खांसी की दवा कोल्ड्रिफ सिरप के चल रहे मामले के बीच शुक्रवार को भास्कर टीम पहली बार स्टेट ड्रग टेस्ट लैब पहुंची। इस पड़ताल के दौरान कई हैरान करने वाली जानकारी मिली। कोल्ड्रिफ सिरप में जिस घातक केमिकल डायएथिलीन ग्लाइकोल यानी डीईजी मिला है। प्रदेश में
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पड़ताल में पता चला है कि दवा या सिरप में जिस मशीन गैस क्रोमोटोग्राफी से घातक केमिकल और अन्य घटकों की जांच होती है। स्टेट लैब की यह मशीन करीब दो माह से बंद है। हालांकि इसी लैब में सिरप से जुड़े बाकी टेस्ट लगातार हो रहे हैं।
बता दें कि जो मशीन बंद है वो किसी भी दवा या सिरप से उसके घटकों को अलग-अलग करती है। प्रदेश में बिक रहे कफ सिरप में डाएथिलीन ग्लाइकोल या इसके जैसे घातक रसायन हैं या नहीं, इसकी जांच इसी मशीन के जरिए होती है। यही नहीं, दवा के घटकों को अलग-अलग करने के लिए इस मशीन में इस्तेमाल होने वाले कॉलम भी फिलहाल नहीं है।
प्रदेशभर में जांच, अब तक 60 से ज्यादा सैंपल लैब पहुंचे
भास्कर की पड़ताल में पता चला है कि स्टेट ड्रग टेस्टिंग लैब में एक दर्जन तरह से ज्यादा मशीनें हैं। लंबे समय से स्टेट लैब तकनीकी स्टॉफ की कमी से जूझ रही है। यहां फिलहाल 2 एनालिस्ट और 3 लैब अटेंडेंट ही है। कोल्ड्रिफ सिरप मामले में 6 अक्टूबर से शुरू हुई प्रदेशव्यापी जांच में अब तक 50 से 60 से ज्यादा सैंपल लिए जा चुके हैं। जिलों से सैंपल डाक के जरिए भेजे जा रहे हैं।
आने वाले दिनों में इनकी तादाद और बढ़ सकती है। इसके चलते स्टॉफ को 10 से 12 घंटे तक लगातार काम करना पड़ रहा है। पड़ताल में ये भी पता चला है कि एक सिरप की जांच की रिपोर्ट और एनालिसिस होने में औसतन 3 से 5 दिन तक का वक्त लग सकता है।
दवा में मिलावट: धीमी जांच, सात साल में 62 मामलों में कार्रवाई पिछले 7 साल में 932 से ज्यादा प्रकरण कोर्ट में पहुंचे। इनमें 62 मामलों में 3 साल की सजा आर्थिक दंड जैसी कार्रवाई हुई।
रायपुर में स्थित स्टेट ड्रग टेस्टिंग लैब
- मशीन जल्द शुरू होगी, कॉलम भी बुलाए जा रहे: इस दौरान अफसरों ने बताया कि गैस क्रोमोटोग्राफी मशीन जल्द चालू हो जाएगी। इस मशीन में प्रयोग आने वाले कॉलम भी बुलवाए जा रहे हैं।
- पड़ताल में पता चला है कि अभी जो सैंपल मिल रहे हैं, उनमें विभिन्न मशीनों के जरिए अलग-अलग टेस्ट लगाए जा रहे हैं। घातक कैमिकल की घालमेल जैसी जांच भी मशीन के चालू होते ही होने लगेगी।

लैब में 600 सैंपल पेंडिंग पड़ताल में ये भी पता चला है कि प्रदेश में 2024-25 के बीच अभी तक विभिन्न दवाओं के जो करीब 12 सौ से ज्यादा सैपल लिए गए हैं। इनमें से करीब 600 सैंपल की जांच रिपोर्ट पेडिंग हैं। ऐसा यहां तकनीकी स्टॉफ की कमी के चलते भी हो रहा है। इसकी वजह से प्रदेश की दवाओं के सैंपल अन्य राज्यों की संबद्ध लैब में भेजना पड़ता है।
हालांकि ड्रग विभाग जल्द ही नवा रायपुर में करीब 40 करोड़ की लागत से एडवांस लैब बनाने जा रहा है, जिसके चालू होने के बाद हमारे राज्य में ही दवाओं की अत्याधुनिक मशीनों से जांच हो सकेगी।
दवा में मिलावट पर सख्त कार्रवाई की जा रही है। जिलों में लगातार सैंपल लिए जा रहे हैं। टेस्ट में जिन भी सिरप या दवा में मिलावट पाई जाएगी, कड़ी कार्रवाई करेंगे। मशीनों के मेंटेनेंस के लिए प्रस्ताव बनाया गया है। टेस्ट में किसी तरह की कोई बाधा नहीं आएगी। -दीपक अग्रवाल, आईएएस, ड्रग कंट्रोलर
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