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प्रदेश की शिल्प नगरी के नाम से प्रसिद्ध कोंडागांव एक बार फिर अपनी कलात्मक पहचान से सुर्खियों में है। यहां के प्रसिद्ध शिल्प ग्राम भेलवांपदर के कुशल शिल्पी भूपेन्द्र बघेल और उनकी 10 सदस्यीय टीम ने मुंबई की कमानी कोटक कंपनी के लिए एक अनोखी 20 फीट लंबी बेल मेटल (कांसे की) नाव तैयार की है, जिसकी कीमत लगभग 20 लाख रुपये आंकी गई है। इस कलाकृति को तैयार करने में करीब दो माह का समय लगा। पूरी टीम ने दिन-रात मेहनत कर बारीकी से इस नाव में ग्रामीण जीवन और परंपरा की झलक को साकार किया है।
कंपनी की विशेष मांग के अनुसार इस नाव में यह दर्शाया गया है कि किस प्रकार ग्रामीण नदी पार करने के लिए नाव का उपयोग करते हैं एक तट से दूसरे तट तक यात्रा करते हुए उनके जीवन-यापन, संघर्ष और प्रकृति से जुड़ाव की झलक इसमें उकेरी गई है।
शिल्पी भूपेन्द्र बघेल ने बताया कि लगभग पांच वर्ष पूर्व मुंबई में आयोजित एक प्रदर्शनी में उनकी टीम की कलाकृतियां कमानी कोटक कंपनी मुंबई के प्रतिनिधियों ने देखी थीं और वे काफी प्रभावित हुए थे। उसी समय उन्होंने वादा किया था कि भविष्य में कोई विशेष प्रोजेक्ट उन्हें दिया जाएगा। इसी के तहत इस वर्ष कंपनी के अधिकारियों ने कोंडागांव आकर नाव बनाने का आदेश दिया। 15 सितंबर को यह विशेष कलाकृति पूरी तरह तैयार होने के बाद मुंबई भेजी गई। बताया जा रहा है कि यह नाव कंपनी के मुख्यालय में आर्ट इंस्टॉलेशन के रूप में प्रदर्शित की जाएगी, जिससे देशभर के लोग बस्तर की पारंपरिक धातु कला और शिल्प कौशल को देख सकेंगे।
भूपेन्द्र बघेल ने कहा हमारे लिए यह सिर्फ एक काम नहीं बल्कि गर्व की बात है कि बस्तर की कला अब देश के बड़े कॉर्पोरेट दफ्तरों में सजेगी। हमारी परंपरा और मेहनत को इतना बड़ा मंच मिलना पूरे कोंडागांव के लिए सम्मान की बात है। कोंडागांव की इस सफलता ने फिर साबित किया है कि बस्तर की पारंपरिक धातु कला आज भी अपनी मौलिकता और आकर्षण से दुनिया को प्रभावित कर रही है चाहे वह घरेलू साज-सज्जा की वस्तुएं हों या फिर लाखों रुपये की भव्य कलाकृतियां।
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