उत्तर प्रदेश में निर्मित अमवार बांध का असर छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती गांवों पर लगातार पड़ रहा है। रामानुजगंज सीमा से महज 6 किलोमीटर दूर बने इस बांध के कारण छत्तीसगढ़ के 6 गांव आंशिक रूप से प्रभावित हो रहे हैं।
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इन प्रभावित परिवारों के विस्थापन की भरपाई के लिए कनहर अंतरराज्यीय परियोजना, अमवार (उत्तर प्रदेश) द्वारा वर्ष 2015 में 70 करोड़ 34 लाख 30 हजार रुपये की राशि जल संसाधन विभाग, बैकुंठपुर (छत्तीसगढ़) को उपलब्ध कराई गई थी। इसका उद्देश्य राज्य के प्रभावित परिवारों को पुनर्वास की सुविधाएं प्रदान करना था।

पुनर्वास के लिए भूमि आरक्षित, प्रभावित परिवारों को पैकेज का वादा
पुनर्वास के लिए छत्तीसगढ़ के ग्राम त्रिशूली में लगभग 37 एकड़ भूमि आरक्षित की गई थी। योजना के तहत, डूब क्षेत्र के 32 प्रभावित परिवारों को 450 वर्ग मीटर का भूखंड और 7 लाख 11 हजार रुपये का पुनर्वास पैकेज दिया जाना था।
इसके अतिरिक्त, पुनर्वास स्थल पर 3 करोड़ 63 लाख 19 हजार रुपये की लागत से सड़क, सामुदायिक भवन, केटल शेड, आंगनबाड़ी केंद्र, प्राथमिक शाला, निर्मला घाट, श्मशान घाट और गोठान सहित विभिन्न मूलभूत सुविधाओं का निर्माण भी किया गया।
हालांकि, यह पूरी संरचना आज तक उपयोग में नहीं लाई जा सकी है। आठ वर्ष बीत जाने के बाद भी प्रभावित परिवारों को न तो आवंटित भूखंड मिले हैं और न ही पुनर्वास पैकेज की राशि।

खाली पड़ी सुविधाएं जर्जर, विस्थापित परिवार अब भी इंतजार में
खाली पड़ी सुविधाएं अब धीरे-धीरे जर्जर होने लगी हैं, जबकि विस्थापित परिवार लगातार आश्वासनों के सहारे वर्षों से इंतजार कर रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पुनर्वास कार्यों को लेकर न तो स्पष्ट पहल हो रही है और न ही प्रशासन की ओर से समयबद्ध कार्रवाई।
वहीं, प्रभावित परिवार अपनी मूल भूमि खोने के बाद आर्थिक, सामाजिक और भौतिक असुरक्षा का सामना कर रहे हैं। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने शासन से पुनर्वास प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से पूर्ण करने की मांग की है।
इस संबंध में अधीक्षण अभियंता खलको ने बताया कि उन्होंने कार्यपालक अभियंता से चर्चा की थी। जल संसाधन विभाग बैकुंठपुर से यह कार्य संचालित हो रहा है और वहां कई बार राशि जारी करने के लिए पत्राचार किया गया है।
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