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67 लाख का फर्नीचर-घोटाला…पूर्व DMC समेत 2 गिरफ्तार:15 साल बाद ACB की कार्रवाई, स्कूलों में फर्नीचर पहुंचा नहीं, रिकॉर्ड में सप्लाई दिखाकर निकाली रकम




अविभाजित सरगुजा में वर्ष 2011-12 में हुए फर्नीचर घोटाले के मामले में ACB ने बुधवार को दो लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें सर्व शिक्षा अभियान के तत्कालीन जिला मिशन संचालक (DMC) और एक सप्लायर फर्म का संचालक शामिल हैं। सर्व शिक्षा अभियान के तहत करीब 2 करोड़ 70 लाख रुपए के फर्नीचर खरीदे गए थे। जांच में 67 लाख रुपए से ज्यादा की गड़बड़ी सामने आई है। इसी मामले में ACB ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया है। अब जानिए पूरा मामला जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2011-12 में राजीव गांधी शिक्षा मिशन को फर्नीचर खरीदने के लिए 2 करोड़ 70 लाख रुपए की राशि मिली थी। इस राशि से सरगुजा, बलरामपुर और सूरजपुर जिलों के मिडिल स्कूलों में फर्नीचर पहुंचाया जाना था। आरोप है कि कई दूरदराज के स्कूलों में फर्नीचर पहुंचाया ही नहीं गया। इसके बावजूद रिकॉर्ड में फर्नीचर की सप्लाई दिखाकर सरकारी राशि निकाल ली गई। फर्नीचर पहुंचा नहीं, पावती पर करा लिए हस्ताक्षर फर्नीचर खरीदी में गड़बड़ी की शिकायत ACB से की गई थी। इसके बाद ACB ने मामले की जांच शुरू की और स्कूलों से जरूरी दस्तावेज मंगवाए। जांच में कई स्कूलों ने बताया कि उनके यहां फर्नीचर पहुंचा ही नहीं था। इसके बावजूद फर्नीचर मिलने की पावती वाले दस्तावेजों पर स्कूल के कर्मचारियों से हस्ताक्षर करा लिए गए थे। ACB ने 15 वर्ष बाद की कार्रवाई इस मामले में वर्ष 2017 में FIR दर्ज कर जांच शुरू की गई थी। जांच में पता चला कि तत्कालीन कलेक्टर और जिला मिशन संचालक की मंजूरी के बाद सर्व शिक्षा अभियान के तहत पंजीकृत फर्मों को तय दर पर फर्नीचर खरीदने और सप्लाई करने का आदेश दिया गया था। जांच में मेसर्स दर्शन फेब्रिकेशन और आकृति प्रिंटिंग प्रेस के संचालक संजय पटेल की भूमिका सामने आई। आरोप है कि दर्शन फेब्रिकेशन ने बिना फर्नीचर सप्लाई किए ही बिल जमा कर दिए और सरकारी राशि का भुगतान ले लिया। इससे सरकार को 67 लाख 15 हजार 814 रुपए का नुकसान हुआ। जांच में तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक एसपी पांडेय के कमीशन लेने के भी सबूत मिले हैं। जांच के अनुसार, दर्शन फेब्रिकेशन ने वास्तव में फर्नीचर की सप्लाई नहीं की थी। मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और IPC की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया था। बुधवार को पुलिस ने तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक एसपी पांडेय और दर्शन फेब्रिकेशन के संचालक संजय पटेल को गिरफ्तार किया। दोनों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। इस तरह हुआ घोटाला फर्नीचर सप्लाई के लिए 10 फर्मों को वर्क ऑर्डर दिया गया था। सभी फर्मों को 20 दिनों के अंदर फर्नीचर पहुंचाना था। इनमें मेसर्स दर्शन फेब्रिकेटर्स रायपुर भी शामिल थी। आरोप है कि फर्नीचर सप्लाई से पहले ही सभी फर्मों को चेक जारी कर दिए गए थे। जांच में पता चला कि दर्शन फेब्रिकेटर्स रायपुर ने फर्नीचर की कोई सप्लाई नहीं की। इसके नाम से जारी चेक आकृति प्रिंटर्स के संचालक संजय पटेल को दिया गया। आरोप है कि संजय पटेल ने ओरिएंटल बैंक, अंबिकापुर में दर्शन फेब्रिकेटर्स के नाम से फर्जी खाता खुलवाया और चेक की रकम निकाल ली। जांच में यह भी सामने आया कि रकम निकालने के बाद उसका कुछ हिस्सा एसपी पांडेय को दिया गया। ACB ने जांच के दौरान 125 शिक्षकों के बयान दर्ज किए। फर्जी बैंक खाता खोलने के भी सबूत मिले। इसके बाद ACB ने एसपी पांडेय और संजय पटेल के खिलाफ कार्रवाई की। रायपुर से गिरफ्तार किए गए रिटायर्ड DMC ACB ने तत्कालीन DMC को रायपुर स्थित उनके घर से गिरफ्तार किया है। वह अब रिटायर हो चुके हैं। वहीं संजय पटेल को चोपड़ापारा स्थित आकृति प्रिंटिंग प्रेस से गिरफ्तार किया गया। ACB ने सर्व शिक्षा अभियान के लिपिक प्रवीण सिन्हा को भी पहचान और पूछताछ के लिए कार्यालय बुलाया था। पूछताछ के बाद शाम को उन्हें छोड़ दिया गया।



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