साइबर ठगों ने सीआरपीएफ के रिटायर्ड जवान को बनाना निशाना।
बिलासपुर में मुंबई क्राइम ब्रांच के अफसर बनकर साइबर ठगों ने सीआरपीएफ के रिडायर्ड जवान से 6 लाख 30 हजार रुपए की ठगी कर ली। ठगों ने उनके बैंक अकाउंट का गैंगस्टर बिश्नोई लारेंस के लेनदेन में इस्तेमाल करने का डर दिखाया, जिसके बाद उनसे ऑनलाइन पैसे वसूल लि
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सकरी के पास आसमा सिटी फेस-2 में रहने वाले दिवाकर मंडल सीआरपीएफ के रिटायर्ड जवान हैं। 2 नवंबर को उनके मोबाइल पर अनजान नंबर से कॉल आया। फोन करने वाले ने खुद को टेलीकॉम कंपनी का कर्मचारी बताया। उसने बताया कि उनके पैन और आधार कार्ड का मुंबई में उपयोग कर कनाडा में बैंक अकाउंट खोला गया है।
जिसमें अवैध लेनदेन हुआ है। जिसकी जांच मुंबई क्राइम ब्रांच कर रही है। इस दौरान कथित टेलीकॉम कंपनी के कर्मचारी ने कांफ्रेस कॉल में लेकर किसी दूसरे व्यक्ति को कनेक्ट किया। उसे मुंबई क्राइम ब्रांच का अफसर बताया गया।

मनी लांड्रिंग केस में फंसने का डर दिखाकर वसूले पैसे बातचीत के दौरान कथित अफसर और कर्मचारी ने मिलकर रिटायर्ड जवान को डराया और मनी लांड्रिंग के केस में फंसने की धमकी दी। जिसके बाद इस लफड़े से बचने के लिए रिटायर्ड कर्मचारी से पैसे की डिमांड की।
लारेंस बिश्नोई गैंग का बताकर धमकाया कथित अफसर और कर्मचारी ने उन्हें धमकाया कि उनके नाम के बैंक अकाउंट का उपयोग अवैध गतिविधियों और मनी लॉन्ड्रिंग में किया जा रहा है। ठगों ने दावा किया कि खाते के ट्रांजेक्शन से यह संकेत मिलता है कि खाताधारक बिश्नोई गैंग का मेंबर है। उन्हें भरोसा दिलाने के लिए वाट्सअप काल किया, जिसके बाद उन्हें मोबाइल पर कुछ दस्तावेज भी शेयर किए।
जांच के नाम पर खाते की पूरी रकम क्राइम ब्रांच के खाते में ट्रांसफर करने को कहा। दबाव में आकर पीड़ित ने 6 नवंबर को RTGS के जरिए 6 लाख 30 हजार रुपए उनके बताए गए अकाउंट में ट्रांसफर कर दिए। बाद में जब पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ, तो उन्होंने माामले की शिकायत सकरी थाने में की। उनकी रिपोर्ट पर पुलिस ने धोखाधड़ी का केस दर्ज कर लिया है।
पुलिस की अपील-ऐसे साइबर फ्राड के केस में न दें पैसे सीएसपी निमितेश सिंह ने कहा कि किसी भी आपराधिक केस में पुलिस या कोई जांच एजेंसी इस तरह से फोन कॉल कर न तो जांच करती और न ही मेसेज वगैरह करती है। जांच टीम सीधे उन्हें बुलाकर या नोटिस भेजकर एक्शन लेती है। किसी भी अनजान कॉल, व्हाट्सएप मैसेज या खुद को अधिकारी बताने वालों पर भरोसा न करें और किसी भी तरह की जानकारी या पैसा साझा करने से पहले पुलिस से संपर्क करें। इस तरह के कॉल करने धमकाने वाले साइबर फ्राड होते हैं, जो डराकर या फिर दूसरे तरीके से पैसे वसूल करते हैं।
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