बलौदाबाजार: शराब पीकर स्कूल आने और छात्राओं से गाली-गलौज के आरोप में शिक्षक पर कार्रवाई की तैयारी, प्रिंसिपल हटाई गईं


छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार में पंडित चक्रपाणी मल्टीपरपज स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम स्कूल में तैनात व्याख्याता नरेश तिवारी पर गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि वे शराब के नशे में स्कूल पहुंचे और छात्राओं के साथ गाली-गलौज तथा बदसलूकी की। विरोध करने पर उनके साथ मारपीट करने का भी आरोप है। शिक्षक 11वीं और 12वीं के छात्रों को साइंस पढ़ाते हैं। घटना करीब एक सप्ताह पहले की बताई जा रही है।
छात्रों और परिजनों का आरोप है कि शिक्षक के व्यवहार से परेशान होकर उन्होंने प्रिंसिपल से शिकायत की। छात्रों का कहना है कि शिकायत करने की बात कहने पर शिक्षक ने उन्हें फेल करने की धमकी दी। इसके बाद बच्चे अपने परिजनों के साथ प्रिंसिपल के पास पहुंचे। शिक्षक पर पहले भी शराब पीकर स्कूल आने के आरोप लगाए जाने की बात सामने आई है।
इसी दौरान कवरेज के लिए पहुंचे मीडियाकर्मियों के साथ प्रिंसिपल का विवाद हो गया। प्रिंसिपल ने मीडियाकर्मियों को अपने केबिन से बाहर जाने के लिए कहा। इस दौरान एक छात्र प्रिंसिपल और मीडियाकर्मियों के बीच हो रही बातचीत का वीडियो बना रहा था। प्रिंसिपल ने छात्र को वीडियो बनाने से मना किया और कहा, ‘दिस इज माय ऑर्डर।’ छात्र के वीडियो बनाते रहने पर प्रिंसिपल ने उसे जोरदार तमाचा जड़ दिया।
मामला सामने आने के बाद कार्रवाई करते हुए प्रिंसिपल वंदनी श्रीवास्तव को पद से हटा दिया गया है। उनकी जगह सीनियर व्याख्याता निर्मला साहू को प्रभारी प्राचार्य की जिम्मेदारी दी गई है। शराब पीकर स्कूल आने वाले शिक्षक नरेश तिवारी पर भी कार्रवाई की तैयारी है। मेडिकल रिपोर्ट में अल्कोहल की मात्रा पाए जाने के बाद उनके निलंबन का प्रस्ताव शिक्षा संचालनालय को भेजा गया है।
मामले की शिकायत प्रशासन तक पहुंचने के बाद कलेक्टर के निर्देश पर प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी, विकासखंड शिक्षा अधिकारी और तहसीलदार स्कूल पहुंचे। अधिकारियों ने विद्यार्थियों, परिजनों, स्कूल प्रबंधन और संबंधित शिक्षक से घटना के बारे में जानकारी ली। अधिकारियों की जांच के बाद पुलिस शिक्षक नरेश तिवारी को मुलाहिजा के लिए अपने साथ ले गई। जिला शिक्षा अधिकारी ने इस मामले में कार्रवाई की बात कही है।
मीडियाकर्मियों ने प्रिंसिपल पर बदसलूकी करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि उन्हें केबिन से बाहर जाने के लिए कहा गया और स्कूल परिसर में मीडिया के प्रवेश पर रोक की बात कही गई। इस दौरान प्रिंसिपल और मीडियाकर्मियों के बीच तीखी बहस भी हुई। पत्रकारों का कहना है कि स्कूल परिसर में मीडिया के प्रवेश पर रोक से संबंधित कोई लिखित आदेश या नियम उन्हें मौके पर नहीं दिखाया गया। प्रिंसिपल के व्यवहार के विरोध में मीडियाकर्मी स्कूल के सामने धरने पर बैठ गए थे।



