बिलासपुर में झुग्गीवासियों को छोड़ना होगा रेलवे की जमीन:हाईकोर्ट बोला-45 दिन में खाली करें कब्जा, 7-दिनों के भीतर निगम जाएं हितग्राही, पात्र लोगों को मिलेगा पक्का-मकान

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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बिलासपुर के बापू नगर वार्ड क्रमांक 70 में रेलवे की जमीन पर कब्जा करने को लेकर सख्त रूख अपनाया है। जस्टिस एके प्रसाद ने कहा कि झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले परिवारों को रेलवे की जमीन पर अवैध कब्जा छोड़ना होगा। हाईकोर्ट ने पात्र झुग्गीवासियों के पुनर्वास के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने सभी कब्जाधारियों को आदेश की कॉपी मिलने के 45 दिनों के भीतर अपना अतिक्रमण हटाने का सख्त निर्देश दिया है। दरअसल, रेलवे ने अपनी जमीन पर निर्माण कार्य कराने की योजना बनाई है। लिहाजा, रेलवे परिक्षेत्र के बापू नगर के झुग्गी पर बुलडोजर चलाकर तोड़फोड़ शुरू कर दिया था। इस दौरान बापू नगर निवासी पूजा महतो और अन्य 42 रहवासियों ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। प्रारंभिक सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के पक्ष में स्टे दिया था। झुग्गीवासियों ने पट्टा दिलाने की थी मांग
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि रेलवे द्वारा उनके घरों को तोड़ने और उन्हें बेदखल करने की कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने मांग की थी कि उनके मकानों को न तोड़ा जाए या फिर सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत उन्हें उसी स्थान के आसपास पट्टा देकर नियमित किया जाए या पुनर्वासित किया जाए। रेलवे ने कहा- अवैध रूप से काबिज हैं रहवासी
सुनवाई के दौरान रेलवे प्रशासन की तरफ से बताया गया कि जमीन रेलवे की है और याचिकाकर्ता वहां अवैध रूप से काबिज हैं। रेलवे ने नियमानुसार कार्रवाई की है, लेकिन उन्हें पात्र लोगों के पुनर्वास से कोई आपत्ति नहीं है। वहीं, बिलासपुर नगर निगम ने बताया कि कई निवासियों के पास वैकल्पिक आवास होने के बावजूद उन्होंने जमीन पर कब्जा कर रखा है। हालांकि, जो लोग पुनर्वास नीति के तहत पात्र पाए गए हैं, उन्हें निगम नियमानुसार आवास आवंटित करने के लिए तैयार है। कब्जाधारी 7 दिनों में दें आवेदन, निगम करेगा वेरिफाई
हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता और दोनों पक्षों की सहमति को देखते हुए याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया है कि वे 7 दिनों के भीतर नगर निगम प्रशासन के पास जाएं। निगम उनके दस्तावेजों का सत्यापन करेगा और यदि उनका नाम पात्र हितग्राहियों की सूची में शामिल है, तो उन्हें पुनर्वास योजना के तहत नए पक्के मकान की चाबी और कब्जा सौंप दिया जाएगा। केवल पात्र हितग्राहियों को मिलेगा मकान
केवल उन्हीं झुग्गीवासियों को नया आवास मिलेगा जिनका नाम निगम की पात्रता सूची में है। जिन लोगों के पास पहले से अपने पक्के मकान या वैकल्पिक आवास हैं, उन्हें अपात्र घोषित कर दिया गया है। हाई कोर्ट के आदेश के बाद अब 45 दिनों के भीतर पूरी जगह से अतिक्रमण खाली करना होगा, ऐसा नहीं करने पर बलपूर्वक बेदखली की जा सकती है।
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