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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनवाया प्रतिभा का लोहा:प्रदेश की ज्ञानेश्वरी भारतीय टीम में, ग्लासगो में 53 किलो वजन वर्ग में दिखाएंगी दम




कॉमनवेल्थ गेम्स की भारतीय टीम में जगह बनाने वाली छत्तीसगढ़ की वेटलिफ्टर ज्ञानेश्वरी यादव की कहानी सिर्फ गोल्ड मेडल की नहीं, बल्कि एक पिता के त्याग और भरोसे की भी है। सातवीं कक्षा में पहली बार बारबेल उठाने वाली ज्ञानेश्वरी अब भारत की जर्सी पहनकर 23 जुलाई से 2 अगस्त तक ग्लासगो में होने वाले गेम्स में देश के लिए मेडल जीतने उतरेंगी। इस सफर में सबसे बड़ी चुनौती ट्रेनिंग नहीं, बल्कि डाइट का खर्च था। पिता दीपक यादव बताते हैं कि वे खुद भी बॉडीबिल्डर रहे हैं, लेकिन बाद में खेल में आगे नहीं आ सके। वे कहते हैं खिलाड़ी की सबसे बड़ी जरूरत अच्छी डाइट होती है। इसके लिए उन्होंने इलेक्ट्रिशियन के तौर पर सालों तक ओवरटाइम किया, ताकि बेटी के सपनों में किसी चीज की कमी न रहे। स्कूल नेशनल से लेकर ओपन नेशनल, फिर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक ज्ञानेश्वरी लगातार मेडल जीतती रहीं। सातवीं में उठाया पहला वेट, अब भारत की उम्मीद ज्ञानेश्वरी ने सातवीं कक्षा से वेटलिफ्टिंग शुरू की थी। फिर लगातार स्कूल नेशनल, ओपन नेशनल व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतती चली गईं। हाल ही में नेशनल चैंपियनशिप में 53 किलोग्राम वर्ग का गोल्ड पदक जीतने के बाद उनका चयन कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए भारतीय टीम में हुआ है।



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