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धान बेचने और योजनाओं का लाभ उठाने एग्रीस्टैक में रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके बिना एकीकृत किसान पोर्टल में पंजीयन नहीं होगा। अभी तक धान बेचने वाले 44411 में से 40559 किसानों का ही पंजीयन हो सका है। अभी भी 3860 किसान पंजीयन नहीं करा सके हैं। कृषि विभाग ने इसके लिए ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों को किसानों से संपर्क करने जिम्मेदारी दी है।
किसानों को 30 अक्टूबर तक पंजीयन करवाना होगा। किसान के जमीन का हर खसरा नंबर पोर्टल पर लिंक करना अनिवार्य है। किसान उसी खसरे से धान बेच सकता है, जिसका पंजीयन एग्रीस्टैक में कराया गया है। इस साल धान बेचने वाले किसानों के लिए नया सिस्टम एग्रीस्टैक और किसान पोर्टल तैयार किया गया है। शुरुआत से ही एग्रीस्टैक पोर्टल से परेशानी हो रही है। इसमें पुराना डेटा होने, गांव का नाम दर्ज नहीं होने व नए खाताधारकों का नाम अपडेट नहीं होने के कारण रजिस्ट्रेशन नहीं करवा पा रहे हैं। एग्रीस्टैक में पंजीयन कराना शासन ने अनिवार्य कर तो दिया है। शहरी क्षेत्र के किसानों का भी पंजीयन नहीं हो पा रहा था।
बाद में सुधार होने पर अब पंजीयन करा रहे हैं। नई धान बेचने वाले किसानों को भी एग्रीस्टैक में पंजीयन करना होगा । इसके बाद ही धान की बिक्री कर सकेंगे। अब सहकारी समितियों में भी पंजीयन किया जा रहा है। किसान धान बेचने से वंचित न हो इसके लिए ही प्रचार प्रसार भी किया जा रहा है। ^कृषि विभाग के उप संचालक डीपीएस कंवर का कहना है कि एग्रीस्टैक पोर्टल पर पंजीयन कराने किसानों को प्रेरित किया जा रहा है।
इसके बिना धान नहीं बेच सकते। एकीकृत किसान पोर्टल में इसके बाद ही पंजीयन होगा। योजना का लाभ भी इसी पंजीयन से आगे मिलेगा। इसी पोर्टल से पोर्टल सिर्फ धान बेचने के लिए ही नहीं बल्कि केंद्र और राज्य सरकार की अन्य योजनाओं का लाभ लेने के लिए भी जरूरी है। पीएम किसान निधि लेने वाले किसानों को भी पोर्टल में पंजीयन करना होगा। जिले में 80 हजार किसानों को किसान निधि मिलती है। इसमें से अभी तक 47273 किसानों का पंजीयन हुआ है। एक बार किसान का डिजिटल रजिस्ट्रेशन आईडी बन जाने के बाद बार-बार दस्तावेज देने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
पंजीयन के बाद पटवारी कर रहे हैं सत्यापन जिले में पिछले 5 महीने से पंजीयन जारी है। पंजीयन के लिए कृषि व राजस्व विभाग के कर्मचारियों को काम पर लगाया गया था। पांच माह बीत जाने के बाद भी शत प्रतिशत रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाया है। इसमें राजस्व विभाग की प्रमुख भूमिका है। पटवारियों को ही रकबा का सत्यापन करने की जिम्मेदारी है। यह सब ऑनलाइन हो रहा है।
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