी का मूल्य बढ़ाकर 3,358 रुपये प्रति क्विंटल किया जाना चाहिए। संघ का मानना है कि खेती की बढ़ती लागत और किसानों की मेहनत के अनुपात में यह मूल्य वृद्धि वर्तमान समय में अत्यंत आवश्यक है।

अपनी मांगों को लेकर भारतीय किसान संघ ने अब कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। संघ ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाता है और उन्हें समय रहते पूरा नहीं किया जाता है, तो वे बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे। संघ ने अपनी मांगों के समर्थन में आंदोलन की रूपरेखा भी तैयार कर ली है।

घोषित कार्यक्रम के अनुसार, भारतीय किसान संघ ने 27 अक्टूबर को मंत्रालय घेराव करने का निर्णय लिया है। संघ का कहना है कि मांगों की अनदेखी होने की स्थिति में प्रदेश भर के किसान एकजुट होकर मंत्रालय का घेराव करेंगे और अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाएंगे। इस चेतावनी के बाद अब प्रशासन और संबंधित विभागों में हलचल तेज होने की संभावना है।

धान और बोनस से जुड़े इस ताजा घटनाक्रम ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। किसान संघ के इस पत्र और आंदोलन के ऐलान के बाद अब सभी की नजरें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि 27 अक्टूबर से पहले सरकार किसानों की इन मांगों पर क्या निर्णय लेती है और प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर क्या स्थिति बनती है।

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