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Home » Bring women suffering from illness and superstition to the healing meeting and convert them to Christianity. | धर्मांतरण का नया फार्मूला…: बीमारी और अंधविश्वास से घिरीं महिलाओं को चंगाई सभा में लाओ, मसीही बनाओ – Raipur News
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Bring women suffering from illness and superstition to the healing meeting and convert them to Christianity. | धर्मांतरण का नया फार्मूला…: बीमारी और अंधविश्वास से घिरीं महिलाओं को चंगाई सभा में लाओ, मसीही बनाओ – Raipur News

By adminOctober 16, 2025No Comments4 Mins Read
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शहर व ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को टारगेट कर रहे, झांसे में ले रहीं महिला प्रचारक

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चंगाई सभा जैसी चीजें भ्रमित करने वाली, रोकने कठोर एक्ट आएगा: गृहमंत्री शर्मा

छत्तीसगढ़ के शहर व गांवों में धर्मांतरण के लिए मिशनरी ने अपना फार्मूला बदल दिया है। इसमें महिला प्रचारक अपनी पहचान छिपाकर बीमारी, अंधविश्वास से घिरीं महिलाओं से पहले नजदीकी बढ़ाती हैं फिर उन्हें चंगाई सभा में लेकर आती हैं। इधर, मंगलवार को डिप्टी सीएम व गृह मंत्री विजय शर्मा ने इसे रोकने सख्त एक्ट लाने की बात कही है।

कोरबा व जांजगीर जिले के कुछ खास स्थानों पर इसकी पड़ताल की गई तो चंगाई सभा की आड़ में महिलाओं और बच्चियों को इसाई बनाने का बड़ा खेल सामने आया है। धर्मांतरण से ईसाई बनीं युवतियां और महिलाएं अब नन नहीं बल्कि अपना हुलिया और नाम,सरनेम बदले बिना ही लोगों के बीच रहकर गुप्त रूप से धर्म प्रचार का काम कर रहीं हैं।

उनके टारगेट में सिर्फ महिलाएं, युवतियां और बच्चियां हैं। मजदूरी का काम करते हुए नीचे तबके के लोगों से पहले नजदीकी बढ़ाई जाती है। उनके दुख-दर्द को जानने-समझने के बाद इससे बचाव के उपाय में प्रार्थना की बात बताकर इन्हें चर्च तक लाती हैं। इनसे यहां एक आवेदन भराया जाता है और बताया जाता है कि हर रविवार को उनके लिए प्रार्थना की जाएगी।

इसके लिए उनके सामने भी हर रविवार को चर्च आने की शर्त रखी जाती है। ज्यादातर बीमारी से परेशान महिलाएं शारीरिक कष्ट से मुक्ति के लिए पहुंच रहीं हैं। 20% मामले जादू-टोना जैसे अंधविश्वास से भी जुड़े हैं। यहां इन सभी कष्टों से मुक्ति का दावा करने के साथ कष्ट मुक्त हुए लोगों की गवाही भी सभी के सामने कराई जाती है, जिसमें वे प्रभु की उनपर कैसी कृपा हुई इस बारे में बताते हैं।

बीमारी का इलाज बाकायदा एलोपैथिक पद्धति से किया जाता है लेकिन इसे प्रभु की कृपा के रूप में रखा जाता है। चर्च तक पहुंचने वाली 90% महिलाएं मसीही बन जातीं हैं तो 10% महिलाएं लाभ न होने या कष्टों का निवारण नहीं होने पर लौट जातीं हैं।

मजदूर वर्ग की 3 साल या उससे अधिक उम्र की बच्चियों को पढ़ाई के नाम पर चर्च के छात्रावास में रखा जा रहा है। यहां इन्हें पूरी सुविधा दी जाती है। पढ़ाई के अलावा हर उस चीज की इन्हें ट्रेनिंग दी जाती है जिससे ये अच्छे धर्म प्रचारक बन सकें। हर रविवार को ये बच्चियां प्रभु के वचन को यादकर वहां उपस्थित लोगों को सुनातीं हैं। इन्हें बाइबिल में लिखे सभी वचनों को कंठस्थ कराया जा रहा है। छात्रावास से प्रभु के वचनों को सुनाने 3 से 13-14 साल तक की बच्चियां चर्च में नजर आईं।

कोथारी के पास्टर हैं बाबूलाल

बीमारी के साथ हर परेशानी से मुक्ति दिलाने का दावा कोथारी के पास्टर बाबूलाल मिरी ने दावा किया कि वह हर रोग का इलाज परमेश्वर की कृपा से करते हैं। जमीन जायदाद की परेशानी जादू-टोना से मुक्ति दिलाते हैं। उन्होंने बताया कि परमेश्वर की आज्ञा मानने पर प्रतिज्ञा पूरी होती है और इसी विश्वास से लोग इसाई बन रहे हैं। उन्होंने यहां तक दावा किया कि मरे हुए इंसान को भी प्रार्थना के दम पर जिंदा किया है।

सामने मिट्टी का कच्चा मकान, बाड़ी में भव्य चर्च

जब भास्कर टीम कोरबा जिले के कोथारी में रहने वाले पास्टर बाबूलाल मिरी के घर पहुंची तो सामने उनका कच्चा मकान दिखा, पर अंदर बाड़ी में एक भव्य चर्च नजर आया। बाबूलाल मिरी ने बताया कि उनकी जमीन पर प्रभु के भक्तों ने इसे बनाया है। वे 25-30 साल से इसाई धर्म का प्रचार कर रहे हैं।

वहीं, पहंदा गांव के एक मकान में भास्कर पहुंचा तो चला कि अंदर चर्च की गतिविधियां चल रही हैं। सड़क किनारे खेत में बनाए इस चर्च में बड़ी संख्या में महिलाएं एकत्रित थीं, जो बीमारियों के इलाज या परेशानियां से छुटकारा पाने के लिए आईं थीं। पास्टर दावा कर रहे थे कि यहां आने और पवित्र जल ग्रहण करने से हर रोग, परेशानी से मुक्ति मिलेगी।

कष्टों के लिए प्रार्थना कराने आवेदन फॉर्म

रविवार को चांपा के भोजपुर स्थित डायोसिस चर्च ऑफ गॉड में जब हमने बताया कि पहली बार अपनी परेशानी से छुटकारा पाने चर्च आए हैं तो हमें प्रार्थना निवेदन प्रपत्र भरने के लिए दिया गया। नाम,पता,आधार व मोबाइल नंबर के साथ एक कॉलम में प्रार्थना किस लिए करना है, डिटेल में निवेदन भरकर मांगा गया।

आरक्षण का लाभ पाने नाम, सरनेम नहीं बदल रहे

सरकार को धर्मांतरण का सही आंकड़ा न मिल सके और आरक्षण का लाभ मिलता रहे इसलिए मिशनरी ने अब नाम, सरनेम बदलने की बाध्यता समाप्त कर दी है। अब धर्म बदलने के बाद रजनी से रोजी या जयेश से जॉन नहीं लिख रहे हैं। पास्टर भी ऐसा कर रहे हैं। हमने ऐसे कई हिंदू नाम वाले पास्टर्स को खोजा।

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