पंडित जवाहर लाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर के छात्रों को रहने की भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) रायपुर ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से मांग की है कि, हॉस्टल भवन का निर्माण पूरा होने तक छात्रों
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एसोसिएशन ने बताया कि, डॉ सिंह ने पूरे मामले पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। संभव है कि जल्द की समस्या का हल निकल जाएगा। दरअसल, 20 अगस्त को कॉलेज प्रबंधन ने नोटिफिकेशन जारी कर बताया था कि अब किराए के लिए बिल्डिंग तलाश रहा है। 200 छात्रों के लिए सर्वसुविधायुक्त बिल्डिंग के लिए 1 सितंबर तक प्रस्ताव भेजने को कहा गया है।

20 अगस्त को कॉलेज ने जारी किया था नोटिफिकेशन।
लेकिन ये मामला जमा नहीं। महीने भर से ज्यादा होने के बाद भर कोई बिल्डिंग अब तक मिली नहीं है। जिसके बाद छात्र ऑप्शनल व्यवस्था की मांग लेकर विधानसभा अध्यक्ष के पास पहुंचे थे। छात्रों ने सुझाव दिया है कि संगवारी भवन में 55 फ्लैट्स हैं। इनमें से सिर्फ 3 ही ऑक्यूपाइड हैं। बाकी लंबे समय से खाली हैं।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह से मुलाकात कर IMA ने अपना पक्ष रखा है।
ऐसे में 50 फ्लैट्स भी स्टूडेंट को अलॉट कर दिए जाएं तो समस्या का हल हो जाएगा। IMA रायपुर ने कहा है कि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो चिकित्सा छात्र असमान परिस्थितियों और स्लम जैसे माहौल में रहने को मजबूर हो जाएंगे। जो उनकी पढ़ाई को प्रभावित करेगा।

65 करोड़ की लागत से हो रहा हॉस्टल निर्माण
महाविद्यालय परिसर में करीब 65 करोड़ रुपए की लागत से नया छात्रावास निर्माणाधीन है, लेकिन इसका काम अब तक पूरा नहीं हो पाया है। जब तक यह भवन तैयार नहीं होता, तब तक छात्रों की कठिनाइयां बनी रहेंगी।
पहले भी कई बार उठी है मांग
कॉलेज की ओर से इससे पहले टैगोर नगर स्थित विधायक विश्राम गृह को हॉस्टल बनाने की योजना थी, लेकिन शासन ने मना कर दिया, क्योंकि ये विश्राम गृह कॉलेज से करीब 8 किमी दूर है। हॉस्टल नहीं होने से छात्र-छात्राओं को देवेंद्रनगर और आसपास स्थित मकानों में महंगे किराए में रहना पड़ेगा। ऐसे में अब ऑप्शनल व्यवस्था की जा रही है।
बॉन्ड का मामला भी उठा
मुलाकात के दाैरान मौजूद छात्रों ने पढ़ाई के लिए 25 और 50 लाख की संपत्ति गिरवी रखने के मामले में को डॉ सिंह के सामने रखा। दरअसल, इस मामले में अब तक शासन की ओर से कोई फैसला नहीं लिया गया है। छात्रों का कहना है कि कई लोगों की हैसियत इतनी बड़ी रकम की संपत्ति बंधक बनाने की नहीं है। अन्य राज्यों में ऐसा नियम नहीं है, यह छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा प्राप्त करने में बड़ी बाधा है।

छात्रों ने बैंक गारंटी के प्रावधान को चिकित्सा शिक्षा के नियम से हटाने की मांग की है। नियम के मुताबिक संपत्ति गिरवी रखने के कागजात जमा करने के बाद ही विभागीय स्तर पर उन्हें एनओसी मिलेगी। छात्रों का कहना है कि संपत्ति गिरवी रखने या बैंक में जमा करने की शर्त अत्यंत चुनौतीपूर्ण और अव्यवहारिक है।
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