बीजापुर जिले के धरमा और बरपोली गांव की करीब 120 एकड़ जमीन को लेकर चल रहे विवाद पर अब कांग्रेस ने जांच कमिटी बनाई है। पार्टी ने इस पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए नौ सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। इस समिति की अगुवाई पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष
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कांग्रेस की जांच कमिटी
कौन कौन हैं समिति में
इस समिति में संतराम नेताम के अलावा बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी, पूर्व विधायक राजमन बेंजाम, छबिंद्र कर्मा, हरीश कवासी, नीना रावतिया, शंकर कुडियाम, लालू राठौर और लच्छू राम मौर्य को शामिल किया गया है। कांग्रेस का कहना है कि यह टीम निष्पक्ष जांच करेगी ताकि आदिवासियों की जमीन से जुड़ा यह विवाद पूरी तरह से स्पष्ट हो सके।
क्या है पूरा मामला
दरअसल मामला पांच आदिवासी परिवारों की लगभग 109 एकड़ जमीन से जुड़ा है, जिस पर अवैध कब्जे का आरोप लगाया गया है। यह जमीन अबूझमाड़ क्षेत्र से सटे ग्राम धर्मा, बैल, छोटेपल्ली और मरकापाल की बताई जा रही है। इन गांवों के आदिवासी सलवा जुडुम आंदोलन के दौरान राहत शिविरों में रह रहे थे। इस अवधि में, जब वे अपने गांवों से दूर थे, तभी कथित तौर पर उनकी पैतृक जमीन को चोरी-छिपे बेच दिया गया। ग्रामीणों को इस बात की जानकारी तब मिली जब वे अपने गांव वापस लौटने की तैयारी कर रहे थे।
जिन परिवारों की जमीन पर कब्जे का मामला सामने आया है, उनमें चेतन नाग (ग्राम धर्मा, 12 एकड़), घस्सू राम (ग्राम बैल, 29 एकड़), पीला राम (ग्राम बैल, 18 एकड़), लेदरी सेठिया (ग्राम छोटेपल्ली, 40 एकड़) और बीरबल (ग्राम मरकापाल, 10 एकड़) शामिल हैं। बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी ने कुछ दिन पहले प्रेस कांफ्रेंस कर इस मुद्दे को उठाते हुए भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे। उनका कहना था कि प्रदेश में जल, जंगल और जमीन की लूट बढ़ती जा रही है और उद्योगपतियों की नजर अब बस्तर की उपजाऊ जमीनों पर है।
मंडावी ने सरकार के सामने चार प्रमुख मांगें रखी थी, जिसमें जमीन की खरीद और बिक्री की उच्च स्तरीय जांच समिति बनाना, प्रभावित परिवारों को उनकी जमीन वापस करना, धोखाधड़ी में शामिल लोगों पर कड़ी कार्रवाई करना और आदिवासी इलाकों में भूमि हस्तांतरण पर सख्त निगरानी रखे जाने जैसी मांगें शामिल है। कांग्रेस की नई समिति अब इन सभी पहलुओं की जांच कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिससे यह तय हो सके कि आखिर जमीन पर कब्जे की सच्चाई क्या है और जिम्मेदारी किसकी है।
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