गणेशजी को सिंहासन से उतारकर खेत के पानी से नहलाया और जमीन पर बिठाया, ताकि बारिश हो

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बारिश कम होने से खेतों में पानी की कमी और किसानों की चिंता बढ़ने लगी है। ऐसे में जिले के कुआकोंडा परगना के 84 गांवों में बारिश के लिए सदियों पुरानी अनोखी परंपरा निभाई गई। शनिवार को गढ़पदर गांव के बाहर खुले आसमान के नीचे विराजमान प्राकृतिक गणेश प्रतिमा का विशेष पूजा-अनुष्ठान किया गया। क्षेत्र के 84 गांवों के पुजारी और गायताओं ने गढ़पदर पहुंचकर इस परंपरा में हिस्सा लिया। मान्यता के अनुसार, जब क्षेत्र में बारिश कम होती है, तो भगवान गणेश को उनके सिंहासन से उतारकर जमीन पर विराजमान किया जाता है। पूजा के दौरान खेतों से पानी लाकर भगवान गणेश को अर्पित किया गया। इसके बाद पुजारी ने गणेश प्रतिमा को सिर पर रखकर मंदिर की परिक्रमा की। फिर प्रतिमा को जमीन पर रख दिया। ग्रामीणों की मान्यता है कि भगवान गणेश के जमीन पर विराजमान होने के बाद बारिश होती है। अब यह प्रतिमा दीपावली के आसपास विशेष पूजा-अनुष्ठान के बाद दोबारा मंदिर में स्थापित की जाएगी। गढ़पदर में भगवान गणेश की यह प्राकृतिक मूर्ति गांव के बाहर खुले आसमान के नीचे वर्षों से विराजमान है। ग्रामीण इसे प्राचीनकाल की प्रतिमा मानते हैं। वे पीढ़ियों से इसकी पूजा करते आ रहे हैं। बारिश के लिए होने वाला यह अनुष्ठान केवल एक गांव तक सीमित नहीं है। यह कुआकोंडा परगना के 84 गांवों की सामूहिक परंपरा है। यही वजह है कि पूजा के दौरान बड़ी संख्या में पुजारी, गायताओं और ग्रामीणों की मौजूदगी रही। ग्रामीणों का कहना है कि खेती-किसानी पूरी तरह बारिश पर निर्भर है। समय पर पानी नहीं गिरने से खेतों में फसल प्रभावित होने की आशंका रहती है। ऐसे में परंपरागत पूजा-अनुष्ठान के जरिए ग्रामीण अपने आराध्य देवताओं से अच्छी बारिश की कामना करते हैं। पूजा के दौरान गांव की परंपराओं और रीति-रिवाजों का भी विशेष रूप से पालन किया गया। खेत का पानी चढ़ाकर जमीन पर विराजे गणेश गढ़पदर में शनिवार को हुए अनुष्ठान में खेतों से पानी लाकर भगवान गणेश को अर्पित किया गया। इसके बाद पुजारी ने प्रतिमा को सिर पर रखकर मंदिर की परिक्रमा की। फिर उसे जमीन पर विराजमान किया। ग्रामीणों की मान्यता है कि बारिश होने तक भगवान गणेश जमीन पर ही रहेंगे। दीपावली के आसपास फिर से पूजा-अनुष्ठान कर प्रतिमा को मंदिर के सिंहासन पर स्थापित किया जाएगा। इसके बाद भी बारिश नहीं हुई तो उदेला जाएंगे, भीमसेन को मनाएंगे गढ़पदर में पूजा-अनुष्ठान के बाद भी अगर बारिश नहीं होती, तो 84 गांवों के सैकड़ों ग्रामीण अब उदेला पहाड़ की ओर जाएंगे। यहां क्षेत्र के आराध्य भगवान भीमसेन की शिला की पूजा करने की परंपरा है। ग्रामीण राशन-पानी लेकर पहाड़ पर पहुंचेंगे। यहां भी भीमसेन की शिला को खेत के पानी और कीचड़ से नहलाया जाएगा। इसके बाद क्षेत्र के पुजारी करीब 5 फीट ऊंची शिला को हिलाने की परंपरा निभाएंगे।
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