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हर 12 साल में बदलते हैं जगन्नाथ की मूर्ति



भास्कर न्यूज | बालोद गुरुवार को दोपहर 3 बजे जिला मुख्यालय के नयापारा स्थित कपिलेश्वर मंदिर से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा की रथयात्रा निकाली जाएगी। इसके पहले मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना व अन्य गतिविधियां होंगी। शहर भ्रमण के बाद भगवान जगन्नाथ अपनी भाई व बहन के साथ मौसी के घर महामाया मंदिर में 7 दिन तक रुकेंगे। संतोष पाढ़ी ने बताया कि ऐतिहासिक कपिलेश्वर मंदिर में हर 12 साल मंे भगवान जगन्नाथ की मूर्ति बदलते है। पुरी ओड़िशा से ही नई मूर्ति मंगाते है। बालोद में रथयात्रा का इतिहास ऐसा रहा कि लगातार 48 साल लकड़ी के रथ से भगवान जगन्नाथ ने शहर का भ्रमण किया। सबसे पहले रथयात्रा का जिम्मा पांडेपारा निवासी प्रधानपाठक ने उठाया था। तब लकड़ी के रथ में जगन्नाथ की शोभायात्रा निकलती थी। 1958 से 2006 तक लकड़ी के रथ से रथयात्रा निकाली गई। बार-बार रथ टूटने की वजह से भिलाई से लोहे का रथ खरीदा गया। जिसके बाद 2007 से अब तक रथयात्रा पर लोहे के रथ से भगवान जगन्नाथ शहर भ्रमण करते आ रहें है। जनसहयोग से मंदिर का निर्माण 75 फीसदी पूरा जिला मुख्यालय के गंगासागर तालाब के पास आस्था के केंद्र शीतला सांई धाम के बगल में जनसहयोग से भगवान जगन्नाथ मंदिर का निर्माण कार्य 75% हो चुका है। यह शहर का पहला जगन्नाथ मंदिर है। जिसकी ऊंचाई 18 फीट है। मंदिर तैयार होने के बाद ओडिशा के पुरी से लकड़ी से तैयार जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा की मूर्ति को यहां लाकर विधि-विधान से स्थापित करने की प्लानिंग है। रामजानकी मंदिर में रथयात्रा के मौके पर गंजामूंग प्रसाद का वितरण किया जाएगा।



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