रायपुर8 मिनट पहलेलेखक: देवव्रत भगत
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छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल ने 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा के नतीजे जारी कर दिए हैं। इस बार रिजल्ट में सिर्फ पासिंग परसेंटेज या मेरिट लिस्ट ही चर्चा में नहीं है, बल्कि टॉप करने वाले स्टूडेंट्स की कहानियां भी सामने आई हैं।
12वीं बोर्ड में 83.04% स्टूडेंट्स पास हुए हैं, जबकि टॉप-10 मेरिट लिस्ट में 43 स्टूडेंट्स ने जगह बनाई है। वहीं 10वीं बोर्ड में भी 42 छात्रों के नाम मेरिट सूची में शामिल हैं। इन आंकड़ों के बीच एक और खास ट्रेंड दिखा, लड़कियों का दबदबा, जिन्होंने मेरिट में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है।
लेकिन इन नंबरों के पीछे सिर्फ रिजल्ट नहीं, अलग-अलग संघर्ष और जिद की कहानियां छिपी हैं। किसी ने 10वीं की चूक को अपनी ताकत बना लिया, किसी ने बिना कोचिंग डिजिटल प्लेटफॉर्म के सहारे पढ़ाई की, तो किसी ने सीमित संसाधनों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच अपना रास्ता बनाया।
कहीं मोबाइल से दूरी ने फोकस दिया, तो कहीं उसी डिजिटल दुनिया ने पढ़ाई को आसान बनाया। इन सभी की कहानियां अलग जरूर हैं, लेकिन मंजिल एक ही रही….टॉप तक पहुंचना। ऐसे ही टॉपर्स की इंस्पायरिंग स्टोरी पढ़िए…

2 नंबर से छूटा सपना…2 साल बाद बना टॉपर
पलारी के जिज्ञासु वर्मा की कहानी: 10वीं की चूक को बनाया जिद, 12वीं में पूरे छत्तीसगढ़ में पहला स्थान
कभी सिर्फ दो नंबर की कमी ने जिज्ञासु वर्मा को टॉप-10 की सूची से बाहर कर दिया था। उस वक्त ये फर्क छोटा जरूर था लेकिन जिज्ञासु के लिए यही वो मोड़ बना, जिसने उनकी पूरी दिशा बदल दी। दो साल बाद वही छात्र अब छत्तीसगढ़ बोर्ड की 12वीं परीक्षा में 98.60 प्रतिशत अंक लाकर प्रदेश का टॉपर बन गया है।
जिज्ञासु कहते हैं, ‘मैंने कभी नहीं सोचा था कि राज्य में टॉप करूंगा। बस यही था कि पिछली बार जो कमी रह गई थी, उसे पूरा करना है।’ यही सोच धीरे-धीरे उनकी ताकत बनती गई और 10वीं की निराशा 12वीं में उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा बन गई।

बलौदाबाजार के जिज्ञासु वर्मा ने 98.60 प्रतिशत अंक हासिल कर प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया।
साधारण परिवार, लेकिन सोच बड़ी
बलौदाबाजार जिले के पलारी में रहने वाले जिज्ञासु एक साधारण परिवार से आते हैं। उनके पिता नरेंद्र वर्मा नगर में एक छोटी किराना दुकान चलाते हैं, जबकि मां महेश्वरी वर्मा सरकारी प्राइमरी स्कूल में में प्रधानपाठिका हैं।
परिवार में पढ़ाई का माहौल जरूर था, लेकिन कोई संसाधन या सुविधा नहीं थी। इसके बावजूद जिज्ञासु ने अपनी मेहनत और अनुशासन के दम पर यह मुकाम हासिल किया। उनके बड़े भाई वैभव भी पढ़ाई में आगे हैं और फिलहाल नीट की तैयारी कर रहे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि जिज्ञासु की पढ़ाई किसी तयशुदा ढांचे में नहीं बंधी थी। वे बताते हैं, “मेरा कोई फिक्स टाइमटेबल नहीं था। जब समय मिलता और मन करता, तब पढ़ाई करता था।” हालांकि इस आजादी के बीच एक चीज हमेशा स्थिर रही पढ़ाई के वक्त उनका पूरा फोकस।
स्कूल की पढ़ाई के साथ उन्होंने पलारी की लक्ष्य एकेडमी में कोचिंग भी ली, जहां शिक्षकों का उन्हें लगातार मार्गदर्शन मिला। स्कूल के प्राचार्य राकेश तिवारी बताते हैं कि जिज्ञासु शुरू से ही शांत स्वभाव के और लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाले छात्र रहे हैं।

जिज्ञासु के पिता किराना दुकान चलाते हैं, जबकि मां शिक्षिकाहैं।
21 दिन मोबाइल और सोशल मीडिया से दूर रहे
आज के दौर में जहां मोबाइल और सोशल मीडिया पढ़ाई के बीच सबसे बड़ा व्यवधान बनते जा रहे हैं, वहीं जिज्ञासु ने इसे समय रहते पहचान लिया। उन्हें यूट्यूब पर मूवी देखने का शौक था, लेकिन परीक्षा से 21 दिन पहले उन्होंने खुद को पूरी तरह सोशल मीडिया से अलग कर लिया। उन्होंने न तो किसी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल का सहारा लिया और न ही किसी डिजिटल शॉर्टकट का सिर्फ किताबों और अपनी तैयारी पर भरोसा रखा।
जिज्ञासु की कहानी सिर्फ एक टॉपर की नहीं है, बल्कि उस जिद की है जो एक छोटी सी कमी से जन्म लेती है। 10वीं में छूटे दो अंक उनके लिए हार नहीं, बल्कि एक अधूरा लक्ष्य बन गए थे। 12वीं में उन्होंने उसी लक्ष्य को पूरा कर दिखाया। यही वजह है कि उनकी सफलता सिर्फ अंकों की नहीं, बल्कि उस सोच की जीत है, जिसमें हार को भी रास्ता बनाने का हौसला होता है।

हिमशिखा ने 12वीं परीक्षा में 96.80 प्रतिशत अंक हासिल कर प्रदेश में 8वां स्थान प्राप्त किया है।
बिना कोचिंग 96.80%… AI और डिजिटल स्टडी से प्रदेश में 8वां स्थान
रायपुर की हिमशिखा गुप्ता ने यूट्यूब और ChatGPT से की तैयारी
जिस मोबाइल को अक्सर पढ़ाई का सबसे बड़ा दुश्मन माना जाता है, उसी को रायपुर की हिमशिखा गुप्ता ने अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया। गुढ़ियारी के रायपुर कॉन्वेंट स्कूल की छात्रा हिमशिखा ने छत्तीसगढ़ बोर्ड की 12वीं परीक्षा में 96.80 प्रतिशत अंक हासिल कर प्रदेश में 8वां स्थान प्राप्त किया है। खास बात यह है कि उन्होंने यह सफलता बिना किसी कोचिंग के हासिल की और अपनी पढ़ाई के लिए यूट्यूब और ChatGPT जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का सहारा लिया।
आर्थिक रूप से साधारण परिवार से आने वाली हिमशिखा के पिता संजय और मां रीता गुप्ता दोनों ही एक एनजीओ में काम करते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने हमेशा पढ़ाई को प्राथमिकता दी, लेकिन महंगी कोचिंग की सुविधा नहीं थी। ऐसे में हिमशिखा ने खुद ही रास्ता तलाशा और डिजिटल प्लेटफॉर्म को अपना शिक्षक बना लिया।
हिमशिखा बताती हैं कि उन्होंने पढ़ाई के लिए किसी लंबे-चौड़े टाइमटेबल का सहारा नहीं लिया। वह रोजाना सिर्फ 3 से 4 घंटे पढ़ाई करती थीं, लेकिन उस समय पूरा फोकस पढ़ाई पर रहता था। किसी भी विषय में डाउट होने पर वह तुरंत यूट्यूब वीडियो देखतीं या ChatGPT के जरिए उसे समझने की कोशिश करतीं। धीरे-धीरे यही तरीका उनकी आदत बन गया और उन्होंने इसे ही अपनी ताकत बना लिया।
मोबाइल और AI से पढ़ाई बनी आसान
स्कूल की पढ़ाई के साथ उनका यह सेल्फ-स्टडी मॉडल लगातार चलता रहा। स्कूल की प्रिसिंपल श्वेता वासनिक का कहना है कि हिमशिखा ने यह साबित किया है कि अगर मोबाइल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सही तरीके से उपयोग किया जाए, तो यह पढ़ाई में बाधा नहीं, बल्कि मददगार बन सकता है। उनके मुताबिक हिमशिखा शुरू से ही नियमित छात्रा रही हैं और उन्होंने निरंतरता के साथ अपनी तैयारी को बनाए रखा।
बिना कोचिंग के पाई बड़ी सफलता
हिमशिखा की यह सफलता इसलिए भी खास है, क्योंकि आज के दौर में जहां डिजिटल प्लेटफॉर्म को अक्सर ध्यान भटकाने वाला माना जाता है, वहीं उन्होंने उसी को अपनी पढ़ाई का सबसे बड़ा सहारा बना लिया। बिना कोचिंग, सीमित संसाधनों और कम समय की पढ़ाई के बावजूद उन्होंने यह साबित कर दिया कि सफलता सिर्फ घंटों की मेहनत से नहीं, बल्कि सही दिशा में की गई मेहनत से मिलती है।
कंप्यूटर साइंस में बनाना चाहती हैं करियर
अब हिमशिखा आगे कंप्यूटर साइंस के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहती हैं। उनकी यह कहानी उन छात्रों के लिए एक उदाहरण बनकर सामने आई है, जो संसाधनों की कमी को अपनी कमजोरी मान लेते हैं। हिमशिखा ने दिखाया है कि अगर सीखने का तरीका सही हो, तो मोबाइल और इंटरनेट भी किसी कोचिंग क्लास से कम नहीं होते।

आफिया खातून ने प्रदेश की मेरिट सूची में 9वां स्थान हालिस किया है।
मैकेनिक की बेटी बनी मेरिट में 9वीं… बिना कोचिंग हासिल की सफलता, अब UPSC लक्ष्य
छत्तीसगढ़ बोर्ड की 12वीं परीक्षा में राजधानी रायपुर की आफिया खातून ने प्रदेश की मेरिट सूची में 9वां स्थान हासिल कर एक साधारण परिवार की बड़ी कहानी लिख दी है। सीमित संसाधनों और बिना किसी कोचिंग के आफिया ने यह सफलता हासिल की है, जो उनके परिवार के लिए गर्व का पल बन गई है।
श्रीनगर डेजल पब्लिक स्कूल की छात्रा आफिया के पिता मोहम्मद अनवर पेशे से मोटर मैकेनिक हैं। उन्होंने खुद सिर्फ 9वीं तक पढ़ाई की है, लेकिन अपनी बेटी की पढ़ाई को लेकर उनका नजरिया हमेशा अलग रहा। वे कहते हैं, “हम ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं, लेकिन हमने हमेशा चाहा कि हमारी बेटी पढ़-लिखकर कुछ बड़ा करे।”
आफिया की मां रौनक परवीन भी ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं हैं, लेकिन घर के माहौल में पढ़ाई को लेकर हमेशा सहयोग रहा। परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी, इसलिए कोचिंग जैसी सुविधाएं लेना संभव नहीं था। ऐसे में आफिया ने स्कूल की पढ़ाई और ऑनलाइन माध्यमों के सहारे अपनी तैयारी जारी रखी।

आफिया ने ऑनलाइन स्टडी मटेरियल का सहारा लिया।
बिना कोचिंग के फोकस से पाई सफलता
आफिया ने बिना किसी अतिरिक्त कोचिंग के सिर्फ अपने फोकस और निरंतरता के दम पर यह मुकाम हासिल किया। उन्होंने स्कूल में पढ़ाई के साथ-साथ ऑनलाइन स्टडी मटेरियल का सहारा लिया और अपने डाउट्स खुद क्लियर किए। यही आत्मनिर्भरता उनकी सफलता की सबसे बड़ी वजह बनी।
यूपीएससी का लक्ष्य
उनके पिता अब चाहते हैं कि आफिया आगे चलकर संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास करे। आफिया भी अपने परिवार के इस सपने को पूरा करने के लिए तैयार हैं और 12वीं के बाद से ही यूपीएससी की तैयारी में जुटने की योजना बना रही हैं।
भरोसा और मेहनत से मिली कामयाबी
आफिया की यह कहानी सिर्फ मेरिट लिस्ट तक पहुंचने की नहीं है, बल्कि उस भरोसे की है, जो एक साधारण परिवार ने अपनी बेटी की पढ़ाई पर किया। सीमित साधनों के बीच मिली यह सफलता बताती है कि अगर परिवार का साथ और खुद पर विश्वास हो, तो बड़े से बड़ा सपना भी हासिल किया जा सकता है।
दिव्यांगता को नहीं बनने दिया पहचान… 96.40% के साथ प्रदेश में 10वां स्थान
कांकेर की यश खोबरागड़े ने 12वीं में हासिल की सफलता
परीक्षा के परिणामों में इस बार कांकेर जिले के लिए गर्व का खास पल सामने आया है। जिले की छात्रा यश खोबरागड़े ने 12वीं बोर्ड परीक्षा में 96.40 प्रतिशत अंक हासिल कर पूरे प्रदेश में 10वां स्थान प्राप्त किया है। उनकी यह सफलता इसलिए और खास मानी जा रही है, क्योंकि उन्होंने दिव्यांग होने के बावजूद अपनी मेहनत और लगन से यह मुकाम हासिल किया।
पीएम श्री आत्मानंद शासकीय नरहरदेव उत्कृष्ट हिंदी-इंग्लिश माध्यम विद्यालय की छात्रा यश पढ़ाई में शुरू से ही मेधावी रही हैं। उन्होंने कभी अपनी शारीरिक चुनौतियों को अपनी पहचान नहीं बनने दिया, बल्कि उसे पीछे छोड़ते हुए अपने लक्ष्य पर फोकस बनाए रखा।
यश की पढ़ाई का सफर आसान नहीं रहा, लेकिन उन्होंने हर चुनौती का सामना धैर्य और आत्मविश्वास के साथ किया। नियमित पढ़ाई और लगातार अभ्यास के जरिए उन्होंने अपनी तैयारी को मजबूत किया।

नितेश देवांगन की करघे के घर से मेरिट तक की कहानी
करघे के घर से मेरिट तक…कटगी के नितेश ने रचा मुकाम
कपड़ा बुनने वाले परिवार के बेटे ने 12वीं में प्रदेश में 9वां स्थान हासिल कर बढ़ाया गांव का मान
बलौदाबाजार के छोटे से गांव कटगी का नाम इस बार छत्तीसगढ़ बोर्ड की मेरिट सूची में चमका है। यहां के रहने वाले नितेश देवांगन ने 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 में प्रदेश में 9वां स्थान हासिल कर अपने परिवार और पूरे गांव को गर्व का मौका दिया है।
नितेश एक साधारण परिवार से आते हैं, जहां पीढ़ियों से कपड़ा बुनने का काम होता रहा है। घर में करघे की आवाज के बीच पले-बढ़े नितेश के लिए पढ़ाई का रास्ता आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने मेहनत और लगन से यह साबित कर दिया कि हालात चाहे जैसे हों, मंजिल हासिल की जा सकती है।
मेरिट सूची में नाम आने की खबर जैसे ही गांव पहुंची, घर का माहौल भावुक हो गया। परिवार के सदस्यों की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। जिन हाथों ने वर्षों तक करघा संभाला, उन्हीं हाथों ने आज बेटे की सफलता पर ताली बजाई। गांव के लोगों ने भी नितेश की इस उपलब्धि को अपनी जीत की तरह देखा।

नितेश देवांगन का परिवार पीढ़ियों से कपड़ा बुनने का काम करता है।
सीमित संसाधनों में मेहनत से मिली सफलता
नितेश की पढ़ाई सीमित संसाधनों के बीच ही आगे बढ़ी। बड़े शहरों जैसी सुविधाएं या महंगी कोचिंग उनके पास नहीं थीं, लेकिन उन्होंने स्कूल की पढ़ाई और अपनी निरंतर मेहनत के दम पर यह मुकाम हासिल किया। उनका यह सफर बताता है कि मेहनत और धैर्य के साथ छोटे गांवों से भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं।
गांव के बच्चों के लिए बने प्रेरणा
नितेश की सफलता अब गांव के अन्य बच्चों के लिए भी एक प्रेरणा बन गई है। जिस घर में करघा चलता है, वहां से निकलकर प्रदेश की मेरिट सूची तक पहुंचना सिर्फ एक उपलब्धि नहीं, बल्कि उस विश्वास की कहानी है कि मेहनत कभी बेकार नहीं जाती।
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10वीं में 77.15% स्टूडेंट्स पास हुए हैं। 42 स्टूडेंट्स मेरिट में आए हैं।
छत्तीसगढ़ बोर्ड 10वीं-12वीं के नतीजों में लड़कियों ने बाजी मारी है। 12वीं बोर्ड में कुल 83.04% स्टूडेंट्स पास हुए हैं। टॉप 10 मेरिट लिस्ट में 43 स्टूडेंट्स के नाम हैं। इसमें 33 लड़कियां हैं। बलौदाबाजार जिले के पलारी स्थित सरस्वती शिशु मंदिर के छात्र जिज्ञासु वर्मा ने टॉप किया है। जिज्ञासु ने 98.60 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। पढ़ें पूरी खबर…

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