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कोरिया जिले के पिछड़े ब्लॉक सोनहत के एक छोटे से गांव अंगवाही की मंगली ने जैविक खेती को सशक्तिकरण का जरिया बना दिया है। उनकी मजबूत इच्छाशक्ति और बिहान मिशन के सही मार्गदर्शन ने न केवल उनकी आर्थिक स्थिति सुधारी है, बल्कि अब गांव की 50 से अधिक महिलाएं उनके साथ जुड़कर 40 एकड़ में टमाटर की जैविक खेती कर रही हैं, जिसकी सप्लाई महाराष्ट्र तक हो रही है।
दरअसल, मंगली द्वारा उत्पादित टमाटर के छिलके पतले होने और अधिक खट्टापन होने के कारण महाराष्ट्र के बाजारों में इसकी मांग तेजी से बढ़ी है। जैविक खेती की वजह से उपभोक्ताओं का विश्वास भी बढ़ा है, जिससे उन्हें अच्छी कीमत मिल रही है। अन्य महिलाओं की तरह ही साधारण जीवन जीने वाली मंगली ने अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने और महिलाओं की भूमिका को सशक्त बनाने का सपना देखा। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान और आदि कर्मयोगी अभियान के तहत स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद, उन्होंने सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ) से 50 हजार रुपए का ऋण लिया और व्यावसायिक रूप से टमाटर की खेती शुरू की। उन्होंने पारंपरिक खेती की बजाय जैविक तरीकों को अपनाया और ग्राफ्टेड टमाटर पौधों का चयन किया। बीते साल 3.5 एकड़ जमीन में खेती शुरू करने पर उन्हें 2.50 लाख की आमदनी हुई, और इस वर्ष 2025 में 3.50 लाख तक की आमदनी की उम्मीद है।
40 एकड़ में फैला टमाटर का रकबा मंगली की सफलता को देखते हुए इस साल उन्होंने अंगवाही के साथ-साथ बसवाही, सुंदरपुर और मदला गांव की 50 से अधिक महिलाओं को भी जैविक और वैज्ञानिक विधि से खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया है। वर्तमान में सोनहत ब्लॉक के इन पांच गांवों में टमाटर का रकबा बढ़कर 40 एकड़ हो गया है, जिसमें 60 महिलाएं काम कर रही हैं। इस वर्ष सामूहिक रूप से 25 लाख रुपए से अधिक के टमाटर उत्पादन कर बेचने का लक्ष्य रखा गया है।
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