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शासकीय टीसीएल पीजी कॉलेज, जांजगीर में आईक्यूएसी, कंप्यूटर एप्लीकेशन, कंप्यूटर साइंस और गणित विभाग के संयुक्त तत्वावधान में “शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का तात्पर्य और प्रभाव” विषय पर एकदिवसीय व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. कोमल शुक्ला ने किया और आयोजन प्राचार्य डॉ. डीआर लहरे के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. डॉ. एमएल पाटले ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता केवल तकनीकी नवाचार नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग और शोध जैसे क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव ला रही है। उन्होंने बताया कि एआई आधारित टूल्स विद्यार्थियों की सीखने की शैली को पहचानकर व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं। प्रो. डॉ. एसके मधुकर ने शिक्षा में एआई के प्रयोग को अध्ययन और शोध की गुणवत्ता सुधारने में उपयोगी बताया। ग्रंथपाल ओपी सिंह ने बताया कि एआई का प्रयोग ई-लाइब्रेरी प्रबंधन, सूचना खोज, डेटा विश्लेषण, साइबर सुरक्षा और स्मार्ट सिटी जैसे क्षेत्रों में हो रहा है।
डॉ. सीमा देवांगन ने बताया कि शिक्षा में स्मार्ट कंटेंट, वर्चुअल क्लासरूम, चैटबॉट, असाइनमेंट मूल्यांकन और शोध विश्लेषण में एआई की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने एआई के नैतिक पहलुओं और संभावित दुरुपयोग पर भी प्रकाश डाला। समाजशास्त्र विभाग के प्रो. राजेश दुबे ने एआई के सामाजिक प्रभावों पर चर्चा करते हुए इसके सतर्क और संतुलित उपयोग की बात कही। प्रो. आरजी खूंटे ने एआई के इतिहास और भविष्य में इसके रोजगार व शोध में बढ़ते योगदान को रेखांकित किया। मुस्कान साहू ने एआई के अवसरों और उससे जुड़ी चुनौतियों की संतुलित समझ विकसित करने की आवश्यकता बताई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और प्राध्यापक उपस्थित रहे।
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