![]()
.
जिले के अंदरूनी ग्रामीण इलाकों तक आसान परिवहन की सुविधा देने मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा के तहत नक्सल क्षेत्रों में बस संचालन करने परमिट तो दे दिया गया है, लेकिन जिन रूट्स पर बसों को परमिट दिया गया है, वहां सड़कें ही नहीं हैं। ऐसे में बसों को रूट बदलकर चलना पड़ रहा है। यानी जिन गांवों को कनेिक्टविटी का लाभ देना था, उन्हें ही योजना का फायदा नहीं मिल पा रहा है। उधर, पीएमजीएसवाय में नई सड़क बनाने या मरम्मत के लिए फंड का अभाव बताकर अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से पलड़ा झाड़ रहे हैं।
जिले के बुरगुम से दंतेवाड़ा, कटेकल्याण से तेलम, टेटम, एटेपाल, मोखपाल होकर जगरगुंडा पहुंचने बस को परमिट दिया गया है। इस रूट पर सड़क ही नहीं बन पाई है। कटेकल्याण से महज 5 किमी दूर तुमकपाल तक ही सड़क मौजूद है। इसके आगे सड़क तो बनी हुई है, लेकिन कई जगहों पर सड़कें कटी हुई हैं और पुलिया भी क्षतिग्रस्त पड़ी हुई हैं। इन सड़कों की मरम्मत के लिए बजट ही नहीं मिल पा रहा है। ये सारी सड़कें पीएमजीएसवाई की हैं, जिन्हें वर्ष 2006 में बनाया गया था, लेकिन नक्सलियों ने कई जगहों से इस सड़क को काट दिया।
हालांकि वर्ष 2020 को इस सड़क को नक्सलियों के चंगुल से मुक्त तो करवा दिया गया, लेकिन इसके बाद सड़क की दोबारा मरम्मत के लिए पीएमजीएसवाई को बजट ही नहीं मिल पाया है। इसी सड़क पर बस सेवा शुरू करने का दावा किया जा रहा है। इन हालातों में बस सिर्फ कागजों पर ही चल रही है। यही हाल बुरगुम से गीदम बस सेवा का भी है, जिसके लिए हाल में परमिट दिया गया है, लेकिन यहां भी पोटाली तक ही बस मुश्किल से आना-जाना कर पा रही हैं। ऐसे में जिन ग्रामीणों को बस परमिट मिलने के बाद आवागमन में सुविधा की उम्मीद बंधी थी, वे अब फिर हताश, परेशान हैं।
अरनपुर से पोटाली, बुरगुम, कटेकल्याण से मोखपाल, चिकपाल से मारजुम, तुमकपाल से गादम, नडेनार जैसे एक दर्जन से ज्यादा गांवों की सड़कें अब भी अधूरी पड़ी हुई हैं। इससे आसान परिवहन की सुविधा ही नहीं मिल पा रही है। पीएमजीएसवाई के अफसरों का कहना है कि मरम्मत व निर्माण का एस्टीमेट बनाकर भेजा है, लेकिन बजट न मिलने से सड़कों का निर्माण ठप पड़ा है। हाल ही में दंतेवाड़ा से बीजापुर जिले के घोर नक्सल प्रभवित पामेड़ के लिए भी दंतेवाड़ा से बस की सेवा शुरू करने बस संचालक को परमिट दिया गया है, लेकिन ये बस सिलगेर से आगे जा ही नहीं पा रही है।
बसों को परमिट मिलने से लोगों में आसान परिवहन की सुविधा मिलने की उम्मीद जागी थी, लेकिन बदहाल सड़कों के कारण बसें चल ही नहीं पा रही हैं। सरकार ने मुख्यधारा से कटे गांवों तक आवाजाही दुरुस्त करने बसों को परमिट देने के साथ ही ग्रामीणों के समूहों को मैजिक वाहन भी दिए हैं। जबकि वास्तविकता ये है कि सड़कें नहीं होने से नक्सल क्षेत्रों के ग्रामीणों को बस सेवा का फायदा ही नहीं मिल पा रहा है। बसों में लगे बोर्ड में ही सिर्फ नक्सल प्रभावित गांवों के नाम लिखे हुए हैं, लेकिन हकीकत ये है कि ये बसें अंदरूनी गांवों तक पहुंच ही नहीं पा रही हैं।
<
