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जिला न्यायालय परिसर शनिवार को कुछ अलग ही रंग में नजर आया। यहां टूटे रिश्ते जुड़े, वर्षों पुरानी दुश्मनी खत्म हुईं और बिखरे परिवार फिर एक हुए। मौका था नेशनल लोक अदालत का, जहां एक ही दिन में 31877 मामलों का समाधान हुआ और 39 करोड़ से अधिक रुपए के विवाद निपटाए गए।
सबसे चौंकाने वाला मामला 60-65 वर्षीय वृद्ध दंपती का रहा, जिनका भरण-पोषण विवाद पिछले 25 वर्षों से अदालत में लंबित था। उम्र, सामाजिक स्थिति और हालात को देखते हुए परिवार न्यायालय के पीठासीन अधिकारी की समझाइश के बाद दोनों ने एकमुश्त समाधान स्वीकार किया। अदालत कक्ष से निकलते समय उनके चेहरे पर जो सुकून था, वह वर्षों की थकान बयां कर रहा था। परिवार न्यायालय में पीठासीन अधिकारी लीलाधर सारथी की खंडपीठ ने 29 वैवाहिक प्रकरणों का निराकरण किया।
तीन साल की बैर एक हस्ताक्षर में खत्म नेशनल लोक अदालत में वर्ष 2022 में छट्ठी कार्यक्रम के दौरान हुए विवाद ने दो पड़ोसियों को अदालत तक पहुंचा दिया था। बात बढ़ती गई और मामला आपराधिक बन गया। लोक अदालत में न्यायिक मजिस्ट्रेट की समझाइश ने दोनों पक्षों को यह एहसास दिलाया कि कानूनी लड़ाई से बड़ा गांव का रिश्ता है। हस्ताक्षर होते ही तीन साल पुरानी दुश्मनी खत्म हो गई और गांव में फिर से सद्भाव लौट आया।
बिखरा परिवार जुड़ा, बच्चे को मिले माता और पिता परिवार न्यायालय में दहेज प्रताड़ना और भरण-पोषण से जुड़ा मामला लोक अदालत तक पहुंचा। समझाइश के दौरान पति-पत्नी ने एक-दूसरे की शिकायतें भुलाकर साथ रहने का फैसला किया। दो वर्षीय बच्चे को अदालत से बाहर निकलते समय माता-पिता दोनों का हाथ थामे देखा गया। लोक अदालत की सबसे भावुक तस्वीर रही। लोक अदालत परिवार को जोड़ने में अहम भूमिका निभाई।
यहां सिर्फ फैसले नहीं, समझौते कराए गए दंडात्मक फैसलों की बजाय संवाद और समाधान पर जोर रहा। जिले में गठित 12 खंडपीठों में एक ही दिन में 31,877 लंबित प्रकरणों का निराकरण कर 39 करोड़ 16 लाख 94 हजार 541 रुपए के विवाद सुलझाए गए। प्रधान जिला व सत्र न्यायाधीश सत्यभामा अजय दुबे की खंडपीठ में मोटर दुर्घटना दावा मामलों में 38.50 लाख रुपए की अवार्ड राशि पारित की गई। व्यवहार वाद में 8.24 लाख रुपए के आदेश दिए गए।
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