![]()
राज्य के सबसे बड़े अंतरराज्यीय बस स्टैंड भाठागांव से बसों में सफर करना लोगों को भारी पड़ रहा है। बस स्टैंड में पहुंचने के साथ ही यात्रियों को बसों में बिठाने के लिए एजेंट खुलेआम गुंडागर्दी कर रहे हैं। जबरदस्ती लोगों को बसों में बिठाया जा रहा है।
.
त्योहारी सीजन में सवारी बिठाने के लिए एजेंट आपस में ऐसे लड़े कि पुलिस तक भी मामला पहुंच गया। बस वाले यात्रियों से मनमाना किराया वसूल कर रहे हैं। परिवार के साथ आए लोगों को पीने के पानी तक के लिए भटकना पड़ता है।
लोगों को ज्यादा से ज्यादा सुविधा मिले इसलिए पंडरी बस स्टैंड को हटाकर भाठागांव में शिफ्ट किया गया। लेकिन अभी यहीं लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। इंटर स्टेट बस स्टैंड में अवैध बुकिंग एजेंट भी सक्रिय हैं। सभी शहरों के लिए एक ही जगह से बस मिलने की वजह से यात्रियों को भाठागांव बस स्टैंड ही जाना पड़ता है।
इसलिए परेशानी रोज बढ़ रही है। लोकल शहरों के अलावा महाराष्ट्र, तेलंगाना, हैदराबाद, पुणे, इंदौर, ओडिशा, उत्तरप्रदेश समेत कई राज्यों के लिए भी बसें इसी स्टैंड से मिलती हैं। इस बस स्टैंड से रोजाना 30 हजार से ज्यादा यात्री सफर कर रहे हैं। ऐसे में लोगों की परेशानी हर दिन बढ़ रही है।
टिकट भी नहीं देते और किराया भी ज्यादा ले रहे रायपुर से राज्य के दूसरे जिलों में जाने के लिए बस वाले मनमाना किराया वसूल कर रहे हैं। जिस शहर का टिकट 80 या 120 रुपए होता है तो उससे 100 से 150 रुपए तक की वसूली करते हैं। इतना ही नहीं सामने शहर जैसे दुर्ग, भिलाई, राजनांदगांव जैसे शहरों में जाने के लिए टिकट ही नहीं दी जाती है।
नए यात्री पूछते हैं कि किराया कितना है तो उन्हें धमकाया जाता है। कंडक्टर जो किराया मांगता है उसे देना होता है। बस मालिकों से इसकी शिकायत की जाती है तो वे कहते हैं कि चिल्हर नहीं होने और यात्रियों को भी जल्दी होती है इसलिए कंडक्टर राउंड फिगर में पैसा मांग लेते हैं।
भाठागांव चौक पर रोज हो रहा है ट्रैफिक जाम अंतरराज्यीय बस स्टैंड भाठागांव से हर दिन 200 से ज्यादा बसें निकलती हैं। बस स्टैंड से निकलने या वहां जाने के लिए सभी बसें भाठागांव चौक से ही मुड़ती हैं। बसें लंबी होती है इसलिए जैसे ही वो चौक से मुड़ती हैं वहां जाम लग जाता है। चौक के चारों ओर से आने-जाने वाले लोगों को बसों के जाने तक का इंतजार करना पड़ता है।
क्योंकि ओवरब्रिज के नीचे आने-जाने के लिए सर्विस रोड ही है। यह बेहद संकरी है। इस वजह से परेशानी और बढ़ जाती है। बस स्टैंड के आसपास छह वार्ड हैं। इन वार्डों के करीब एक लाख लोग रोजाना इस जाम में फंसते हैं। बस स्टैंड से हर पांच मिनट के अंतराल में बसें आती-जाती हैं। इस वजह से यह परेशानी और बढ़ गई है।
समाधान – बड़े शहरों में रीजनल बस स्टैंड, रायपुर में भी बनाओ इस तरह की समस्या से निपटने के लिए बड़े शहरों में रीजनल बस स्टैंड बनाए जाते हैं। जिससे सभी बसें एक ही जगह पर आने के बजाय बाहरी सड़कों से ही वापस हो जाती हैं। रायपुर में भी बहुत पहले यह प्लान बनाया गया था। इसके तहत बलौदाबाजार वाली बसों के लिए विधानसभा के पास और बिलासपुर से आने वाली बसों के लिए आरटीओ दफ्तर के आसपास रीजनल बस स्टैंड बनाने की योजना थी।
लेकिन इस पर कभी काम ही शुरू नहीं किया गया। इन दो बस स्टैंड का निर्माण हो जाता है तो यात्रियों को भी सुविधा होती। एक साथ सभी बसें एक ही जगह पर नहीं रहती इससे जाम की समस्या भी खत्म हो जाती। संदीप श्रीवास्तव, टाउन प्लानर
<
