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Home » Are you happy with the work of your ministers? | अपने मंत्रियों के काम से आप खुश हैं क्या?: साय- मंत्री अपनी-अपनी क्षमता से काम कर रहे हैं, बदलाव की जरूरत नहीं – Raipur News
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Are you happy with the work of your ministers? | अपने मंत्रियों के काम से आप खुश हैं क्या?: साय- मंत्री अपनी-अपनी क्षमता से काम कर रहे हैं, बदलाव की जरूरत नहीं – Raipur News

By adminDecember 13, 2025No Comments6 Mins Read
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छत्तीसगढ़ एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है, जहां नक्सलवाद लगभग समाप्ति की कगार पर है और राज्य अपनी नई पहचान गढ़ने की तैयारी में है। यह बात विष्णुदेव साय ने मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के दो साल पूरे होने के मौके पर कही।

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उनका कहना है, अब विकास की असली रफ्तार शुरू होगी, क्योंकि सबसे बड़ी बाधा हट चुकी है। ऊर्जा उत्पादन, खनिज संपदा, IT इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यटन, इन चारों को छत्तीसगढ़ अगले दशक का ग्रोथ इंजन मान रहा है। जहां तक मंत्रिमंडल का सवाल है, तो कैबिनेट के सभी साथी अपनी क्षमता से काम कर रहे हैं।

महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त करने वाली योजनाएं, किसानों के लिए आदर्श मॉडल माने जाने वाले निर्णय और जनहित के विपरीत फैसलों को वापस लेने की सरकार की तत्परता, ये सब मिलकर राज्य की नई नीति-फिलॉसफी को दर्शाते हैं। साय ने दैनिक भास्कर के राज्य संपादक शिव दुबे और स्थानीय संपादक हर्ष पांडेय के साथ कई मसलों पर बात की। पेश हैं संपादित अंश..

क्या यह मानें कि छत्तीसगढ़ केवल बस्तर तक सीमित नहीं है और अब विकास की रफ्तार कई गुना बढ़ने वाली है? सीएम साय- दशकों तक देश में छत्तीसगढ़ की पहचान नक्सल प्रभावित प्रदेश के रूप में रही। मानो रायपुर के आगे बढ़ते ही संघर्ष शुरू हो जाता था। हमारे जवान लगातार लड़ते रहे, लेकिन बीते दो वर्षों में हालात निर्णायक तौर पर बदले हैं। डबल इंजन की सरकार का लाभ मिला, केंद्रीय गृह मंत्री लगातार समीक्षा कर रहे हैं। नक्सलवाद पर डेडलाइन तय की गई।

यह सामान्य बात नहीं है। पहले पांच वर्षों में जिस तरह लड़ाई लड़ी जानी चाहिए थी, वैसा नहीं हुआ। अब रणनीति बदलने, टास्क फोर्स बनाने और स्थानीय युवाओं की भर्ती के बाद निर्णायक सफलता मिल रही है। नक्सलवाद अब समापन की ओर है और यही विकास की सबसे बड़ी बाधा थी।

क्या माना जाए कि नक्सल खात्मे के मामले में अब तक राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी रही? – इच्छाशक्ति आज स्पष्ट दिख रही है। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने स्थिति को देखते हुए लक्ष्य तय किया। नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करना है। इसे लेकर जो सख्त फैसले हुए, वे पहले कभी नहीं हुए थे।

नक्सलवाद खत्म होने से बस्तर का पर्यटन क्या नई छलांग लगाएगा? अभी पर्यटन में छत्तीसगढ़ अपेक्षाकृत पीछे क्यों है? -छत्तीसगढ़ में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। कुटुमसर गुफाएं, घने वन, सरगुजा-बस्तर की अनूठी संस्कृति। नई औद्योगिक नीति में पहली बार पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया गया है। बस्तर में होम स्टे मॉडल से स्थानीय लोगों को सीधा आर्थिक लाभ मिल रहा है। मकान निर्माण के लिए ऋण सुविधा भी दी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय पर्यटन संस्थानों की सूची में भी छत्तीसगढ़ की उपस्थिति तेजी से बढ़ रही है। हमारा फोकस यही है कि पर्यटन को प्रदेश के विकास का मजबूत स्तंभ बनाया।

अपने मंत्रियों के काम से आप खुश हैं क्या? – अपनी-अपनी क्षमता से सब काम कर रहे हैं। सब जमीन से उठकर ऊपर आए हैं। सबका अपना अनुभव है। उसके अनुरूप वे काम कर रहे हैं।

गुजरात में कैबिनेट में बदलाव हुआ, क्या छत्तीसगढ़ में मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा के बाद फेरबदल की संभावना है? -सरकार अच्छी चल रही है। ऐसा मुझे नहीं लगता कि यहां फेरबदल की जरूरत है।

आपके अनुसार छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी पहचान क्या होनी चाहिए? -छत्तीसगढ़ देश का ऊर्जा केंद्र है। हम अभी देश में बिजली उत्पादन में दूसरे स्थान पर हैं और जल्द ही नंबर वन होंगे। नई औद्योगिक नीति के बाद ऊर्जा क्षेत्र में लगभग 3.5 लाख करोड़ का निवेश प्रस्तावित है। इनमें थर्मल, हाइड्रो, पंप स्टोरेज और सोलर सभी शामिल हैं। इसके साथ ही यहां लौह अयस्क, कोयला, बॉक्साइट, टिन और लीथियम जैसी समृद्ध खनिज संपदा है। राज्य स्वाभाविक रूप से एनर्जी व मिनरल हब के रूप में उभर रहा है।

इतनी खनिज संपदा और बिजली के बावजूद इंडस्ट्रियल ग्रोथ उतनी तेज क्यों नहीं रही? – नई औद्योगिक नीति के बाद तस्वीर बदल चुकी है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, अहमदाबाद से लेकर कोरिया और जापान तक, हर जगह निवेशकों ने नीति की सराहना की है। कई बड़े प्रोजेक्ट जमीन पर उतर चुके हैं। अल्युमिनियम कंडक्टर प्लांट, AI बेस्ड डेटा सेंटर आदि। आने वाले डेढ़ वर्ष में इसका प्रभाव स्पष्ट दिखेगा।

माइक्रोसॉफ्ट भारत में 17 बिलियन डॉलर का निवेश कर रहा है। क्या नवा रायपुर को IT हब बनाने की कोई योजना है? -बिल्कुल। लगभग 8 लाख करोड़ के निवेश प्रस्तावों में IT सेक्टर भी प्रमुख है। नवा रायपुर को IT व डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर हब के रूप में विकसित करने की तैयारी है। हमारी प्राथमिकता है कि बड़ी कंपनियां यहां आएं और युवाओं को नई नौकरियां मिलें।

धान खरीदी में छत्तीसगढ़ को ‘आदर्श मॉडल’ माना जाता है, लेकिन तस्करी और सिस्टम की खामियां लगातार सामने आती हैं। इसे और सुचारू कैसे बनाया जाएगा? -पूरे देश में किसानों को सर्वाधिक मूल्य छत्तीसगढ़ देता है, यह हमारे लिए गर्व की बात है। यही कारण है कि पड़ोसी राज्यों से तस्करी की कोशिशें होती हैं। सिस्टम को और मजबूत बनाने के लिए लगातार संशोधन किए जा रहे हैं। साथ ही हम दलहन-तिलहन के लिए प्रोत्साहन राशि दे रहे हैं, पशुपालन और मत्स्य पालन को बढ़ावा दे रहे हैं, और फॉरेस्ट प्रोड्यूस में वैल्यू एडिशन पर काम कर रहे हैं। इससे किसान केवल धान पर निर्भर नहीं रहेंगे।

क्या आपको लगता है कि बिजली बिल हाफ स्कीम खत्म करने या जमीन की गाइडलाइन जैसे फैसले जल्दबाजी में ले लिए गए? – बिजली बिल हाफ संबंधी फैसला लोगों को मुफ्त बिजली की ओर ले जाने के लिए था। पीएम सूर्य घर योजना की समीक्षा में हम खुद को पीछे पाते थे। यह मुफ्त बिजली देने की योजना है, क्योंकि तीन चौथाई सब्सिडी खुद सरकार दे रही है। हमने हर जिले में सूर्य-रथ भेजे, फायदे गिनाए और आज इसके बेहतर नतीजे सामने हैं। लोग सोलर बिजली की ओर रुख करने लगे हैं। जमीन की गाइडलाइन का निर्धारण किसानों और मध्यम वर्गीय परिवारों को केंद्र में रखकर किया गया था।

अगर फैसला जनहित के विपरीत हो तो इसे वापस लेने के लिए सरकार तैयार रहेगी? – बिलकुल। लोकतांत्रिक व्यवस्था है। कोई भी निर्णय अगर जनहित के विपरीत होगा तो उसे वापस लेने में हम कतई नहीं हिचकिचाएंगे, क्योंकि सरकार के लिए जनहित सर्वोपरि है।

दो साल के कार्यकाल में ऐसा कौन-सा फैसला है जो टर्निंग पॉइंट साबित हुआ?

-मोदी की गारंटी के अंतर्गत कई फैसले हुए, लेकिन महतारी वंदन योजना सबसे बड़ा सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन लाने वाली पहल है। हर महीने महिलाओं के खाते में ₹1000 सीधे भेजे जा रहे हैं। इससे महिलाओं में आत्मविश्वास और आर्थिक स्वतंत्रता दोनों बढ़ी है। गांवों में छोटी उद्यमशीलता गतिविधियां शुरू हुई हैं। यह बदलाव निचले स्तर पर दिखाई देता है।



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