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ग्राम तमोरा (सुर्रा) में आयोजित शिव महापुराण कथा के दौरान पंडित आकाश कृष्ण शास्त्री ने भगवान कार्तिकेय के जन्म, तारकासुर वध एवं भगवान गणेश के प्राकट्य से जुड़ी प्रेरणादायी कथा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि असुर तारकासुर को यह वरदान प्राप्त था कि उसका वध केवल भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र ही कर सकते हैं। तारकासुर के अत्याचार से त्रस्त देवताओं की रक्षा के लिए शिव-पार्वती के मिलन से उत्पन्न दिव्य तेज को अग्निदेव ने धारण कर माता गंगा में प्रवाहित किया।
यह तेज गंगा के माध्यम से छह कमल पुष्पों में प्रकट हुआ, जिनका पालन-पोषण छह कृतिकाओं से किया। इन छह बालकों को एकत्र करने पर एक दिव्य बालक का रूप बना, जिन्हें षडानन एवं कार्तिकेय कहा गया। देवताओं ने उन्हें अपना सेनापति नियुक्त किया और उन्होंने अपने जन्म के सातवें दिन ही तारकासुर का वध कर देवताओं को उसके अत्याचार से मुक्ति दिलाई।
कार्तिकेय के जन्म एवं तारकासुर वध के बाद माता पार्वती ने अपने शरीर के उबटन से भगवान गणेश को उत्पन्न किया। एक अन्य मान्यता के अनुसार कार्तिकेय के जन्म के बाद भी शिव के तेज को शांत करने एवं अपने मन को स्थिर करने के लिए पार्वती ने गणेश को जन्म दिया। सुशील साहू, अगर सिंह गंजीर, डिम्पल साहू, सुनील साहू, सुषमा साहू, बीआर शांडिल्य, कृष्णा साहू, सहिल पटेल, डोमार साहू, सुकदेव निषाद, बिसेसर साहू आदि मौजूद थे।
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