छत्तीसगढ़

भारी बारिश और बाढ़ से 571 गांवों के 22377 लोग प्रभावित, 16074 को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया

प्रदेश में भारी बारिश और बाढ़ से 571 गांवों के 22377 लोग प्रभावित हुए हैं। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और जिला प्रशासन की टीमों ने अब तक 16074 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। गंगरेल डैम के 14 गेट खोले जाने के बाद महानदी और खारुन नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी से प्रदेश के कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं।

जांजगीर-चांपा के शिवरीनारायण में रविवार दोपहर तक महानदी का पानी पुल से करीब छह फीट ऊपर बहता रहा। शाम तक जलस्तर घटकर पुल से करीब तीन फीट ऊपर रह गया। गिधौरी, केरा, देवरी, तनौद और नगर पंचायत खरौद भी प्रभावित हुए हैं। वहीं रायपुर में खारुन नदी से लगे इलाकों के कई घर अब भी 3 से 4 फीट पानी में डूबे हैं। बस्तर में कुछ लोगों को एयरलिफ्ट किया गया।

महानदी के उफान का असर सीमावर्ती गिधौरी क्षेत्र में भी रहा। यहां कई परिवारों ने सुरक्षा के लिए रात छत पर बिताई। तनौद में 26 सितंबर की शाम से ही जिला प्रशासन ने जलभराव वाले इलाकों को खाली करवाना शुरू कर दिया था। रात में जलस्तर और बढ़ गया। सरकारी स्कूल समेत गांव का एक मोहल्ला पानी में डूब गया।

प्रदेश में प्रभावित क्षेत्रों में 173 राहत शिविर बनाए गए, जहां 17540 लोगों को आश्रय दिया गया। शिविरों में भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य जांच और दवाइयों की व्यवस्था है। बाढ़ से अब तक 8 लोगों और 172 मवेशियों की मौत की सूचना है। राजस्व अमला नुकसान का सर्वे कर रहा है। पात्र परिवारों को आर्थिक सहायता दी जाएगी।

बाढ़ प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। राजस्व विभाग ने राहत शिविरों में पटवारियों की ड्यूटी लगाई है। वे प्रभावित परिवारों की जानकारी दर्ज कर रहे हैं, जिसके आधार पर मुआवजा दिया जाएगा। महानदी के गिधौरी क्षेत्र में 4 फीट तक पानी है और सड़कों पर नाव चल रही हैं।

रायपुर में दूसरे दिन भी राहत जारी रही और खारुन पुल शुरू हो गया। खारुन नदी से लगे चंदनीडीह के श्रीलंका नगर, सरोना के डिपरापारा और शक्ति घाट के घर रविवार को भी 3 से 4 फीट पानी में डूबे रहे। महादेवघाट में रायपुर से अमलेश्वर को जोड़ने वाला पुल चालू हो गया है। शनिवार को बाढ़ प्रभावित लोगों को रेस्क्यू कर अलग-अलग इलाकों के स्कूलों में बनाए गए राहत शिविरों में पहुंचाया गया था। रविवार सुबह कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह और निगम आयुक्त संबित मिश्रा ने महादेवघाट विसर्जन स्थल, चंदनीडीह और सरोना का जायजा लिया। उन्होंने प्रभावितों को जरूरी सामग्री उपलब्ध कराने के साथ पर्याप्त दवाएं, सफाई और बिजली जैसी सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बस्तर और बीजापुर के दुर्गम इलाकों में फंसे लोगों को निकालने के लिए हेलीकॉप्टर की मदद भी ली गई। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राहत-बचाव कार्यों की लगातार निगरानी और प्रभावितों को समय पर सहायता देने के निर्देश दिए हैं।

रायगढ़ में महानदी में पानी बढ़ने से पुसौर ब्लॉक के 12 गांव प्रभावित हुए हैं। सूरजगढ़, चंघोरी और परसापाली में कई घरों में पानी घुस गया। अकेले सूरजगढ़ में 124 घर प्रभावित हुए हैं। शनिवार रात जलस्तर तेजी से बढ़ा और रविवार सुबह बस्तियों व घरों में पानी घुसना शुरू हुआ। पोरथ गांव का प्रसिद्ध मंदिर भी जलमग्न हो गया। हालात बिगड़ने पर प्रशासन ने सूरजगढ़, चंघोरी और परसापाली के ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर भेजना शुरू किया। राहत और बचाव के लिए महानदी के दोनों छोर पर गोताखोरों की टीमें बोट और लाइफ जैकेट के साथ तैनात हैं।

पुसौर क्षेत्र में 2 हजार एकड़ से अधिक फसल जलमग्न है। इनमें सूरजगढ़ की 400, पड़िगांव की 300 और नवापाली की 100 एकड़ फसल शामिल है। कृषि विभाग के अनुसार यदि खेतों में तीन दिन तक पानी भरा रहा तो फसलों को भारी नुकसान हो सकता है।

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