बिलासपुर18 घंटे पहले
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कांस्टेबल की मौत की मजिस्ट्रियल जांच होगी। (फाइल फोटो)
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में श्रीराम केयर अस्पताल में कॉन्स्टेबल की मौत की अब मजिस्ट्रियल जांच होगी। परिजनों के विरोध-प्रदर्शन और हंगामे के बाद जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है। सिम्स के चार डॉक्टरों की टीम ने शव का पोस्टमार्टम किया है, जिसकी वीडियोग्राफी भी कराई गई है।
अब प्रशासन के साथ ही परिजन को पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है। हालांकि इस मामले में परिजनों का कहना है कि पथरी के इलाज में लापरवाही हुई है, जबकि अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि कॉन्स्टेबल की मौत की लापरवाही से नहीं, हार्ट अटैक से हुई है।
दरअसल, मस्तूरी थाना क्षेत्र के ग्राम एरमशाही निवासी सत्यकुमार पाटले (36) पुलिस विभाग में आरक्षक थे। उनकी पोस्टिंग सरकंडा थाने में थी। 26 अप्रैल को उनके पेट में अचानक असहनीय दर्द हुआ, जिसके बाद वे इलाज के लिए नेहरू नगर स्थित श्रीराम केयर अस्पताल पहुंचे।
जांच के बाद डॉक्टरों ने पथरी की समस्या बताई और ऑपरेशन कराने की सलाह दी।

पेट में दर्द के बाद आरक्षण को श्रीराम केयर अस्पताल में एडमिट किया गया था।
ऑपरेशन के बाद कॉन्स्टेबल की मौत, परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप
परिजनों का आरोप है कि श्रीराम केयर अस्पताल में बिना चीरा लगाए सत्यकुमार का ऑपरेशन किया गया था। ऑपरेशन के अगले दिन तक वह बिल्कुल ठीक था, लेकिन अचानक शाम को उसकी तबीयत बिगड़ गई। आरोप है कि करीब 4 घंटे तक कोई विशेषज्ञ डॉक्टर उसे देखने नहीं आया। समय पर इलाज न मिलने के कारण उसकी हालत गंभीर हो गई और शुक्रवार दोपहर उसकी मौत हो गई।
घटना की जानकारी मिलते ही परिजन आक्रोशित हो गए और अस्पताल परिसर में हंगामा शुरू कर दिया, जिससे तनाव की स्थिति बन गई। हालात को देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस बल और अधिकारी मौके पर पहुंचे। वहीं, अस्पताल संचालक डॉ. अमित सोनी ने मरीज की मौत हार्ट अटैक से होने का दावा किया।

जांच के बाद डॉक्टरों ने कॉन्स्टेबल को पथरी की समस्या बताई और ऑपरेशन कराने की सलाह दी।
अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टर पर FIR की मांग
इस दौरान परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टर पर लापरवाही बतरने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि समय रहते उसे दूसरे अस्पताल में शिफ्ट कर देते तो उसकी जान नहीं जाती। वहीं पुलिस अफसरों ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया, तब जाकर परिजन शांत हुए। फिर भी परिजन अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टर के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग पर अड़े रहे।
मजिस्ट्रियल जांच के आदेश, 4 डॉक्टरों की टीम ने किया पीएम
शनिवार को आरक्षक की मौत को संदेहास्पद बताते हुए परिजन ने न्याय की मांग करते हुए हास्पिटल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। इस दौरान प्रशासन ने पहले जिला चिकित्सालय में पोस्टमार्टम कराने की बात कही, लेकिन वहां चार डाक्टरों की टीम गठित न हो पाने के कारण पेंच फंस गया।
इसके बाद में सिम्स में चर्चा के बाद अधीक्षक लखन सिंह ने चार सदस्यीय विशेषज्ञ टीम गठित की। वहीं आरक्षक की मौत किन कारणों से हुई, चिकित्सकों की लापरवाही या गलत दवा देने से तो कही आरक्षक की मौत हो नहीं हुई।
इसकी जांच के लिए जिला प्रशासन ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए। शाम करीब 5 बजे चार डॉक्टरों की टीम ने आरक्षक के शव का पोस्टमार्टम किया।

परिजन अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टर के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग पर अड़े रहे।
कार्यपालिक मजिस्ट्रेट ने शुरू की जांच
मजिस्ट्रीयल जांच के लिए कार्यपालिक मजिस्ट्रेट और नायब तहसीलदार आकाश गुप्ता खुद मौके पर पहुंचे और हास्पिटल स्टाफ से पूछताछ की। प्रशासन ने यह कदम इसलिए उठाया है, ताकि जांच निष्पक्ष हो और किसी भी बड़े रसूख का प्रभाव न पड़े।
जांच टीम इस बात पर फोकस कर रही है कि जब आरक्षक की हालत बिगड़ी, तो उस वक्त ड्यूटी पर कौन से डाक्टर थे और उन्होंने क्या उपचार किया।
मजिस्ट्रेट और परिजन को पीएम रिपोर्ट का इंतजार
आरक्षक के परिजन का कहना है कि अस्पलात प्रबंधन से उनका विश्वास पूरी तरह उठ चुका है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि बड़ी चूक है। परिजन के साथ ही अब कार्यपालिक मजिस्ट्रेट को शव के पीएम रिपोर्ट का इंतजार है।
माना जा रहा है कि सोमवार को सिम्स के डॉक्टर पीएम रिपोर्ट दे सकते हैं, जिसके आधार पर आगे की जांच होगी।

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